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एच-1बी वीजा पर सख्ती: वेंस बोले- अमेरिकियों की नौकरियां नहीं छिनेंगी; काम के लिए देने होंगे एक करोड़ रुपये

Published सितम्बर 16, 2026 · Updated सितम्बर 16, 2026 · By Michael Martin - indianewslive247.com

Foto : Michael Martin - indianewslive247.com

एच-1बी वीजा पर सख्ती की तैयारी, अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा पर जोर

Indianewslive247.com – एच 1ब व ज पर सख्ती को लेकर अमेरिका में चर्चा तेज है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि एच-1बी वीजा कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, यह व्यवस्था केवल ऐसी विशेष प्रतिभा को आकर्षित करने के लिए होनी चाहिए, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र को वास्तविक लाभ मिले।

वेंस ने ‘ऑल-इन पॉडकास्ट’ में कहा कि प्रशासन एच-1बी व्यवस्था में बदलाव के लिए प्रशासनिक विकल्पों पर विचार कर रहा है। उनका मानना है कि कांग्रेस से इस विषय पर कानून पारित कराना मुश्किल हो सकता है, इसलिए उपलब्ध कानूनी दायरे में नीति को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।

“सवाल यह है कि प्रशासनिक स्तर पर क्या किया जा सकता है, ताकि किसी टेक कंपनी द्वारा मांगा गया एच-1बी वीजा वास्तव में असाधारण प्रतिभा वाले व्यक्ति के लिए हो।”

विशेषज्ञ प्रतिभा तक सीमित रखने की मंशा

वेंस के मुताबिक, एच-1बी वीजा का उद्देश्य उन पेशेवरों को अमेरिका लाना होना चाहिए जिनके पास विशेष ज्ञान और कौशल हो। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को लागत घटाने के साधन में नहीं बदला जाना चाहिए, जहां कंपनियां घरेलू कर्मचारियों की जगह अपेक्षाकृत कम वेतन पर विदेशी कर्मचारी नियुक्त करें।

उन्होंने अकाउंटेंट का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई अमेरिकी कर्मचारी 60,000 डॉलर सालाना कमाता है, तो उसकी जगह 45,000 डॉलर पर विदेशी अकाउंटेंट को रखना वीजा कार्यक्रम की भावना के अनुरूप नहीं होगा। इस संदर्भ में एच 1ब व ज पर सख्ती का मुख्य उद्देश्य भर्ती में वास्तविक कौशल आवश्यकता की जांच बढ़ाना है।

“इसका मकसद ऐसे लोगों को लाना है, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और टेक इकोसिस्टम को बेहतर बना सकें।”

एक लाख डॉलर शुल्क और छंटनी पर निगरानी

वेंस ने एच-1बी वीजा से जुड़े 100,000 डॉलर के शुल्क या जुर्माने की योजना का भी उल्लेख किया। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब एक करोड़ रुपये के बराबर है। प्रस्ताव का उद्देश्य कंपनियों को वीजा आवेदन से पहले अपनी जरूरत और नियुक्ति के औचित्य को अधिक स्पष्ट रूप से साबित करने के लिए प्रेरित करना हो सकता है।

उन्होंने उन कंपनियों पर भी सवाल उठाया जो योग्य कर्मचारियों की कमी का दावा करती हैं, लेकिन साथ ही बड़े पैमाने पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करती हैं। वेंस के अनुसार, ऐसी कंपनियों को घरेलू कामगार हटाने के बाद विदेशी भर्ती बढ़ाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

“कई बार कंपनी कहती है कि उसे कामगार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन उसके इतिहास में दिखता है कि उसने 5,000 लोगों को नौकरी से निकाल दिया। यह बेहद अजीब स्थिति है।”

नीति बदलाव का पेशेवरों और कंपनियों पर असर

एच-1बी अमेरिका का प्रमुख रोजगार-आधारित वीजा कार्यक्रम है, जिसका उपयोग तकनीक, इंजीनियरिंग, लेखांकन और अन्य विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में किया जाता है। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो कंपनियों को यह दिखाना पड़ सकता है कि उन्हें वास्तव में विशेष कौशल वाले पेशेवर की जरूरत है और नियुक्ति का उद्देश्य केवल वेतन लागत कम करना नहीं है।

वेंस ने स्वीकार किया कि प्रशासन के कदमों को कानूनी चुनौतियां मिली हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार कानून के दायरे में रहकर नीति लागू करने का प्रयास कर रही है। एच 1ब व ज पर सख्ती का असर नियोक्ताओं, वीजा आवेदकों, मौजूदा विदेशी कर्मचारियों और अमेरिकी नौकरी बाजार—सभी पर पड़ सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या एच-1बी वीजा कार्यक्रम बंद किया जा रहा है?

वेंस के बयान से कार्यक्रम बंद करने का संकेत नहीं मिलता। प्रशासन इसे विशेष प्रतिभा और वास्तविक जरूरत वाली नौकरियों तक केंद्रित करना चाहता है।

100,000 डॉलर का शुल्क कितना है?

यह राशि भारतीय मुद्रा में लगभग एक करोड़ रुपये के आसपास बताई गई है। इसका अंतिम प्रभाव नियमों और उनके लागू होने के तरीके पर निर्भर करेगा।

भारतीय पेशेवरों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

आवेदकों को अपने नियोक्ता, नौकरी की विशेषज्ञता, वेतन और वीजा प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक निर्देशों पर नजर रखनी चाहिए। किसी भी बदलाव की स्थिति में कंपनी के आव्रजन विशेषज्ञ या अधिकृत कानूनी सलाहकार से जानकारी लेना उपयोगी हो सकता है।

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