IndiaNewsLive247
Fast mobile article powered by Nexiamath-SEO AMP.
AMP Article

Explainer: आज बंगाल में आ सकता है UCC विधेयक; क्या है इसका इतिहास, इसके लागू होने से क्या बदलेगा?

Published जून 29, 2026 · Updated जून 29, 2026 · By Patricia Gonzalez

समान नागरिक संहिता क्या है? एक एक्स्प्लेनर

Explainer - समान नागरिक संहिता (UCC) के बारे में बात करते समय, एक समान नागरिक संहिता का अर्थ है कि भारत में रहने वाले हर नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो, एक समान कानून के अधीन होगा। इस कानून के लागू होने से शादी, तलाक, गोद लेना और जमीन-जायदाद के बंटवारा जैसे मुद्दों पर सभी धर्मों के लिए एक ही नियम लागू होगा। इस एक्स्प्लेनर के माध्यम से हम इस विषय का इतिहार और विवाद के बारे में जानेंगे, जो एक्स्प्लेनर विधेयक के लागू होने से भारत में बदलाव कर सकता है।

संविधान में क्या बोला गया है?

भारत के संविधान में अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता को लेकर प्रावधान है। इस अनुच्छेद का मकसद धर्म के आधार पर नागरिकों के बीच भेदभाव को खत्म करना है। यह संविधान सभा द्वारा 23 नवंबर 1948 को एक गहरी बहस के बाद पारित किया गया था। आज बंगाल में एक्स्प्लेनर विधेयक पर चर्चा हो रही है, जो धार्मिक स्वतंत्रता के विरोधी और समर्थकों के बीच तीव्र विवाद के कारण ध्यान आकर्षित करता है।

अपनाने की आवश्यकता क्यों रही?

समान नागरिक संहिता की अवधारणा कई दशक पहले से हमारे राजनीतिक मंच पर चर्चा के बीच रही है। भाजपा की ओर से यह एक अहम एजेंडा रहा है, जो 2019 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में शामिल था। अपने समर्थकों का तर्क है कि यह धर्म आधारित कानूनों के बीच समानता लाएगा और राष्ट्रीय न्याय प्रणाली को सरल बनाएगा। इस विषय पर संविधान बनाने के दौरान चर्चा तेज रही, जिसमें मुसलमानों और हिंदुओं के व्यक्तिगत कानूनों के बारे में बहस हुई।

संविधान सभा की बहस और चर्चा

मद्रास से आने वाले सदस्य मोहम्मद इस्माइल ने संविधान सभा में एक संशोधन का प्रस्ताव रखा, जिसमें कहा गया कि कोई भी धर्मी वर्ग अपने व्यक्तिगत कानूनों को छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। इस्माइल के मुताबिक, धर्म आधारित कानूनों में हस्तक्षेप लोगों की जीवन शैली के साथ हस्तक्षेप कर सकता है, जो पीढ़ियों से बने रहे हैं। उन्होंने यूगोस्लाविया और अन्य यूरोपी