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बैंक को माथा टेकता था ‘धुरंधर’ का ये एक्टर, सिर्फ 84 रुपए लेकर आया था मुंबई; सफलता को लेकर कही ये बात

बैंक को माथा टेकता था गौरव गेरा: धुरंधर से लेकर आठ रुपए तक अपनी यात्रा कहीं ये बात

ब क क म थ ट कत – बैंक को माथा टेकता था गौरव गेरा के जीवन के आरंभिक दिनों में एक अहम घटना रही। मुंबई जाने के बाद उनके खाते में केवल 84 रुपये बचे हुए उन्होंने याद किया। उन्होंने कहा कि इतनी कम रकम से एहसास हो गया कि यह वह नहीं है जो उन्हें चाहिए। उनके पिता ने उन्हें चलाने की बात कही, “आधे साल काम कर लेना, फिर जो मन में आएगा।” गौरव ने अपनी जरूरत के लिए आधा साल जॉब किया और फिर थिएटर में शामिल हो गए।

परिवार के समर्थन ने बदल दिया रास्ता

गौरव के पिता आईआईटी-बीएचयू से इंजीनियर हैं, भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। लेकिन उनके परिवार में धन वाले लोगों के बावजूद उनकी चुनौतियों के बारे में बात करते हुए गौरव ने कहा कि उन पर कोई भार नहीं डाला गया। आठ रुपयों के साथ अपनी बुलंदी तक पहुंचने के बाद भी उन्हें लगता रहा कि यह बस शुरुआत है। उनके पास अभी भी एक लेटर है, जहां लिखा होता था, “2,000 रुपये भेज रहा हूं, इससे ज्यादा नहीं है।” इस बात पर गौरव ने जोर दिया कि उनके परिवार के समर्थन के कारण उनके सपनों को पूरा करने में कोई बाधा नहीं आई।

“मैं आते-जाते बैंक को माथा टेकता था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि उनका ख्याल रखना मुझे जरूरत था। वास्तव में, मुझे इतना दुख होता था कि मेरे पास केवल आठ रुपये ही हैं। लेकिन मैं जानता रहा कि आगे के कदम लेना होगा।”

गौरव के कहने पर उनके जीवन के प्रारंभिक दिनों में बहुत असहज स्थितियां आए। ऑटो के बिना घूमना, टिकट नहीं लेना और छोटी छोटी बचत करना बेहद आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि अपनी जान बचाने के लिए बैंक के दरवाजे छूते हुए कहते रहे, “मेरा ख्याल रखो।” इसके बाद उन्ने लगा कि अब आगे की यात्रा के लिए कुछ नए तरीके लेने पड़ेंगे। तब उनका ध्यान आए अभिनय के प्रशिक्षण पर गया।

धुरंधर बनकर बैंक को माथा टेकता था गौरव गेरा का पहला बड़ा कदम

गौरव गेरा के अभिनय के क्षेत्र में एक बड़ी कहानी शुरू हुई जब उन्होंने फिल्म “धुरंधर” में अपने पहले बड़े प्रोजेक्ट में शामिल हो गए। उनके कहने पर इस रोल के लिए उन्होंने कई लंबी रातें बिताई और नए तरीके खोजे। बैंक को माथा टेकता था कहानी उनके खाते के आठ रुपयों तक के निर्भरता के बारे में बताती है। लेकिन इस अनुभव ने उन्हें अपने लक्ष्य के लिए अधिक धैर्य और अनुशंसा दिलाई।

उनके कहने पर बैंक को माथा टेकता था अवस्था में उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया। अपनी पहली फिल्म में शामिल होने के बाद उन्हें आगे के क

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