17 साल बाद होगा फोर्ट हूड कांड का अंत: निडाल हसन की मौत की सजा पर ट्रंप की मुहर, क्या अब भी रुक सकता है फैसला?
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फोर्ट हूड हमले के दोषी निडाल हसन की सजा को राष्ट्रपति की मंजूरी
Indianewslive247.com – टेक्सास के फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर 2009 में हुई घातक गोलीबारी के मामले में दोषी ठहराए गए अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर निडाल मलिक हसन को फायरिंग स्क्वॉड के माध्यम से मृत्युदंड देने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसकी मौत की सजा को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद सेना के सचिव को फांसी की तारीख और स्थान निर्धारित करना होगा, हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि सजा तुरंत लागू हो जाएगी।
यह मामला अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड की दुर्लभता और उसके क्रियान्वयन से जुड़ी लंबी कानूनी प्रक्रिया को फिर केंद्र में ले आया है। अमेरिकी सेना में 1961 के बाद किसी कैदी की मौत की सजा पर अमल नहीं हुआ है।
मेडिकल सेंटर में शुरू हुई थी गोलीबारी
हसन उस समय अमेरिकी सेना में मनोचिकित्सक के पद पर कार्यरत था। 5 नवंबर 2009 को वह फोर्ट हूड स्थित एक मेडिकल सेंटर पहुंचा, जहां कई सैनिक स्वास्थ्य जांच और तैनाती से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए मौजूद थे। वहां उसने लेजर निशाना लगाने वाली पिस्तौल से गोलियां चलानी शुरू कर दीं।
हमले में 13 लोगों की जान गई और 30 से अधिक लोग घायल हुए। गोलीबारी से पहले हसन ने “अल्लाहु अकबर” कहा था, जिसका अर्थ “ईश्वर महान है” होता है। यह हमला अमेरिकी सैन्य ठिकानों के इतिहास की सबसे गंभीर हिंसक घटनाओं में गिना जाता है।
मुकदमे के दौरान हसन ने अपने बचाव में लगभग कोई सक्रिय कोशिश नहीं की। उसने जूरी के समक्ष स्वीकार किया था कि गोली चलाने वाला व्यक्ति वही था। उसने खुद को ऐसा सैनिक बताया था जिसने “पाला बदल लिया” है। बाद में उसके बयान में यह भी सामने आया कि वह अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान भेजे जाने से रोकना चाहता था, क्योंकि उसके विचार में वे वहां मुस्लिम लोगों को मारने जा रहे थे।
पेंटागन ने कहा, अब फैसले का दिन करीब
पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हसन के लिए आखिरकार फैसले का दिन आ गया है। राष्ट्रपति की स्वीकृति सैन्य मृत्युदंड की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है, लेकिन इसके बाद भी कई स्तरों पर कार्रवाई शेष रहती है।
“हसन के लिए आखिरकार फैसला का दिन आ गया है।”
सैन्य नियमों के तहत मौत की सजा पाने वाले कैदियों के मामलों में प्रशासनिक समीक्षा, कानूनी चुनौती और न्यायिक हस्तक्षेप की पर्याप्त गुंजाइश बनी रहती है। इसलिए तारीख तय होने के बाद भी फांसी या फायरिंग स्क्वॉड से सजा लागू होने में लंबा समय लग सकता है।
क्या हसन अब भी सजा रुकवा सकता है?
राष्ट्रपति की मंजूरी के बावजूद हसन के पास कानूनी रास्ते समाप्त नहीं हुए हैं। वह संघीय अदालत में हेबियस कॉर्पस याचिका दाखिल कर सकता है। ऐसी याचिका के माध्यम से कैदी अपने निरुद्ध किए जाने या सजा की वैधता को अदालत में चुनौती देता है।
मई में प्रकाशित आर्मी लॉयर की एक रिपोर्ट ने संकेत दिया था कि इस तरह की कानूनी लड़ाई वर्षों तक चल सकती है। इसका मतलब है कि राष्ट्रपति की स्वीकृति अंतिम राजनीतिक और प्रशासनिक समर्थन तो देती है, मगर न्यायिक प्रक्रिया का अंत नहीं करती। बचाव पक्ष सजा, सुनवाई की निष्पक्षता, संवैधानिक अधिकारों या सैन्य न्याय प्रणाली से जुड़े विभिन्न आधारों पर अपील कर सकता है।
अमेरिकी सैन्य इतिहास में इसका एक प्रमुख उदाहरण रोनाल्ड ग्रे का मामला है। राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने 2008 में सेना के जवान ग्रे की मौत की सजा को मंजूरी दी थी, लेकिन बाद में एक न्यायाधीश के आदेश से उस पर रोक लग गई। ग्रे आज भी कंसास के फोर्ट लीवेनवर्थ में कैद है। यह उदाहरण दिखाता है कि राष्ट्रपति की अनुमति के बाद भी सैन्य मृत्युदंड का अमल निश्चित या त्वरित नहीं माना जा सकता।
मिलिट्री डेथ रो में चार कैदी
वर्तमान में अमेरिकी सेना की डेथ रो में हसन सहित चार कैदी हैं। सभी को कंसास के फोर्ट लीवेनवर्थ में रखा गया है। सैन्य अदालतों में मृत्युदंड सुनाया जाना ही असाधारण माना जाता है और वास्तव में उसे लागू किया जाना उससे भी अधिक विरल है।
अमेरिकी सैन्य व्यवस्था में अंतिम बार 1961 में मृत्युदंड दिया गया था। उस समय प्राइवेट जॉन बेनेट को 11 वर्ष की एक बच्ची से बलात्कार के मामले में फांसी दी गई थी। उसके बाद छह दशकों से अधिक समय में सेना की किसी मौत की सजा को अंजाम तक नहीं पहुंचाया गया।
इसी पृष्ठभूमि में हसन का मामला केवल एक पुराने हमले की न्यायिक परिणति नहीं है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या अमेरिकी सेना इतने लंबे अंतराल के बाद किसी मृत्युदंड को वास्तव में लागू कर पाएगी।
मृत्युदंड पर अमेरिका में फिर तेज हुई बहस
हसन की सजा पर मंजूरी ऐसे समय आई है जब अमेरिका में फांसी की सजा और उसकी प्रक्रियाओं पर बहस फिर तेज है। ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में संघीय स्तर पर मृत्युदंड पर बनी अनौपचारिक रोक समाप्त की थी। वर्ष 2020 से 2021 की शुरुआत तक संघीय सरकार ने 13 लोगों को मौत की सजा दी थी।
इन फांसियों के कारण ट्रंप उन अमेरिकी राष्ट्रपतियों में शामिल हुए जिन्होंने 130 वर्षों से अधिक समय के भीतर संघीय स्तर पर सबसे अधिक लोगों को मृत्युदंड दिया। समर्थक इसे गंभीर अपराधों के लिए कठोर जवाब मानते हैं, जबकि विरोधी कानूनी त्रुटि, मानवाधिकार और निष्पादन के तरीकों से जुड़े सवाल उठाते हैं।
टेनेसी की घटना के बाद आया निर्णय
हसन को फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सजा देने की मंजूरी टेनेसी में क्रिस्टा पाइक को जहरीले इंजेक्शन से मृत्युदंड देने की असफल कोशिश के कुछ दिनों बाद सामने आई। उस घटना के बाद टेनेसी के गवर्नर ने वर्ष में आगे प्रस्तावित सभी फांसियों को रोक दिया और मामले की स्वतंत्र जांच के निर्देश दिए।
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या टेनेसी की घटना के बाद मृत्युदंड की प्रक्रिया में बदलाव होना चाहिए, तो उन्होंने इसे “दिलचस्प स्थिति” बताया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जहरीले इंजेक्शन से मौत की सजा देना बहुत कठिन नहीं होना चाहिए।
फोर्ट हूड हमले के पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए यह मंजूरी लंबे समय से चले आ रहे मामले में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। फिर भी अंतिम परिणाम कानूनी चुनौतियों, सैन्य प्रशासन के अगले कदमों और अदालतों के निर्णयों पर निर्भर रहेगा।
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