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यूक्रेनी हमलों में बर्बाद हुईं रिफाइनरी: रूस को फिर याद आया दोस्त, भारत से मांगा पेट्रोल; रिपोर्ट में दावा

Published जुलाई 16, 2026 · Updated जुलाई 16, 2026 · By Elizabeth Smith

य क र न हमल म रिफाइनरी क्षमता खत्म हो रही है; रूस भारत से पेट्रोल मांग रहा है

रूस की रिफाइनरी बर्बाद हो रही हैं, भारत से मांग बढ़ रही है

य क र न हमल म बर - यूक्रेन के हमलों के कारण रूस की रिफाइनरी क्षमता के एक बड़े हिस्से को प्रभावित किया गया है। इस बदलाव के कारण रूस की प्रमुख ऊर्जा कंपनियां भारत से अधिक पेट्रोल आपूर्ति के लिए अनुरोध कर रही हैं। रॉयटर्स के रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को दो सूत्रों ने यह जानकारी साझा की।

भारत की रिफाइनरी क्षमता रूस के लिए विकल्प बन रही है

भारत रूस के कच्चे तेल के मुख्य खरीदार है। इस परिस्थिति में रूस के द्वारा भारत से पेट्रोल खरीदने की योजना दोनों देशों के ऊर्जा व्यापार में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखी जा रही है। यह खबर रूस की रिफाइनरी क्षेत्र में लगातार असर दिखाती है।

सूत्रों के अनुसार, रोसनेफ्ट, गजप्रोम नेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी तेल कंपनियां भारत के निजी और सरकारी रिफाइनरी कंपनियों से संपर्क कर रही हैं। आपूर्ति जहाज से जहाज में माल बरकरार रखने की विधि के माध्यम से हो सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक अहम विकल्प बन गई है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) जैसी भारतीय रिफाइनरी कंपनियां रॉयटर्स के ईमेल के जवाब में अपनी पहचान छुपाई है।

इस खबर के अनुसार, रूस के कच्चे तेल के खरीदार भारत की रिफाइनरी नायरा एनर्जी के बारे में जानकारी ले रहे हैं। यह भारत की रिफाइनरी क्षमता रूस के लिए एक अहम स्रोत बन गई है, जहां रोसनेफ्ट की आंशिक हिस्सेदारी है।

अमेरिका ने रूस पर अपने तेल खरीद पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। रॉयटर्स ने खबर दी कि अमेरिकी सीनेट में दोनों प्रमुख दलों के सांसदों ने एक नए विधेयक को पेश किया है, जिसमें रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों पर शुल्क लगाने की व्यवस्था की गई है। इसमें भारत के नाम भी लिए गए हैं।

हालांकि, राष्ट्रपति को विशेष परिस्थितियों में छूट देने का अधिकार रहेगा। रूस के रिफाइनरी क्षेत्र में यह असर जारी रहेगा, जिसके कारण डीजल की आपूर्ति मांग बढ़ सकती है। विधेयक में रूस के ऊर्जा, वित्तीय और रक्षा क्षेत्रों पर कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की गई है।