UNSC: ‘स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाने वालों की तय हो जवाबदेही’, सुरक्षा परिषद में भारत ने दी सलाह
UNSC के सामने शिक्षा के अधिकार की रक्षा की मांग
UNSC - भारत ने विश्व सुरक्षा परिषद (UNSC) में शिक्षा के अधिकार के लिए स्कूलों और बच्चों के निशाना बनाने वालों की जवाबदेही के लिए मांग रखी। राजदूत हरीश पार्वथनेनी ने बच्चों की शिक्षा के महत्व को बल देते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद के रूप में इस मुद्दे पर बर्बादी की जांच की जरूरत है। इस बारे में उनकी बातचीत में जोर दिया गया कि युद्ध के दौरान बच्चों के शिक्षा के अधिकार के निरंतर रखने के बिना शांति की खोज अधूरी रहती है।
युद्ध में बच्चों पर हमले के बढ़ते खतरे
भारत के विचारों में उल्लेख किया गया कि विश्व सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में दिखाई गई चिंताजनक आंकड़ों से पता चलता है कि युद्ध के क्षेत्रों में बच्चों पर हमले एक साल में 44 प्रतिशत तक बढ़ गए। इसके बारे में राजदूत पार्वथनेनी ने कहा कि इस तरह के अपराध न केवल बच्चों के भविष्य को खतरे में डालते हैं, बल्कि देशों की सामाजिक और आर्थिक विकास की रोकथाम करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में बच्चों के खिलाफ 38,558 गंभीर अपराध दर्ज हुए, जिसमें 24,174 बच्चे प्रभावित हुए। इनमें से 15,493 लड़के और 7,990 लड़कियां शामिल रहीं। लगभग 691 बच्चों की पहचान अभी तक अस्पष्ट रही है।
राजदूत पार्वथनेनी ने कहा, "बच्चों की शिक्षा बचाना किसी देश के भविष्य की रक्षा करता है। इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी सरकारों की है। विश्व सुरक्षा परिषद के प्रति जवाबदेही के मामले में एक संतुलित अंतरराष्ट्रीय नीति आवश्यक है।"
भारत ने विश्व सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे को गंभीर रूप से उठाते हुए कहा कि गुटों और सरकारी सेनाओं द्वारा शिक्षा के अधिकार के लिए आक्रमणों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय नियम के पालन की आवश्यकता है। एक बार फिर से इस बारे में यह जोर देना कि बच्चों पर हमले शांति के बन्दर विनाश के रूप में कार्य करते हैं, इस बात पर जोर देते हुए, भारत ने विश्व सुरक्षा परिषद के लिए कहा कि इन घटनाओं की जांच आवश्यक है।
भारत के निवेश और शिक्षा सुविधाओं के विस्तार
भारत के अनुभव कहता है कि डिजिटल पढ़ाई युद्ध के दौरान बच्चों के लिए पुल का काम कर सकती है। देश में 14 साल तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, भारत ने डिजिटल प्लेटफॉर्म 'दीक्षा' (DIKSHA) लॉन्च किया है, जो छात्रों को अपने शिक्षा के अधिकार को निरंतर रखने में मदद करता है।
भारत के द्वारा विश्व सुरक्षा परिषद में दिए गए अनुरोध में यह बल दिया गया कि आंतरिक और विदेशी गुटों के खिलाफ एक संयुक्त राष्ट्र के तहत एक तय रूप से जवाबदेही के प्रणाली की आवश्यकता है। राजदूत पार्वथनेनी ने कहा कि भारत अपनी आंतरिक व्यवस्था के साथ भी दुनिया भर में शिक्षा के अधिकार के लिए प्रेरक बने रहेगा।
विश्व सुरक्षा परिषद में भारत के प्रतिनिधि ने कहा कि शिक्षा के अधिकार को बचाने के लिए एक बेहतर विकल्प डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। निवेश के दौरान, भारत अपने पड़ोसी देशों में शरणार्थियों के लिए शिक्षा के �