IndiaNewsLive247
Fast mobile article powered by Nexiamath-SEO AMP.
AMP Article

Explainer: मेकेदातु परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट तक हुआ है संघर्ष, अब तमिलनाडु में सर्वदलीय बैठक की मांग क्यों?

Published जुलाई 6, 2026 · Updated जुलाई 6, 2026 · By Michael Martin

मेकेदातु परियोजना पर बने विवाद में तमिलनाडु सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारीज कर दी गई

Explainer - दशकों से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के पानी के विवाद चल रहा है। इसी नदी पर अब विवाद नए आयाम ले गया है, जो मेकेदातु बांध परियोजना के निर्माण के चलते है। कर्नाटक सरकार इस योजना को जल्द शुरू करना चाहती है, जबकि तमिलनाडु इसे लगातार विरोध कर रहा है।

मेकेदातु नाम के अर्थ में 'बकरी की छलांग' है। यह कावेरी और अर्कावती नदियों के संगम स्थल पर स्थित एक गहरी घाटी है। इस जगह कर्नाटक के रामनगर जिले के कनकपुरा तालुक में है और बंगलूरू से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

मेकेदातु परियोजना क्या है?

कर्नाटक सरकार ने 2013 में इस स्थल पर बहुउद्देश्यीय जलाशय बनाने की योजना पेश की थी। इसकी शुरुआती लागत करीब 5,912 करोड़ रुपये थी, जो बाद में लगभग 9,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। परियोजना के तहत बनाए जाने वाले जलाशय करीब 67.16 टीएमसी पानी संग्रह कर सकता है।

कर्नाटक का दावा है कि इस परियोजना का उद्देश्य बंगलूरू, रामनगर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती आबादी के लिए पेयजल उपलब्ध कराना और 400 मेगावाट बिजली उत्पादन करना है। इसमें सिंचाई की नई योजना शामिल नहीं है, जिससे तमिलनाडु के हिस्से का पानी कम रहेगा।

विवाद के मूल कारण

कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने पानी के बंटवारे के फैसले दिए थे। तमिलनाडु का आरोप है कि कर्नाटक के परियोजना के निर्माण से राज्य के कावेरी डेल्टा में खेती प्रभावित होगी। किसानों को सिंचाई के लिए पानी की कमी हो सकती है।

पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस परियोजना को मंजूरी नहीं देने की मांग की थी। उनका तर्क था कि कोई भी ऊपरी धारा वाला राज्य, निचली धारा वाले राज्य की सहमति के बिना अंतरराज्यीय नदी पर ऐसा निर्माण नहीं कर सकता।

तमिलनाडु सरकार ने 2013 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कावेरी नदी पर मेकेदातु और शिवनासमुद्र परियोजनाओं पर रोक लगाने की मांग की थी। इस दावे के बावजूद कर्नाटक ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट केंद्रीय जल आयोग को भेजी थी, लेकिन कुछ कमियों के कारण उसे वापस कर दिया गया। बाद में रिपोर्ट में सुधार कर दोबारा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

2018 के फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया गया। इसका उद्देश्य कावेरी नदी के पानी के बं