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Gujarat: फर्जी सरकारी दफ्तर और रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामलों पर ED की बड़ी कार्रवाई, 152+ करोड़ की संपत्ति जब्त

Published अगस्त 18, 2026 · Updated अगस्त 18, 2026 · By David Taylor - indianewslive247.com

Foto : David Taylor - indianewslive247.com

गुजरात: फर्जी सरकारी कार्यालयों और रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर ED ने 152.5 करोड़ की संपत्ति अटैच की

Indianewslive247.com – प्रवर्तन निदेशालय ने गुजरात में दो स्वतंत्र मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरणों के संदर्भ में एक बड़ी कार्रवाई अंजाम दी है। जांच निकाय ने अस्थायी रूप से कुल 152.5 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अटैच किया है। इनमें अहमदाबाद के हाउसिंग फ्रॉड प्रकरण से जुड़ी 129.8 करोड़ रुपये की संपत्ति और दाहोद के फर्जी सरकारी कार्यालय प्रकरण से जुड़ी 22.7 करोड़ रुपये की संपत्ति शामिल है। जमीन, म्यूचुअल फंड में निवेश और विभिन्न बैंक खातों में रखी गई रकम को इस कार्रवाई के दायरे में लाया गया है।

अहमदाबाद: घर-दुकानों के नाम पर 250 खरीदारों को ठेसा

दूसरा प्रकरण अहमदाबाद के रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़ा है। नवरंगपुरा और बोपल थानों में दर्ज पांच एफआईआर के आधार पर ED ने इसकी जांच प्रारंभ की थी। जांच में सामने आया कि रोनक सोनानी, विपुल गंगानी सहित अन्य आरोपियों ने मध्यमवर्गीय परिवारों, छोटे निवेशकों, व्यापारियों और साधारण घर खरीदारों को लक्ष्य बनाया।

इन लोगों ने फ्लैट और दुकानें आकर्षक प्रारंभिक मूल्य पर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। साथ ही 54 से 100 प्रतिशत तक की सुनिश्चित रिटर्न की गारंटी दी गई। खरीदारों से रकम वसूल होने के बाद कई परियोजनाओं को आवश्यक मंजूरी नहीं मिल सकी, और वादे के अनुरूप फ्लैट या दुकानें कभी नहीं सौंपी गईं।

छारोड़ी परियोजना: जमीन का तीसरे पक्ष को हस्तांतरण

छारोड़ी परियोजना में लगभग 250 खरीदारों और निवेशकों को यह बताया गया था कि रेरा पंजीकरण तथा एनए अनुमति की प्रक्रिया जारी है। हालाँकि बाद में पता चला कि परियोजना हेतु निर्धारित जमीन को अन्य व्यक्तियों को बेच दिया गया या हस्तांतरित कर दिया गया। जांच में यह भी उभरा कि संपत्तियों को तीसरे पक्ष को दिखावटी बिक्री दस्तावेजों के माध्यम से सौंपा गया। इन दस्तावेजों में ऐसी भुगतान जानकारी दर्ज की गई थी जिससे लेनदेन वास्तविक और कानूनी प्रतीत होता था।

दाहोद: सिंचाई विभाग के छह नकली कार्यालय

दाहोद प्रकरण में आरोप है कि आरोपियों ने सिंचाई और जल संसाधन विभाग के छह फर्जी सरकारी दफ्तर स्थापित किए। इन कार्यालयों के माध्यम से सिंचाई-संबंधी कार्य कराने के बहाने सरकार से करोड़ों रुपये के अनुदान प्राप्त किए गए। सरकारी अधिकारियों का रूप धारण करना, नकली मुहर और हस्ताक्षर बनाना, तथा झूठे दस्तावेज तैयार करना — ये सभी आरोप इन लोगों पर लगे हैं।

जांच के अनुसार, इन लोगों ने 121 फर्जी प्रोजेक्टों की मंजूरी प्राप्त की और सरकारी धन को कथित तौर पर धोखाधड़ी के जरिए अपने कब्जे में ले लिया।

अबुबकर जकिराली सैयद से जुड़ी संपत्तियाँ अटैच

ED ने आरोपी अबुबकर जकिराली सैयद, उसके परिवार और सहयोगियों से संबंधित सात जमीनों, म्यूचुअल फंड निवेशों तथा विभिन्न बैंक खातों में मौजूद रकम को अटैच किया है। इन संपत्तियों की कुल कीमत 22.70 करोड़ रुपये बताई गई है। इस प्रकरण में पूर्व आईएएस अधिकारी बीडी निनामा सहित कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी पहले ही कर दी गई है।

पैसे का रास्ता: दोनों मामलों में अलग-अलग छिपाव तंत्र

ED के अनुसार, दोनों प्रकरणों में कथित धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को भिन्न-भिन्न विधियों से छिपाने और पुनर्निवेश करने की कोशिश की गई। दाहोद मामले में सरकारी अनुदान की रकम को कई बैंक खातों के जटिल नेटवर्क के जरिए घुमाया गया, जिसके बाद उसे जमीन खरीद, निवेश और अन्य कार्यों में लगाया गया। अहमदाबाद मामले में घर-दुकानों के नाम पर जुटाए गए धन को कथित तौर पर अन्य स्थानों पर भेजा गया और संपत्तियों को छिपाने की प्रयास किए गए।

ED की चेतावनी: म्यूल बैंक खातों से सावधान

दाहोद प्रकरण की जांच के दौरान एजेंसी ने म्यूल बैंक खातों के प्रयोग की बात उठाई है। म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते हैं जिनका उपयोग अपराध से प्राप्त रकम को संग्रहीत करने या एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है।

ED ने नागरिकों से अपील किया है कि वे किसी अन्य व्यक्ति को अपना बैंक खाता या बैंकिंग जानकारी प्रयोग करने की अनुमति न दें। यदि किसी संदिग्ध तरीके से बैंक खाता प्रयोग करने का अनुरोध प्राप्त हो, तो तुरंत इसकी सूचना देने की सलाह दी गई है।

ED ने कुल 152.5 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच कर जांच में आगे की कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त किया है।

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