‘RSS को पंजीकरण की जरूरत नहीं’: बीएल संतोष ने प्रियांक खरगे को दिया जवाब, अखंड भारत पर भी कही बड़ी बात
आरएसएस पंजीकरण विवाद: बीएल संतोष ने प्रियांक खरगे को दिया जवाब
Indianewslive247.com – आरएसएस को पंजीकरण की जरूरत नहीं है। कर्नाटक में संगठन के पंजीकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने हाल ही में आरएसएस को पंजीकृत करने की मांग उठाई थी। इस पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने स्पष्ट स्थिति रखी है। संतोष ने कहा कि आरएसएस को अपनी पहचान बरकरार रखने के लिए किसी पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। यह संगठन लाखों अनुयायियों के विश्वास पर ही चलता है।
शनिवार को बंगलूरू में आयोजित हिंदू जागरण वेदिके के 'अखंड भारत संकल्प दिवस' कार्यक्रम में संतोष ने विस्तार से बात की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरएसएस बिना पंजीकरण के ही सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है। विभाजन के समय भी संगठन पंजीकृत नहीं था और आज भी उसका कोई औपचारिक पंजीकरण नहीं है। इसके बावजूद संगठन अपनी गतिविधियों को निरंतर जारी रखे हुए है।
स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारियों का योगदान
बीएल संतोष ने यह भी दावा किया कि भारत को आजादी केवल चरखा चलाने या नमक सत्याग्रह से नहीं मिली। इसके पीछे हजारों क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन न्यौछावर किया। उन्होंने कहा कि लाखों देशभक्त युवाओं और सैनिकों ने अपनी जान दांव पर लगाई थी।
आजादी हमें किसी ने तोहफे में नहीं दी थी। अंग्रेजों ने बस यूं ही हमें आजादी नहीं दी।
मदन लाल ढींगरा, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों को याद करते हुए संतोष ने कहा कि 80वें स्वतंत्रता वर्ष में उनके बलिदान को याद करना जरूरी है।
हिंदू आबादी और अखंड भारत का सपना
संतोष ने यह भी दावा किया कि किसी क्षेत्र में हिंदू आबादी घटने से भारत से जुड़ाव की भावना कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि जहां हिंदू आबादी घटती है, वहां 'राष्ट्रविरोधी भावना' पैदा होने लगती है। बंगलूरू की शिवाजीनगर और चामराजपेट सीटों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दो दशक से किसी भी राजनीतिक दल का हिंदू उम्मीदवार वहां नहीं जीता है।
संतोष ने पाकिस्तान की मांग को जनसंख्या में बदलाव से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम लीग की राजनीतिक लामबंदी आखिरकार देश के विभाजन तक पहुंची। 'अखंड भारत' के लिए काम करने का संकल्प लेने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि अविभाजित भारत का विचार कोई प्रशासनिक सपना नहीं है। यह सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी सपना है।
हिंदुओं को बहुमत में इसलिए रहना चाहिए क्योंकि भारत को भारत ही रहना है।
संतोष ने पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण और वियतनाम के एक होने का उदाहरण दिया। उन्होंने इसे असंभव विचार मानने से इनकार किया।
प्रियांक खरगे का पलटवार
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएल संतोष के उस दावे को पूरी तरह से नकार दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हैदराबाद रियासत के भारत में विलय के दौरान रजाकारों से खरगे परिवार की रक्षा आरएसएस कार्यकर्ताओं ने की थी।
प्रियांक खरगे ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके परिवार और उस क्षेत्र की जनता की रक्षा संघ ने नहीं, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और भारतीय सेना ने की थी। यह विवाद बीएल संतोष के 'अखंड भारत संकल्प दिवस' कार्यक्रम में दिए बयान के बाद शुरू हुआ।
इसके अलावा, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने सरकारी संपत्ति से जुड़े नए विधेयक पर भाजपा के विरोध का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि इस बिल में किसी भी संगठन या पार्टी का नाम नहीं है। यह कानून सिर्फ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए लाया जा रहा है। सरकार का मकसद सार्वजनिक जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों को सही तरीके से नियंत्रित करना है।
सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल नियम के तहत ही होना चाहिए। किसी भी निजी कार्यक्रम के लिए अनुमति लेना जरूरी है, ताकि आम जनता को कोई परेशानी न हो।
प्रियंक खरगे ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष बिना वजह इस बिल से डर रहा है और राजनीति कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरएसएस को पंजीकरण की जरूरत क्यों नहीं है? बीएल संतोष के अनुसार, आरएसएस को अपनी पहचान बरकरार रखने के लिए किसी पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। यह संगठन लाखों अनुयायियों के विश्वास पर ही चलता है और बिना पंजीकरण के ही सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है।
प्रियांक खरगे का मुख्य आरोप क्या है? प्रियांक खरगे ने दावा किया है कि हैदराबाद रियासत के भारत में विलय के दौरान रजाकारों से उनकी रक्षा आरएसएस कार्यकर्ताओं ने नहीं, बल्कि जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और भारतीय सेना ने की थी।
अखंड भारत का विचार क्या है? संतोष के अनुसार, अखंड भारत का विचार कोई प्रशासनिक सपना नहीं है। यह सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी सपना है, जिसका उदाहरण पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण से दिया जा सकता है।
सरकारी संपत्ति विधेयक का उद्देश्य क्या है? इस बिल में किसी भी संगठन या पार्टी का नाम नहीं है। यह कानून सिर्फ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए लाया जा रहा है। सरकार का मकसद सार्वजनिक जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों को सही तरीके से नियंत्रित करना है।
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