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अमेरिका ने आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से हटाए सभी बमवर्षक: क्यों उठाया यह कदम; ट्रंप ने ईरान पर अब क्या कहा?

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Foto : David Taylor - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस से अमेरिकी बमवर्षक हटाए गए
  2. कथित साजिश के बाद बढ़ी सुरक्षा चिंता
  3. ईरान को लेकर ट्रंप के सामने क्या विकल्प हैं?
  4. पश्चिम एशिया में अमेरिकी बलों की मौजूदगी
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  6. Frequently Asked Questions

ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस से अमेरिकी बमवर्षक हटाए गए

Indianewslive247.com – अम र क न आरएएफ फ यरफ – इंग्लैंड स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से अमेरिका ने अपने सभी बमवर्षक विमान वापस अमेरिका भेज दिए हैं। अमेरिकी नियंत्रण वाले इस ठिकाने का इस्तेमाल ईरान के विरुद्ध हमलों में किया गया था। बमवर्षकों की वापसी ऐसे समय हुई है, जब एयरबेस को निशाना बनाने की कथित आतंकी साजिश की जांच चल रही है और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां लगातार चर्चा में हैं।

पेंटागन के एक अधिकारी ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि विमानों को उनके घरेलू अमेरिकी ठिकानों पर लौटा दिया गया है। संवेदनशील सैन्य अभियानों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का अधिकार न होने के कारण अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त रखी।

बी-52 और बी-1 विमानों की गतिविधि पर नजर

विमानन गतिविधियों की निगरानी करने वाले समूहों ने ईरान युद्ध के शुरुआती दिनों से फेयरफोर्ड से कई बी-52 और बी-1 बमवर्षकों की उड़ानें दर्ज की थीं। मिलिट्री एयर ट्रैकिंग अलायंस जैसे संगठनों की निगरानी में इस एयरबेस से दर्जनों बमवर्षक उड़ान भरते दिखाई दिए। रविवार को भी कई बी-1 विमान यहां से रवाना होते देखे गए।

आरएएफ फेयरफोर्ड लंदन से लगभग 100 मील, यानी करीब 160 किलोमीटर, पश्चिम में स्थित है। पश्चिम एशिया में लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों के दौरान अमेरिका ने इस ठिकाने को अपने बमवर्षक अभियानों के लिए इस्तेमाल किया है। इसलिए यहां तैनात विमानों में बदलाव को क्षेत्रीय सैन्य स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कथित साजिश के बाद बढ़ी सुरक्षा चिंता

सितंबर के आखिर में आरएएफ फेयरफोर्ड में हुई एक सुरक्षा घटना के बाद जांच शुरू की गई थी। इसके बाद पिछले सप्ताह मध्य लंदन से दोहरी ब्रिटिश-ईरानी नागरिकता वाले एक व्यक्ति को कथित आतंकी हमले की साजिश के संदेह में गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान कुल छह लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में सभी को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

ब्रिटिश अधिकारियों ने इस घटना के तार तेहरान से जुड़े होने की बात कही है, जबकि ईरान ने किसी भी भूमिका से इनकार किया है। जांच की स्थिति और बमवर्षकों की वापसी के बीच सीधे संबंध पर विस्तृत सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन दोनों घटनाक्रमों ने एयरबेस की सुरक्षा तथा वहां संचालित सैन्य अभियानों पर ध्यान बढ़ा दिया है।

ईरान को लेकर ट्रंप के सामने क्या विकल्प हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध के अगले चरणों पर विचार कर रहे हैं। उनके सामने नए हमलों समेत कई विकल्प हैं। अभियान की शुरुआत में ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकों से कहा था कि यह कार्रवाई कुछ सप्ताह तक चल सकती है।

शनिवार को व्हाइट हाउस से ओहायो में एक रैली के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने ईरान की स्थिति पर कड़ा रुख दोहराया।

ईरान को लेकर मेरे पास फैसले हैं, जो मैं करूंगा। ईरान तबाह हो चुका है। इसलिए एकमात्र सवाल यह है कि यह आसान तरीका होगा या मुश्किल तरीका।

यह बयान संकेत देता है कि वॉशिंगटन सैन्य दबाव और आगे की कार्रवाई, दोनों को खुला रखे हुए है। फेयरफोर्ड से विमानों की वापसी अपने आप में अभियान समाप्त होने की घोषणा नहीं है। बमवर्षकों का स्थानांतरण सुरक्षा जरूरतों, तैनाती की योजना या व्यापक सैन्य पुनर्संतुलन से भी जुड़ा हो सकता है।

पश्चिम एशिया में अमेरिकी बलों की मौजूदगी

पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति पहले से ही व्यापक है। गुरुवार को एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया था कि हाल में तैनात यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट विमानवाहक पोत भी क्षेत्र की दिशा में बढ़ रहा है। इसके साथ यूएसएस माल्किन आइलैंड उभयचर तैयार समूह की आवाजाही भी जारी है।

यह तैयार समूह कई नौसैनिक जहाजों का संयोजन होता है। इसमें 7,000 से अधिक नौसैनिक और 2,000 मरीन शामिल होते हैं। इस तरह की तैनाती समुद्री सुरक्षा, सैन्य तैयारियों और संभावित अभियान विकल्पों को मजबूत करती है।

अधिकारी ने कहा था कि अक्तूबर के अंत तक पश्चिम एशिया में तीन विमानवाहक पोत मौजूद हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक शक्ति का उल्लेखनीय विस्तार होगा। विमानवाहक पोत लड़ाकू विमानों के संचालन, समुद्री निगरानी और त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया की क्षमता प्रदान करते हैं।

आगे किन बातों पर नजर रहेगी

अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि फेयरफोर्ड से हटाए गए बमवर्षकों की जगह कोई नई तैनाती होती है या नहीं, कथित साजिश की ब्रिटिश जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है और ईरान को लेकर अमेरिकी प्रशासन कौन-सा रास्ता चुनता है। साथ ही, पश्चिम एशिया की ओर बढ़ रहे नौसैनिक समूहों की भूमिका आने वाले दिनों में अमेरिकी रणनीति का अहम संकेत दे सकती है।

फिलहाल, ब्रिटेन के इस महत्वपूर्ण एयरबेस से बमवर्षकों की वापसी ने सुरक्षा, सैन्य तैयारी और ईरान के साथ बढ़ते तनाव को एक ही घटनाक्रम में जोड़ दिया है।

Frequently Asked Questions

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