पीएम-सीएम को पद से हटाने के बिल की समिति में मुहर जल्द लग सकती है
कब आएग प एम स एम क – संसदीय समिति अगले सत्र में 17 जुलाई को एक विधेयक पर अपनी रिपोर्ट अंगीकृत कर सकती है, जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार कर उनके पद से हटाने का प्रावधान है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट को संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में पेश किया जाएगा। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है।
नया प्रावधान और अपने आप छोड़ने की शर्त
इन विधेयकों में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन शामिल है। यदि कोई प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री आपराधिक मामले में गिरफ्तार हो जाते हैं और उनकी हिरासत 30 दिन से ज्यादा बरकरार रहती है, तो उन्हें अपने पद के बरकरार रहने की अनुमति नहीं मिलेगी। यह नियम ऐसे अपराधों पर लागू होगा जिनमें कम से कम पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान हो। इन अपराधों में गिरफ्तारी के 31वें दिन व्यक्ति की कुर्सी अपने आप खाली हो जाएगी।
अपराजिता सारंगी ने कहा था, “राजनीति को अपराध मुक्त करने की जरूरत पर समिति में सभी की राय एक जैसी थी।”
इस संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी कर रही हैं। समिति ने इस रिपोर्ट तैयार करने से पहले कानूनी विशेषज्ञों, रिटायर्ड जजों, वकीलों, सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं से लंबे समय तक चर्चा की है। इस बिल के संबंध में विपक्ष ने विवाद उठाए हैं, जिसके कारण कई दलों ने समिति से दूरी बना ली है।
विपक्ष के सवाल और आरोप
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इन विधेयकों का उद्देश्य उन राज्यों की सरकारों को अस्थिर करना है जहां एनडीए की सत्ता नहीं है। एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “संविधान में यह बदलाव सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा रहा है।” कांग्रेस के मनीष तिवारी ने इसे आपराधिक न्याय प्रणाली के खिलाफ बताया और कहा कि इससे राजनीतिक दुरुपयोग के दरवाजे खुल जाएंगे और संवैधानिक सुरक्षा खत्म हो जाएगी।
आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने इस बिल के त्याग पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इसे जल्दबाजी में पेश करने के बाद अब संसद में अंतिम विचार शुरू हो सकता है। पिछले साल अगस्त में इस विधेयक को लोकसभा में पेश करने के लिए केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने एक नोटिस जारी किया था।
केंद्र शासित प्रदेशों में नियमों का बदलाव
सरकार ने केंद्र शासित प्रदेशों के नियमों में भी बदलाव किया है। वर्तमान नियमों में गिरफ्तार मुख्यमंत्री या मंत्रियों को हटाने का कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। इसलिए सरकार 1963 के अधिनियम की धारा 45 में बदलाव करना चाहती है। इससे केंद्र शासित प्रदेशों में अपराधिक मामलों में कानूनी ढांचा तैयार किया जा सकेगा।
इस समिति में केवल तीन विपक्षी सांसद शामिल हैं: सुप्रिया सुले, असदुद्दीन ओवैसी और एस निरंजन रेड्डी। भाजपा और उसके सहयोगियों का बहुमत है।
