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यूएन: ‘समुद्री व्यापार को भू-राजनीतिक तनाव के लिए निशाना न बनाएं’, भारतीय राजदूत की होर्मुज संकट पर दो टूक

Published सितम्बर 19, 2026 · Updated सितम्बर 19, 2026 · By Elizabeth Smith - indianewslive247.com

Foto : Elizabeth Smith - indianewslive247.com

होर्मुज संकट पर य एन में भारत की समुद्री व्यापार चेतावनी

Indianewslive247.com – य एन में भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट पर साफ कहा कि समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता को भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारतीय जहाजों और नागरिकों को हुए नुकसान के बीच भारत ने सुरक्षित, खुले और नियम-आधारित समुद्री मार्गों की जरूरत पर जोर दिया।

य एन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि नौवहन के अधिकार दबाव, धमकियों, गैरकानूनी प्रतिबंधों या मनमाने हस्तक्षेप से प्रभावित नहीं होने चाहिए। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत का पक्ष

पी. हरीश ने बहरीन की ओर से बुलाई गई सुरक्षा परिषद की अनौपचारिक ‘आरिया-फॉर्मूला’ बैठक में भारत का पक्ष रखा। यह बैठक समुद्री सुरक्षा की स्थिति पर केंद्रित थी। आरिया-फॉर्मूला बैठकों की शुरुआत 1992 में वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो आरिया ने की थी।

“नौवहन के अधिकारों को दबाव, धमकियों, गैरकानूनी प्रतिबंधों या मनमाने हस्तक्षेप से प्रभावित नहीं होना चाहिए।”

भारत ने कहा कि समुद्री मार्गों में बाधा का असर सिर्फ संबंधित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। खाड़ी और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के जरिए अनेक देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।

तेल-गैस आपूर्ति और भारतीय हितों पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट से भारत की तेल और गैस आपूर्ति पर दबाव पड़ा है। इस महत्वपूर्ण मार्ग में व्यवधान के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आई। बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश के रूप में भारत के लिए समुद्री आपूर्ति श्रृंखला में बाधा का असर परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की कीमतों तक पहुंच सकता है।

भारत ने किसी एक पक्ष का नाम लिए बिना कहा कि समुद्री टकराव वैश्विक स्थिरता के लिए जोखिम बढ़ाता है। होर्मुज क्षेत्र में ईरान, अमेरिका और खाड़ी के अन्य देशों से जुड़ी घटनाओं के दौरान भारतीय हितों को नुकसान पहुंचा है।

नाविकों की मौत और जहाजों पर हमलों का मुद्दा

भारत ने अपने नाविकों की मौत और भारतीय हितों से जुड़े जहाजों पर हुई घटनाओं को लेकर ईरान तथा अमेरिका के सामने विरोध दर्ज कराया है। तेहरान के समक्ष भारत में पंजीकृत एक जहाज पर हमले की शिकायत भी की गई।

अप्रैल में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की गनबोट्स ने भारतीय ध्वज वाले दो टैंकरों की दिशा में चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाई थीं। जुलाई में संयुक्त अरब अमीरात में पंजीकृत दो जहाजों पर ईरानी हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हुई और दूसरा घायल हुआ। इन मामलों पर भारत ने नई दिल्ली में ईरानी राजनयिकों के समक्ष आपत्ति जताई।

जून में भारत ने अमेरिकी दूतावास के चार्ज डी’अफेयर्स को भी तलब किया था। यह कदम पलाऊ में पंजीकृत उस जहाज पर अमेरिकी हमले के बाद उठाया गया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हुई थी।

नौसेना के अभियान और फंसे नाविकों की चिंता

य एन में भारत ने अशांत समुद्री क्षेत्रों में वाणिज्यिक नौवहन की सुरक्षा के लिए अपने नौसैनिक अभियानों का उल्लेख किया। पी. हरीश के अनुसार, सोमवार तक भारतीय सुरक्षा अभियानों ने अदन की खाड़ी और लाल सागर से 449 से अधिक व्यावसायिक जहाजों के सुरक्षित पारगमन में मदद की थी। इन जहाजों पर करीब 20.3 मिलियन टन माल अथवा 8.4 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का तेल था।

भारतीय नौसेना ने मार्च में पश्चिमी अरब सागर में 11 जहाजों के साथ ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ शुरू किया था। भारत ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी के कारण फंसे सैकड़ों भारतीय नाविकों की सुरक्षा, निकासी, चिकित्सा सहायता, क्रू बदलाव और स्वदेश वापसी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।

“समुद्री यात्रियों को हमारी सामूहिक कोशिशों के केंद्र में रहना चाहिए।”

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? यह तेल और गैस आपूर्ति के प्रमुख समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां व्यवधान आने पर ऊर्जा आयात, माल ढुलाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है।

भारत ने य एन में क्या मांग रखी? भारत ने समुद्री व्यापार को राजनीतिक संघर्ष का माध्यम न बनाने, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग रखी।

फंसे भारतीय नाविकों के लिए भारत ने क्या कहा? भारत ने सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता, चालक दल में बदलाव और स्वदेश वापसी के लिए प्रभावी आकस्मिक योजना तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता बताई।

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