NATO Summit: नाटो नेताओं को तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोआन ने दिया अनोखा उपहार, विदाई में दी दुर्लभ रिवॉल्वर
NATO Summit में एर्दोआन के अद्वितीय उपहार
NATO Summit के समापन पर तुर्की के राष्ट्रपति रेसप तैयप एर्दोआन ने नाटो नेताओं के लिए एक अद्वितीय उपहार दिया। यह विदाई उपहार अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विभाग में जबरदस्त चर्चा का कारण बन गया, जिसमें रिवॉल्वर के साथ देशों के रक्षा संबंध भी शामिल थे।
उपहार की खासियत
उपहार के रूप में एर्दोआन ने एक विशेष रिवॉल्वर दिया, जिसका मॉडल 'गुमुसाय .357 मैग्नम' है। इसे तुर्की की सरकारी हथियार निर्माण कंपनी एमकेई द्वारा बनाया गया था, जो 1990 के दशक में केवल छोटी संख्या में इस तरह के हथियारों का उत्पादन करती थी। रिवॉल्वर के बोर्ड पर हर नेता का नाम लिखा गया था, जिसके साथ तुर्की और नाटो के प्रतीक चिन्ह भी समाहित थे।
इस उपहार के आगंतुक आकर्षण ने नाटो नेताओं के बीच विशेष रूप से तुर्की के साथ रक्षा संबंध के उजाला दिखाया। यह गोली बर्बाद करने की क्षमता के साथ एक अद्वितीय गिफ्ट है, जिसका उद्देश्य रक्षा उद्योग के विकास के अपने राष्ट्रीय संदेश को स्पष्ट करना था।
उपहार के असर और प्रतिक्रियाएं
लिथुआनिया के राष्ट्रपति के कार्यालय ने इस उपहार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर दीं, जिसके बाद इस कूटनीतिक भेंट की विस्तारपूर्वक चर्चा हो रही है। विभिन्न देशों ने हथियार नियमों के अनुसार इसे तुरंत भंग कर दिया, लेकिन इसकी रचना में राष्ट्रीय चिह्नों के संग्रह के रूप में देशों के बीच उत्साह बना रखा।
“इस विशेष रिवॉल्वर के निर्माण में तुर्की की हथियार उद्योग की वृद्धि का भी दर्शन होता है।”
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डे वेवर ने रिवॉल्वर हवाई अड्डे की पुलिस को सौंप दिया, जबकि पोलैंड के राष्ट्रपति के निर्मित उपहार की शुल्क प्रक्रिया पूरी होने तक वारसॉ हवाई अड्डे पर रखा गया। नीदरलैंड और स्वीडन ने इसे अपने दूतावास में सुरक्षित रखा है, जबकि नीदरलैंड इसे आगे आगे स्थायी रूप से असहाय बनाएगा।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन और ग्रीस के प्रधानमंत्री ने अपनी रिवॉल्वर संग्रहालय में इसका स्थान निर्धारित कर लिया। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किर स्टार्मर को रिवॉल्वर के साथ सफाई किट और 500 गोलियां भी दी गईं, जो NATO Summit के दौरान तुर्की के रक्षा उद्योग की प्रतिष्ठा को दर्शाने के लिए एक असामान्य तरीका था।
अंतर्विद्यालयी विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि यह उपहार केवल एक कूटनीतिक परंपरा नहीं, बल्कि तुर्की के बढ़ते रक्षा उद्योग और हथियार निर्यात क्षमता का एक दर्श