अब भारत के पास अपना जीपीएस: इसरो के नेविगेशन उपग्रह से आम जनता को कितना लाभ, एनवीएस-03 मिशन की खासियत क्या?
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अब भारत के पास अपना नेविगेशन सिस्टम, NVS-03 से क्या बदलेगा?
Indianewslive247.com – अब भ रत क प स अपन – अब भारत के पास अपनी नेविगेशन प्रणाली को मजबूत बनाने वाला एक और अहम उपग्रह है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एनवीएस-03 नेविगेशन उपग्रह को भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा में पहुंचाने के लिए जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट का इस्तेमाल किया। यह मिशन भारत की स्वदेशी नेविगेशन क्षमता और सटीक समय-सेवा को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण स्थल से जीएसएलवी-एफ18 ने शुक्रवार रात 11:51 बजे उड़ान भरी। रॉकेट अपने साथ 2,232 किलोग्राम वजनी एनवीएस-03 उपग्रह लेकर गया। 50 मीटर ऊंचे और 420 टन वजनी इस तीन-चरणीय रॉकेट के प्रक्षेपण से पहले इसरो ने 24 घंटे की उलटी गिनती शुरू की थी।
एनवीएस-03 और NavIC की भूमिका
एनवीएस-03 अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रहों की श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। यह भारत की नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन, यानी NavIC, प्रणाली का हिस्सा है। अब भारत के पास लोकेशन, मार्गदर्शन और समय की जानकारी देने के लिए अपनी क्षमता को और मजबूत करने का अवसर है।
यह प्रणाली भारत और उसकी सीमाओं से करीब 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में नेविगेशन सेवाओं में मदद करेगी। इसका उपयोग रास्ता खोजने, स्थान की पहचान करने और अत्यंत सटीक समय प्राप्त करने जैसे कार्यों में हो सकता है।
आम लोगों को कैसे मिलेगा लाभ?
एनवीएस-03 में स्वदेशी परमाणु घड़ी लगाई गई है, जिसे भारत में विकसित किया गया है। परमाणु घड़ी का काम बेहद सटीक समय उपलब्ध कराना है। उपग्रह में नया एल1 सिग्नल भी जोड़ा गया है, जिससे स्मार्टफोन और वाहनों में नेविगेशन सेवाओं की सटीकता बेहतर होने की उम्मीद है।
अब भारत के पास डिजिटल सेवाओं, परिवहन, दूरसंचार, बिजली ग्रिड, डेटा केंद्रों और वित्तीय लेनदेन के लिए भरोसेमंद समय-सूचना प्रणाली को आगे बढ़ाने का आधार है। यह मिशन सरकार की ‘एक देश, एक समय’ पहल को भी गति दे सकता है।
उपग्रह को पहले भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा में पहुंचाया गया है। इस कक्षा में पृथ्वी से इसकी निकटतम दूरी 170 किलोमीटर और अधिकतम दूरी 37,023 किलोमीटर बताई गई है। बाद में यह 32.5 डिग्री पूर्व में अपनी निर्धारित स्थिति तक पहुंचेगा।
एनवीएस-03 मिशन पर आम सवाल
क्या एनवीएस-03 भारत का अपना जीपीएस है? एनवीएस-03 भारत की NavIC नेविगेशन प्रणाली का हिस्सा है। इसे भारत की स्वदेशी नेविगेशन क्षमता के विस्तार के रूप में देखा जा सकता है।
क्या इससे मोबाइल नेविगेशन बेहतर होगा? उपग्रह में शामिल एल1 सिग्नल से स्मार्टफोन और वाहनों में मार्गदर्शन सेवाओं को बेहतर सटीकता मिलने की संभावना है।
मिशन में तकनीकी बदलाव क्यों किए गए? जनवरी 2025 के एनवीएस-02 मिशन में कनेक्टर से जुड़ी खराबी के बाद इसरो ने उपग्रह में बदलाव किए और सुरक्षा संबंधी सुधार लागू किए।
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