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मानसून का रौद्र रूप: जम्मू-कश्मीर में फिर बादल फटे, बारिश से बदरीनाथ हाईवे बंद; उत्तर भारत में गर्मी से राहत

मानसून की तीव्रता: जम्मू-कश्मीर में फिर बाढ़, बदरीनाथ हाईवे के बंद होने और उत्तर भारत में गर्मी से राहत

म नस न क र द र – दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश के कई हिस्सों में लंबे समय तक चले भीषण गर्मी की राहत लेकर आया है। हालांकि, इसके साथ ही अपनी तीव्र बूंदाबुंदी के कारण जम्मू-कश्मीर में दूसरे दिन फिर बाढ़ का मंजर छोड़ दिया है। इस बारिश के चलते बदरीनाथ हाईवे पर पगलानाला और गुलाबकोटी के क्षेत्र में सड़क बह गई और आठ हजार से अधिक श्रद्धालु अवरोध के कारण फंसे रहे।

उत्तर भारत में मौसम के प्रभाव

मानसून की बौछार ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों में भारी राहत ले आई है। इस दौरान अधिकतम तापमान गिर गया और रुक-रुक कर बौछार ने लोगों को गर्मी और धूल से छुटकारा मिलने का अवसर दिया।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, हरियाणा और पंजाब में अधिकतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। सबसे अधिक पारा 35.2 डिग्री सेल्सियस रोपड़ में रिकॉर्ड हुआ और न्यूनतम तापमान आम से 3.4 डिग्री नीचे पहुंच गया।

मानसून की लाइन तेजी से आगे बढ़ी है, जिसके कारण दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के बचे हुए हिस्से अब उम्मीदवार बन गए हैं। आईएमडी ने तीन दिन तक गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान जताया है, जिसमें 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कुछ इलाकों में तूफान की आशंका भी बनी रही।

मौसम से जुड़े आपदाएं और अलर्ट

मुंबई सहित कोंकण क्षेत्र में बीते 24 घंटों में 21 सेमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इससे जलभराव की समस्या भी उभरी है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और ओडिशा में भी 12-20 सेमी वर्षा के कारण रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं।

मौसम विभाग ने गुजरात, कोंकण-गोवा, तटीय कर्नाटक और मध्य महाराष्ट्र के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में 204.5 मिमी से अधिक बारिश की संभावना बताई गई।

असम में अभी भी 25,000 लोग प्रभावित हैं, जिनमें से धेमाजी में 21,000 से अधिक लोग शामिल हैं। बाढ़ की स्थिति में सुधार होने के बावजूद प्राधिकरण ने चार राहत केंद्र स्थापित किए हैं और आवश्यक सामग्री का वितरण जारी रहा है।

हिमाचल प्रदेश में चंबा जिले में अचानक बाढ़ के आगे एक मंदिर के पारे क्षेत्र में विपर्यय आ गई। इससे करीब 52 गांव जलमग्न हैं और 393.44 एकड़ फसलें डूबी हुई हैं।

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