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‘सीजेपी से मेरा कोई संबंध नहीं’: प्रदर्शन पर ध्रुव राठी की सफाई, राजनीति में आने को लेकर क्या बोले?

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Foto : Jessica Wilson - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. ध्रुव राठी ने प्रदर्शन में भागीदारी को बताया व्यक्तिगत फैसला
  2. Related Reading
  3. Frequently Asked Questions

ध्रुव राठी ने प्रदर्शन में भागीदारी को बताया व्यक्तिगत फैसला

Indianewslive247.com – स ज प स म र क – यूट्यूबर ध्रुव राठी ने कहा है कि उनका किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है और वह राजनीति में प्रवेश करने के उद्देश्य से विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तथा संस्थाओं की स्वायत्तता से जुड़े सवालों ने उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया।

राठी ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़ाव की बात को भी खारिज किया। उनका कहना है कि प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी को किसी पार्टी की सदस्यता, समर्थन या राजनीतिक भूमिका के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वह खुद को इस विषय पर अपनी राय रखने वाले एक नागरिक के तौर पर पेश करते हैं।

“सीजेपी से मेरा कोई संबंध नहीं है। मैं इस मुद्दे पर व्यक्तिगत हैसियत से आया हूं।”

केवल वीडियो बनाने से आगे बढ़ने का निर्णय

राठी ने बताया कि वह पहले पश्चिम बंगाल, बिहार के चुनावों और अन्य सार्वजनिक विषयों पर वीडियो के माध्यम से अपनी बात रख चुके हैं। हालांकि, इस बार उन्हें लगा कि मामला केवल डिजिटल मंच तक सीमित रखने लायक नहीं है। उनके अनुसार, मुद्दे की गंभीरता ने उन्हें जमीन पर जाकर प्रदर्शन में भाग लेने के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि उनका इरादा विरोध की स्थिति को करीब से समझने और नागरिक के रूप में उसमें शामिल होने का था। उन्हें उम्मीद थी कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होगा तथा लोगों को अपनी चिंताएं रखने का अवसर मिलेगा। राठी ने इस बात पर जोर दिया कि किसी मुद्दे पर बोलना और उसे प्रत्यक्ष रूप से समझने के लिए वहां उपस्थित होना, दोनों अलग अनुभव हैं।

एसआईआर और संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल

राठी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रियाओं और सार्वजनिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर उठने वाले सवालों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उनके विचार में अदालतों को भी ऐसे मामलों को देखना चाहिए और यह परखना चाहिए कि संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं के पास व्यवहार में कितनी स्वतंत्रता और अधिकार मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से मीडिया, न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर दबाव के आरोप सामने आते रहे हैं। राठी ने अपनी टिप्पणी में दो व्यक्तियों का उल्लेख करते हुए उन पर देश की संस्थाओं को अपने प्रभाव में लेने के आरोप लगाए। उन्होंने पुलिस व्यवस्था को भी इस व्यापक दबाव से अलग नहीं माना।

ऐसे मुद्दों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया और संस्थागत जवाबदेही सीधे नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ी होती है। किसी भी सार्वजनिक बहस में आरोपों, दावों और संस्थाओं की भूमिका की जांच कानून तथा स्थापित प्रक्रियाओं के दायरे में होना आवश्यक है।

विपक्षी दलों को संयुक्त प्रदर्शन की सलाह

राठी का मानना है कि अलग-अलग राजनीतिक दलों को अलग तारीखों पर विरोध करने के बजाय इस मुद्दे पर एक साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दलों के बीच मतभेद, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत अहम जैसी बाधाएं हो सकती हैं, लेकिन बड़े सार्वजनिक प्रश्नों पर सहयोग की आवश्यकता होती है।

“गंभीर मुद्दे पर सभी दलों और आम लोगों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रदर्शन से मुद्दे की दृश्यता और सार्वजनिक दबाव दोनों बढ़ सकते हैं। राठी ने आगे होने वाले विरोध कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया, लेकिन यह भी कहा कि उनके पास तत्काल कोई निश्चित योजना नहीं है।

हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों के अनुभव

राठी ने हिरासत में बिताए 24 घंटे का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों से बातचीत हुई। उनके मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने अपने कार्यभार और सेवा के दौरान आने वाले दबावों के बारे में बताया। इस अनुभव के बाद उन्होंने पुलिस बल की कामकाजी परिस्थितियों और वेतन से जुड़ी चिंताओं पर भी ध्यान दिलाया।

उन्होंने कहा कि वह केवल एक दिन के लिए हिरासत में थे, जबकि कई पुलिसकर्मी अपनी नौकरी के दौरान लगातार कठिन परिस्थितियों और दबाव में काम करते हैं। राठी के अनुसार, इस बातचीत ने उन्हें पुलिसकर्मियों की स्थिति के प्रति सहानुभूति रखने पर मजबूर किया।

यह टिप्पणी प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था के बीच मौजूद जटिल संबंध की ओर भी संकेत करती है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस को सुरक्षा, व्यवस्था और प्रशासनिक निर्देशों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है, जबकि प्रदर्शनकारियों का अधिकार अपनी बात शांतिपूर्वक रखना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

घर के बाहर निगरानी और हिरासत की आशंका का दावा

राठी ने दावा किया कि उनके घर के आसपास करीब 50 लोग तैनात हैं, जो लगातार तस्वीरें लेते हैं और उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अनौपचारिक रूप से यह संदेश दिया गया है कि प्रदर्शन में जाने पर उन्हें वहीं हिरासत में लिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि वह विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन अभी किसी कार्यक्रम को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। राठी ने यह भी बताया कि उन्होंने स्वयं अभिषेक को फोन किया था। बातचीत में उन्हें पहले बंगलूरू जाकर प्रकाश राज के कार्यक्रम में शामिल होने का सुझाव दिया गया, जहां हटाए गए मतदाताओं से जुड़े मुद्दे को समझने का अवसर मिल सकता था।

राठी ने अंत में फिर दोहराया कि वह किसी दल के सहयोगी या सदस्य के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से इस सवाल से जुड़े हैं। उनकी टिप्पणी का केंद्र एसआईआर, मतदाता सूची और संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर सार्वजनिक चर्चा की जरूरत पर रहा।

Frequently Asked Questions

What is स ज प स म र क?

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Why does स ज प स म र क matter?

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