यूपी एमएलसी चुनाव: भाजपा के लिए बोया बीज, फसल काट ले गई सपा, अपने वोट बैंक से पलट दिया खेल; अलग दिखे समीकरण
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आगरा शिक्षक खंड में सपा की जीत के पीछे बदले समीकरण
Indianewslive247.com – य प एमएलस च न व – आगरा शिक्षक खंड के एमएलसी चुनाव में डॉ. आकाश अग्रवाल की जीत ने यह दिखाया कि संगठित शिक्षक नेटवर्क चुनावी नतीजों को किस तरह निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है। भाजपा के लिए लंबे समय तक सक्रिय तैयारियों से बने उनके संपर्कों का लाभ अंततः समाजवादी पार्टी को मिला। सपा ने अंतिम चरण में अपने पहले घोषित उम्मीदवार डॉ. चंद्र प्रकाश गुप्ता के स्थान पर डॉ. आकाश अग्रवाल को मैदान में उतारा और यह दांव पार्टी के लिए सफल साबित हुआ।
इस जीत के साथ विधान परिषद में समाजवादी पार्टी का संख्याबल बढ़ा। चुनाव परिणाम को केवल दलगत मुकाबले के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे सरकारी और वित्तविहीन विद्यालयों से जुड़े शिक्षकों के अलग-अलग प्रभाव क्षेत्रों के मेल के रूप में भी समझा जा रहा है।
वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों में मजबूत आधार
आगरा जिले में लगभग 40 राजकीय विद्यालय, 109 सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज और करीब 920 वित्तविहीन विद्यालय हैं। संख्या की दृष्टि से वित्तविहीन संस्थानों का दायरा सबसे बड़ा है। डॉ. आकाश अग्रवाल ने इसी वर्ग के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाई और शिक्षकों के मुद्दों पर लगातार संपर्क बनाया।
वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के बीच उन्होंने केवल समर्थन जुटाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि मतदाता बनवाने की प्रक्रिया में भी मदद की। यही नेटवर्क चुनाव में उनकी प्रमुख ताकत बना। शिक्षक मतदाताओं के इस हिस्से में बनी पकड़ ने उनके पक्ष में मतदान को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राजनीतिक रूप से यह परिणाम इसलिए भी उल्लेखनीय है कि पहले की तैयारियां भाजपा के समर्थन की पृष्ठभूमि में हुई थीं, लेकिन टिकट मिलने के बाद वही संगठनात्मक आधार सपा उम्मीदवार के साथ खड़ा दिखाई दिया। इससे साफ हुआ कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में व्यक्तिगत पहुंच, संस्थागत संपर्क और मतदाता पंजीकरण की तैयारी बेहद अहम हो सकती है।
चंद्र प्रकाश के संपर्कों ने बढ़ाई सपा की ताकत
पूर्व जीआईसी प्राचार्य डॉ. चंद्र प्रकाश की सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के बीच अच्छी पहचान मानी जाती है। अनुभव और पुराने संबंधों को देखते हुए सपा ने पहले उन्हें उम्मीदवार घोषित किया था। बाद में पार्टी ने रणनीति बदलते हुए डॉ. आकाश अग्रवाल को टिकट दिया।
टिकट बदले जाने के बाद डॉ. चंद्र प्रकाश की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। इसके बावजूद वह सपा प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय रहे। सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के बीच डॉ. चंद्र प्रकाश के संपर्क और वित्तविहीन संस्थानों में डॉ. अग्रवाल की पहुंच ने एक साझा चुनावी आधार तैयार किया।
यह संयोजन सपा के लिए लाभकारी साबित हुआ। सरकारी और वित्तविहीन, दोनों प्रकार के विद्यालयों से जुड़े शिक्षक मतदाताओं तक पहुंच बनने से पार्टी का अभियान व्यापक हुआ। चुनाव ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षक खंड जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार की व्यक्तिगत साख और समुदायों के बीच भरोसा दल के पारंपरिक समीकरणों को बदल सकता है।
फर्जी मतदाता विवाद और संशोधित मतदाता सूची
चुनाव से पहले मतदाता सूची में कथित फर्जी नाम शामिल होने का मुद्दा भी चर्चा में रहा। विशेष रूप से वित्तविहीन विद्यालयों से संबंधित मतदाताओं पर सवाल उठे। उस समय डॉ. चंद्र प्रकाश ने भी इस विषय को लेकर शिकायत की थी। हरिकिशोर तिवारी ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी, जबकि उस समय वह किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं थे।
शिकायतों के बाद मतदाता सूची में संशोधन हुआ। जिले में शिक्षक मतदाताओं की संख्या 16,380 से घटकर 15,788 रह गई। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेसवार्ता के दौरान आगरा में करीब 10 हजार फर्जी मतदाता बनाए जाने का आरोप लगाया था।
पूरे विवाद के दौरान डॉ. आकाश अग्रवाल की ओर से फर्जी मतदाताओं के संबंध में कोई शिकायत सामने नहीं आई। यह तथ्य भी चुनावी बहस में अलग रहा, क्योंकि वित्तविहीन विद्यालयों से जुड़े मतदाता इस चुनाव में प्रभावशाली समूह माने जा रहे थे। मतदाता सूची का संशोधन यह बताता है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकरण और उसकी जांच चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जीत के बाद मतगणना को निष्पक्ष बताया
मतगणना के दौरान उठे विवाद के बाद डॉ. आकाश अग्रवाल के बयान में बदलाव दिखाई दिया। मंगलवार को उन्होंने मतगणना में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। बुधवार को जीत का प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद उन्होंने पूरी मतगणना प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया। उनके अनुसार, उन्हें 14 हजार से अधिक वोट मिले और जीत का अंतर 4,200 से ज्यादा रहा।
मतगणना कक्ष में पूरी प्रक्रिया कैमरों की मौजूदगी में पारदर्शी ढंग से पूरी हुई है।
उन्होंने कहा कि 4,000 से अधिक मतों के अंतर के कारण कुछ निरस्त मतों से नतीजे पर असर नहीं पड़ा। मंगलवार रात मतगणना स्थल पर हुई मारपीट की घटना पर उनका कहना था कि कक्ष के भीतर की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है और उससे विवाद की शुरुआत तथा हमले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। विपक्षी पक्ष की किसी शिकायत के जवाब में वह भी अपना पक्ष रखने के लिए आवेदन देंगे।
चुनावी माहौल पर उठाए सवाल
डॉ. अग्रवाल ने अपने पहले के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान हुए घटनाक्रमों से शासन और प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर उनकी धारणा प्रभावित हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों पर दबाव बनाया गया तथा बूथ कैप्चरिंग के प्रयास हुए। उनके मुताबिक, इन्हीं परिस्थितियों से बने तनाव और भावनात्मक स्थिति में धर्म परिवर्तन संबंधी प्रतिक्रिया सामने आई थी।
वैश्य और अग्रवाल समाज को लेकर उन्होंने कहा कि इस समुदाय की पहचान मेहनत, पुरुषार्थ और भामाशाह की दानवीर परंपरा से जुड़ी है। उन्होंने समाज सेवा, धर्मशालाओं और अस्पतालों के संचालन में इस वर्ग की महत्वपूर्ण भागीदारी का उल्लेख किया और कहा कि समुदाय के बारे में अनुचित टिप्पणियों का विरोध स्वाभाविक है। साथ ही उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के संसाधनों और क्षेत्र से जुड़े विषयों पर भी अपनी बात रखी।
आगरा शिक्षक खंड का यह परिणाम आने वाले चुनावों के लिए भी एक संकेत है। संगठित मतदाता समूह, स्कूल स्तर के संपर्क और उम्मीदवारों के सामाजिक नेटवर्क, तीनों मिलकर उस चुनावी गणित को बदल सकते हैं जिसे केवल राजनीतिक दलों की ताकत के आधार पर समझना पर्याप्त नहीं होता।
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