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काशी में सीएम योगी का संदेश: धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागूंगा और छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा

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Foto : David Miller - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. काशी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धर्म और राष्ट्र रक्षा का संदेश
  2. संतों की साधना और राष्ट्रीय जागरण
  3. स्थानीय पाठकों के लिए सवाल-जवाब
  4. Related Reading
  5. Frequently Asked Questions

काशी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धर्म और राष्ट्र रक्षा का संदेश

Indianewslive247.com – क श म स एम य ग – क श म स एम य के संदर्भ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी से धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। सिगरा स्थित भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह में उन्होंने कहा कि धन के लिए धर्म का त्याग नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि युद्ध की परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो राष्ट्र की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि धर्म के लिए किया गया त्याग महान होता है। शांति के समय धर्म का अर्थ संयम, सौहार्द, सेवा और लोककल्याण से जुड़ा है। वहीं, जब राष्ट्र, समाज या सांस्कृतिक विरासत पर संकट आए, तब उसकी रक्षा के लिए संघर्ष के लिए तैयार रहना भी आवश्यक हो जाता है। उनके अनुसार, संन्यासी जीवन का ध्येय केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति दायित्व का भाव भी उसमें शामिल होना चाहिए।

राष्ट्र संकट में हो तो विरासत भी प्रभावित होती है

क श म स एम य कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्र पर संकट आने का असर उसकी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर पर भी पड़ता है। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर, राम जन्मभूमि और श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के इतिहास में आपसी बंटवारे और कमजोरियों का दुष्परिणाम समाज को लंबे समय तक भुगतना पड़ा।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विदेशी आक्रांता सफल नहीं होते, तो क्या काशी विश्वनाथ मंदिर को अपवित्र और क्षतिग्रस्त करने का दुस्साहस होता। इसी प्रकार, उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि पर पांच सौ वर्षों तक गुलामी का कलंक रहने और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के सामने संकट खड़ा होने की परिस्थितियां भी देश की कमजोरियों से जुड़ी रहीं। मुख्यमंत्री ने इन प्रसंगों को राष्ट्रीय एकता और सजगता की आवश्यकता से जोड़कर देखा।

संतों की साधना और राष्ट्रीय जागरण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अतीत की भूलों और विभाजनकारी प्रवृत्तियों के पाप के परिमार्जन के लिए संतों ने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्रीय जागरण का माध्यम बनाया। संत परंपरा ने समाज में सेवा, अनुशासन, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का कार्य किया है। भारत सेवाश्रम संघ जैसे संस्थानों की भूमिका भी इसी व्यापक सामाजिक चेतना से जुड़ी हुई है।

क श म स एम य के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम के विकास और अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, ये कार्य राष्ट्रीय चेतना, आस्था और संकल्प के परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक केंद्रों का संरक्षण केवल धार्मिक विषय नहीं है, बल्कि यह देश की पहचान और ऐतिहासिक स्मृति को सहेजने का प्रयास भी है।

धर्म का अर्थ केवल आस्था नहीं, सामाजिक दायित्व भी

मुख्यमंत्री के संबोधन में धर्म को व्यापक अर्थों में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि धर्म का आधार समाज में सद्भाव, संयम और लोककल्याण है। इसलिए धार्मिक चेतना का उद्देश्य किसी प्रकार का विभाजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ना और उसे अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाना होना चाहिए। संकट की घड़ी में यही चेतना राष्ट्र की एकता और सुरक्षा का आधार बनती है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य और संकल्प भी जरूरी है। इस दृष्टि से उनका संदेश था कि समाज को अपनी परंपराओं, विरासत और राष्ट्रीय हितों के प्रति सजग रहना चाहिए। क श म स एम य के इस संबोधन में धर्म, राष्ट्र और सांस्कृतिक स्वाभिमान को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया गया।

स्थानीय पाठकों के लिए सवाल-जवाब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह संबोधन कहां दिया?

उन्होंने यह संबोधन सिगरा स्थित भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह में दिया।

संबोधन का मुख्य विषय क्या रहा?

संबोधन में धर्म, राष्ट्र रक्षा, सांस्कृतिक विरासत, संत परंपरा और राष्ट्रीय जागरण के महत्व पर बात की गई।

काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या का उल्लेख क्यों किया गया?

मुख्यमंत्री ने इन स्थलों का उल्लेख राष्ट्रीय चेतना, आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के उदाहरण के रूप में किया।

कार्यक्रम से युवाओं और समाज के लिए क्या संदेश निकलता है?

संदेश यह है कि समाज को संयम, सद्भाव, सेवा और राष्ट्रीय एकता की भावना के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक रहना चाहिए।

Frequently Asked Questions

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