City States

Sambhal Violence: सांसद बर्क ने आयोग की रिपोर्ट पर उठाए सवाल, कहा- जान हमारी गई, अपराधी भी हम ही साबित हो रहे

sapa-nata-jayaurarahamana-braka_66ab28297884e655a236a411911bc61b
Foto : David Miller - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. Sambhal Violence: सांसद बर्क ने आयोग की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
  2. Related Reading
  3. Frequently Asked Questions

Sambhal Violence: सांसद बर्क ने आयोग की रिपोर्ट पर उठाए सवाल

Indianewslive247.com – Sambhal Violence के बाद सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बर्क ने कहा कि जान हमारी गई, लेकिन अपराधी भी हम ही साबित हो रहे हैं। यह Sambhal Violence से जुड़ी सबसे बड़ी राजनीतिक बहस बन गई है।

आयोग की रिपोर्ट पर तीखे सवाल

सांसद बर्क ने संभल के दीपा सराय स्थित अपने निवास पर मीडिया से बातचीत में कहा कि न्यायिक जांच आयोग के गठन पर लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें न्याय मिलेगा, परंतु वह उम्मीद भी टूट गई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में बनाए गए ऐसे आयोग हमेशा इसी प्रकार की त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट तैयार करते हैं।

हम सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आयोग को न्यायिक जांच आयोग नहीं मानते हैं। यह सरकार के सेवानिवृत्त लोग थे, जिन्होंने सरकार के मन की रिपोर्ट तैयार की है।

बर्क ने आगे बताया कि तब पुलिस द्वारा गोली चलाई गई थी, जिसमें पांच निहत्थे भाइयों की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि सौ से अधिक निर्दोष लोगों को जेल भेजा गया, जिनके घरों में खाने कमाने वाला कोई सदस्य नहीं है। Sambhal Violence की इस घटना में आम लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है।

ड्रोन वीडियो और हथियारों का सवाल

सांसद ने पुलिस पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बवाल के दिन पूरा सिस्टम काम कर रहा था और ड्रोन से वीडियो भी बन रहे थे। इसके बावजूद पुलिस-प्रशासन द्वारा अब तक कोई ऐसी तस्वीर या वीडियो प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसमें आम लोगों के हाथों में हथियार दिख रहा हो या कोई गोली चला रहा हो।

आम लोगों के हाथ में कोई हथियार नहीं था। इसके बाद भी हमारे लोगों को ही अपराधी बना दिया गया। यह जुल्म की इंतेहा है।

1978 के दंगों और सीएम की जानकारी

संभल के विधायक इकबाल महमूद ने भी आयोग की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि न्यायिक जांच आयोग की अध्यक्षता मौजूदा जज द्वारा की जानी चाहिए थी, तभी पूरी घटना का सच सामने आता। विधायक ने स्पष्ट किया कि संभल से न हिंदुओं का पलायन हुआ और न किसी मंदिर पर कब्जा किया गया था। दो-तीन विवाद जरूर हुए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि सीएम को गलत जानकारी दी गई है। सीएम 1978 के दंगों में बड़ी संख्या में लोगों की हत्या की बात करते हैं, जबकि सदन में उन्होंने ही बताया था कि तब केवल नौ लोगों की जान गई थी। यदि ज्यादा लोगों की मौत हुई है तो सरकार को उसे साबित करना चाहिए।

जनप्रतिनिधियों का काम लोगों को राह दिखाना होता है, किसी को उकसाना नहीं होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. Sambhal Violence में कितने लोगों की मौत हुई? सांसद बर्क के अनुसार, पांच निहत्थे भाइयों की मौत हो गई थी।

2. आयोग की रिपोर्ट पर क्या मुख्य आरोप हैं? आयोग को सेवानिवृत्त कर्मचारियों का बताया जा रहा है और रिपोर्ट को सरकार के अनुकूल माना जा रहा है।

3. क्या आम लोगों के हाथ में हथियार थे? सांसद बर्क का कहना है कि आम लोगों के हाथ में कोई हथियार नहीं था।

4. 1978 के दंगों में कितनी मौतें हुई थीं? विधायक इकबाल महमूद के अनुसार, 1978 में केवल नौ लोगों की जान गई थी।

Frequently Asked Questions

What is Sambhal Violence?

Sambhal Violence is the main topic of this guide. The article explains the context, practical details, and next steps readers should understand.

Why does Sambhal Violence matter?

Sambhal Violence matters because readers are looking for a useful answer, not just a short summary. Good content should match search intent and help them decide what to do next.

Leave a Comment