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आज इधर, कल उधर!: 4 मई के बाद 180 डिग्री बदल गए ये 10 राजनीतिक रिश्ते

आज इधर, कल उधर!: 4 मई के बाद राजनीतिक रिश्तों में 180 डिग्री परिवर्तन

परिवार के भीतर तकरार तेज हो गई

आज इधर कल उधर – पश्चिम बंगाल की राजनीति में 4 मई के बाद देखे जा रहे बदलाव टीवी ड्रामा के कहानियों से अधिक गहरा लग रहा है। यहां तक कि पहले एक दूसरे के आत्मनिर्भर रिश्ते रखने वाले नेताओं के बीच भी दूरी बढ़ गई। वहीं कुछ लंबे समय से विरोधी रहे नेताओं के बीच संबंध अब ऐसे बन गए हैं कि एक दूसरे के साथ एकजुटता दिखाई दे रहे हैं।

ममता बनर्जी और बॉबी के रिश्ता खंडित हो गया

फिरहाद हकीम आज तक ममता बनर्जी के प्रमुख विश्वासी नेताओं में से एक रहे। वह भवानीपुर में चुनाव अभियान के नेतृत्व के लिए लगातार उनके साथ रहते थे। लेकिन 4 मई के बाद इस रिश्ते में आई तेजी से तेजी आई। कजरी बंद्योपाध्याय के बेटे ने ममता बनर्जी द्वारा दिया गया उपहार वापस करने के लिए कालीघाट जाकर लौटा दिया।

ऋतोब्रत बंद्योपाध्याय के साथ राजनीतिक विभाजन का नजारा देखने को मिला।

रचना बनर्जी ने सरकार पर आरोप लगाए

रचना बनर्जी को चुनावी टिकट देने के बाद ममता बनर्जी के साथ मंच साझा करती रहीं। लेकिन जनवरी में उन्होंने घोषणा की कि उनके संसदीय क्षेत्र में कोई विशेष कार्य नहीं किया गया। इस बयान ने दोनों के रिश्तों में दूरी को सार्वजनिक कर दिया।

ममता सरकार के दौरान मेरा कोई काम नहीं किया गया।

दीपक अधिकारी और ममता बनर्जी के रिश्ता में बदलाव

दीपक अधिकारी (देव) के रिश्ते में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। घाटाल मास्टर प्लान के लिए धन आवंटित करने का श्रेय उन्हें देव अक्सर दिया जाता रहा। लेकिन 4 मई के बाद उनके हस्ताक्षर नए दस्तावेजों में दिखाई दिए। अब दोनों के रिश्ते में एक साफ दूरी दिखाई देने लगी।

ममता बनर्जी और कजरी बंद्योपाध्याय के रिश्ता बदल गया

कजरी बंद्योपाध्याय ममता बनर्जी के रिश्तेदार रहीं। उन्होंने भवानीपुर उपचुनाव में उनकी चुनाव एजेंट के रूप में भी भूमिका निभाई। लेकिन एक दिन में वे शुभेंदु अधिकारी के कार्यक्रम में पहुंचीं और मुख्यमंत्री की प्रशंसा की। यह अब राजनीतिक लाइन में भी अलग हो गई।

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