‘पटाखों पर पूरी तरह रोक नहीं लगा सकते’: दीपावली से पहले सुप्रीम कोर्ट लेगा फैसला, समय के साथ तय होंगे मानक
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दिवाली से पहले पटाखों के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
Indianewslive247.com – पट ख पर प र तरह र – पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय सुप्रीम कोर्ट दिवाली से पहले उनके इस्तेमाल के लिए संतुलित नियम तय करने पर विचार कर रहा है। अदालत ने संकेत दिया है कि धार्मिक आस्था, लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा के बीच व्यावहारिक संतुलन जरूरी है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पटाखों के उपयोग की अनुमति बिना किसी सीमा के नहीं दी जा सकती। अदालत समय-सीमा, पटाखों के प्रकार और तकनीकी मानकों के आधार पर निर्देश जारी करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
पूरे दिन पटाखे चलाने की अनुमति नहीं
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंद्रेश ने कहा कि पटाखे जलाने की इजाजत चौबीसों घंटे नहीं दी जा सकती। इस टिप्पणी से साफ है कि संभावित आदेश में पटाखे चलाने के लिए सीमित समय निर्धारित किया जा सकता है।
“चौबीसों घंटे पटाखे जलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”
अदालत के सामने मुद्दा केवल अनुमति या प्रतिबंध का नहीं है। यह भी देखा जा रहा है कि दिवाली के दौरान किस तरह के पटाखे, कितनी अवधि तक और किन शर्तों के साथ इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
केंद्र और सीपीसीबी करेंगे तकनीकी पहलुओं की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को कुछ तकनीकी पहलुओं पर काम करने के लिए समय दिया है। इनमें बेरियम की जांच, ध्वनि स्तर के लिए डेसिबल सीमा और संयुक्त फायर टेस्ट से जुड़े विषय शामिल हैं।
इन जांचों के आधार पर यह तय करने में मदद मिल सकती है कि किन पटाखों के उपयोग की अनुमति दी जा सकती है और किन उत्पादों पर अधिक सख्त शर्तें लागू होंगी। अदालत का उद्देश्य ऐसे मानक तैयार करना है, जिन्हें प्रशासन, विक्रेता और आम लोग स्पष्ट रूप से समझ सकें।
पूर्ण प्रतिबंध के बजाय नियंत्रित व्यवस्था
पटाखों पर पूरी तरह रोक को लेकर अदालत ने फिलहाल सकारात्मक रुख नहीं दिखाया है, लेकिन अनियंत्रित उपयोग को भी स्वीकार्य नहीं माना है। इसलिए फैसला संभवतः सीमित समय, निर्धारित ध्वनि स्तर और मानकों पर खरे उतरने वाले पटाखों के उपयोग पर केंद्रित हो सकता है।
दिवाली के दौरान वायु गुणवत्ता और ध्वनि प्रदूषण को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं। वहीं, त्योहार मनाने की परंपरा और धार्मिक भावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं। सुप्रीम कोर्ट इन्हीं अलग-अलग हितों को ध्यान में रखकर आगे का ढांचा तय कर सकता है।
मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित है। केंद्र और सीपीसीबी की ओर से तकनीकी जानकारी मिलने के बाद अदालत दिवाली से पहले पटाखों के इस्तेमाल संबंधी नियमों को अधिक स्पष्ट कर सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या दिवाली पर पटाखों पर पूरी तरह रोक लगेगी?
अदालत की टिप्पणी के अनुसार फिलहाल पूर्ण प्रतिबंध पर विचार नहीं दिखता। हालांकि, उपयोग के समय, प्रकार और ध्वनि स्तर को लेकर पाबंदियां लग सकती हैं।
पटाखे चलाने का समय कब तय होगा?
सुप्रीम कोर्ट दिवाली से पहले इस विषय पर फैसला ले सकता है। संभावित आदेश में पटाखे चलाने के लिए निर्धारित समय-सीमा शामिल हो सकती है।
सीपीसीबी की भूमिका क्या है?
सीपीसीबी बेरियम, डेसिबल स्तर और संयुक्त फायर टेस्ट जैसे तकनीकी पहलुओं की जांच में सहयोग करेगा। इन मानकों के आधार पर आगे के नियम तय किए जा सकते हैं।
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