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CRPF: सीआरपीएफ के 19 जवानों की मौत का जिम्मेदार कौन, NHRC ने गृह सचिव और डीजी से तलब की विस्तृत रिपोर्ट

Published अगस्त 14, 2026 · Updated अगस्त 14, 2026 · By Charles Davis - indianewslive247.com

Foto : Charles Davis - indianewslive247.com

NHRC ने सीआरपीएफ जवानों की मौत पर तलब की रिपोर्ट

Indianewslive247.com – CRPF - राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सीआरपीएफ के 19 जवानों की आत्महत्या के मामलों को गंभीरता से लिया है। आयोग ने गृह सचिव और सीआरपीएफ के महानिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिए। आधिकारिक तथ्यों के अनुसार, जनवरी 2026 से मई 2026 के बीच इन 19 जवानों की मौत की पुष्टि हुई है। आयोग का मानना है कि यदि मीडिया रिपोर्ट्स सत्य हैं, तो यह मौलिक अधिकारों की हनति का मामला है।

पांच वर्ष में 281 आत्महत्याएं

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले पांच वर्षों में सीआरपीएफ के 281 जवानों ने आत्महत्या की है। इनमें से 216 जवान अपनी ड्यूटी के दौरान ही इस कदम को उठा चुके हैं। वर्षवार आंकड़ों के अनुसार 2021 में 57, 2022 में 43, 2023 में 57, 2024 में 46 और 2025 में 59 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए हैं। सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा केंद्रीय अर्धसैनिक बल है जिसमें लगभग 3.25 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं।

सीआरपीएफ की तैनाती आतंकवाद और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अधिक होती है। उत्तर पूर्व के उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में भी सीआरपीएफ और इसकी विशेष इकाई 'कोबरा' को प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। बल के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि आयोग की यह पहल सीआरपीएफ जवानों की सुरक्षा, मानसिक दबाव, कार्य परिस्थितियों और कल्याण योजनाओं से जुड़े मुद्दों को फिर से चर्चा में लाई है।

जवानों की मानसिक स्थिति पर सवाल

बल के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि आयोग की यह पहल सीआरपीएफ जवानों की सुरक्षा, मानसिक दबाव, कार्य परिस्थितियों और कल्याण योजनाओं से जुड़े मुद्दों को फिर से चर्चा में लाई है। आत्महत्या के अलावा सहकर्मी जवान द्वारा साथी पर गोली चलाने जैसी घटनाएं भी बढ़ रही हैं। मौजूदा महानिदेशक के कार्यकाल में हुई इन घटनाओं से यह संकेत मिलता है कि जवानों की समस्याओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

हालांकि, वर्तमान डीजी जवानों के साथ लगातार संवाद बनाए रखते हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वे सीआरपीएफ जवानों की समस्याओं के समाधान की कोशिश करते रहते हैं। नियमित सैनिक सम्मेलनों का आयोजन भी किया जाता है। इन सभी प्रयासों के बावजूद जवानों की मन की बात समझने में जो कमी दिख रही है, वह व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है।

अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या बढ़ता परिचालन दबाव, लंबी अवधि की कठिन परिस्थितियों में तैनाती, मानसिक तनाव और यूनिट स्तर पर उपलब्ध सहायता-व्यवस्थाएं सीआरपीएफ जवानों के मनोबल एवं मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। आयोग की इस जांच से भविष्य में बेहतर नीतियां बन सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआरपीएफ के 19 जवानों की मौत का कारण क्या है? आधिकारिक रिपोर्ट्स के अनुसार ये सभी जवान आत्महत्या कर चुके हैं। आयोग ने इस संबंध में गृह सचिव और सीआरपीएफ डीजी से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।

NHRC ने कब तक रिपोर्ट मांगी है? राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गृह सचिव और सीआरपीएफ महानिदेशक को दो सप्ताह की अवधि में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

पांच वर्ष में सीआरपीएफ में कितनी आत्महत्याएं हुई हैं? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले पांच वर्षों में सीआरपीएफ के कुल 281 जवानों ने आत्महत्या की है, जिनमें से अधिकांश ड्यूटी के दौरान ही इस कदम को उठा चुके हैं।

सीआरपीएफ में कितने कर्मचारी कार्यरत हैं? सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा केंद्रीय अर्धसैनिक बल है जिसमें लगभग 3.25 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं और आतंकवाद एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उनकी बड़ी संख्या में तैनाती रहती है।

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Frequently Asked Questions

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