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Prashant Kishor: बांकीपुर उप चुनाव में प्रशांत किशोर की दावेदारी के चार कारण BJP को डराएंगे; क्या है पूरा खेल?

प्रशांत किशोर: बांकीपुर उप चुनाव में दावेदारी के चार कारण; BJP के लिए डराएंगे

Prashant Kishor – प्रशांत किशोर बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अपने निर्णय को अंततः स्वीकार करते हुए बांकीपुर उप चुनाव में उतरने का एलान किया। दो महीने पहले तक उनकी पार्टी जन सुराज के खंडन करते हुए कहा गया था कि वे इस सीट में नहीं उतरेंगे, लेकिन अब लगभग 15 दिनों से उनके चुनावी तैयारी का दबदबा बढ़ रहा है। प्रशांत किशोर की दावेदारी न केवल उप चुनाव के बारे में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक अभियान के नए दिशा निर्देशन के बारे में भी बताती है।

1. शहरी युवाओं के सहयोग के अवसर

जन सुराज के प्रत्याशियों को विधानसभा चुनाव में शहरी क्षेत्रों में वोटरों का सहयोग मिला। पार्टी के 238 प्रत्याशियों में से 236 की जमानत जब्त हो गई, लेकिन उसे राज्य में 16.77 लाख कुल वोट मिले थे। प्रशांत किशोर के लिए यह संभावना एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहां वे आगे बढ़कर शहरी मतदार समूह के बीच अपनी पहचान के आधार पर आकर्षक हो सकते हैं।

“जदयू से इतने विधायक बन गए तो वह राजनीति छोड़ देंगे।”

2. पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच संभावना

बिहार विधानसभा चुनाव के आठ महीने पूरे हो चुके हैं और नौवां चल रहा है। चुनाव में एनडीए ने 25 से 30 सीटें मिलने पर नीतीश कुमार के खिलाफ नारे लगाए गए, लेकिन अप्रैल में नीतीश ने कुर्सी छोड़ दी और भाजपा ने पहली बार अपना मुख्यमंत्री बना लिया। प्रशांत किशोर के लिए इस राजनीतिक व्यवस्था में गलतियों के सुधार के अवसर उपलब्ध हैं।

3. राजनीतिक परिवर्तन और अवसर के उपयोग के दबाव

बांकीपुर के विधायक नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई सीट पर भाजपा ने मैदान में खुद को लगाया है। प्रशांत किशोर की दावेदारी इस संभावना को अपने लिए उपयोग करेगी, जो उनके बिहार में प्रभावशाली राजनीतिक फ़ॉर्म के बारे में बताती है।

4. विश्वास और स्थानीय समर्थन के बढ़ोतरी का अवसर

प्रशांत किशोर के बांकीपुर उप चुनाव में उतरने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण विश्वास और स्थानीय समर्थन के बढ़ोतरी का अवसर है। इस सीट

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