आज का शब्द: स्वांग और सपना भट्ट की कविता
शब्द का अर्थ और व्याख्या
आज क शब द – हिंदी हैं हम शब्द शृंखला में आज का शब्द स्वांग है। इसका अर्थ कृत्रिम वेश या बनावटी छवि हो सकता है, जो आत्मा के रूप को निरूपित करने या छिपाने के लिए धारण किया जाता है। इसके अलावा, इस शब्द का अर्थ खेल, मजाक या नकल भी हो सकता है।
स्वांग वह छल है जो दिन बरखास्त नहीं होता, बल्कि अनंत तक धारा में बहता रहता है। इसकी व्याख्या में एक और अर्थ भी छिपा हुआ है, जो वास्तविकता के स्थान पर छेड़-छाड़ करता है।
सपना भट्ट की कविता: आत्मा के रोशनदानों से
हे देव! दुःख ही दुःख गमकता है पुराने बासमती भात सरीखा मेरी देह की कोठरी में। आत्मा के रोशनदानों से टपटप अँधेरा ही गिरता है। अनुभव के गूंज तेज होते रहे हैं जिसका त्योग निरंतर बरखास्त रहता है। उधर साँसों की दुर्बोध लिपि जीवन के पीले कागज़ पर मांद पड़ती जाती है। इधर मन पर लगा सूतक समाप्त होने पर ही नहीं आता। स्मृति दोहराव की भाषा में लौटती हूँ जो प्रणय बीत कर मुरझाए हुए फूलों में बदलता है।
खराब तरीके से छलने वाला दुःख आत्मा के बंदीवास से भी जीवन के अंत तक बना रहे हैं। उस पर यह खुलना कि प्रीत का सम्मोहन कितना ही मृदु हो एक दिन टूट जाता है। प्रेमी का स्पर्श कितना ही काम्य हो एक दिन देह उसके स्मरण से मुक्त हो जाती है।
उफ़! कितनी घनी ऊब से भरे हुए हैं ये दिन। ऐसे में यात्रा की थकान निराश करती है लेकिन गंतव्य की निकटता नहीं गिरती। जानती हूँ निश्चित रूप से कि छल छद्म अंततः नष्ट हो जाते हैं, फिर भी चाहती हूँ कि प्रेम का यह दुःख जीवन पर्यंत बना रहे।
सपना भट्ट की कविता आत्मा के रोशनदानों से शामिल है, जो भावनाओं और विचारों की गहराई को बयान करती है। यह एक अंतर्मुखी गीत है जो नकल के गीत और वास्तविकता के भ्रम को छेड़ता है।
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