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2008 अहमदाबाद धमाके: इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य की फांसी पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा

Published अक्टूबर 1, 2026 · Updated अक्टूबर 1, 2026 · By Jessica Wilson - indianewslive247.com

Foto : Jessica Wilson - indianewslive247.com

2008 अहमदाबाद धमाके मामले में फांसी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

Indianewslive247.com – 2008 अहमदाबाद धमाके मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरलेवी की फांसी के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और निचली अदालत का रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश दिया।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह अंतरिम आदेश दिया। अदालत अब मुकदमे के रिकॉर्ड और याचिका में उठाए गए कानूनी मुद्दों की जांच करेगी।

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका

अहमद बावा ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें विशेष अदालत की ओर से दी गई मृत्युदंड की सजा बरकरार रखी गई थी। हाईकोर्ट ने 7 जुलाई को 38 दोषियों की फांसी की सजा कायम रखी थी और 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था।

हाईकोर्ट ने माना था कि अभियोजन पक्ष ने गुजरात और केरल में कथित आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में दोषियों की भूमिका तथा साजिश को आगे बढ़ाने के लिए रसद सहयोग के आरोप साबित किए हैं। अदालत ने हमलों की योजना, व्यापक जनहानि और समाज में भय फैलाने की मंशा को गंभीर कारक माना था।

सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा आदेश केवल अहमद बावा की फांसी के अमल पर रोक से जुड़ा है। इससे अन्य दोषियों के खिलाफ दिए गए फैसलों में स्वतः कोई बदलाव नहीं होता।

26 जुलाई 2008 को 21 विस्फोट

2008 अहमदाबाद धमाके 26 जुलाई को हुए थे, जब शहर के अलग-अलग इलाकों में करीब 70 मिनट के भीतर 21 बम विस्फोट हुए। इन हमलों में 56 लोगों की मौत हुई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे।

कुछ विस्फोट उन अस्पतालों के पास हुए, जहां घायलों को उपचार के लिए पहुंचाया जा रहा था। इससे राहत और चिकित्सा सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ा तथा पीड़ित परिवारों की मुश्किलें बढ़ गईं।

जांच के दौरान सूरत से बरामद निष्क्रिय या नहीं फटने वाले बमों के मामले भी मुकदमे में शामिल किए गए। अहमदाबाद विस्फोटों की 20 एफआईआर और सूरत के बमों से जुड़ी 15 एफआईआर को मिलाकर 35 मामलों की संयुक्त सुनवाई हुई।

78 आरोपियों के खिलाफ चला था मुकदमा

इस मामले में 78 लोगों के खिलाफ मुकदमा चला। विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इनमें 38 को फांसी और 11 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

एक साथ 38 दोषियों को मृत्युदंड दिया जाना न्यायिक इतिहास के असाधारण फैसलों में गिना गया। इससे पहले जनवरी 1998 में राजीव गांधी हत्या मामले में तमिलनाडु की टाडा अदालत ने 26 आरोपियों को फांसी सुनाई थी।

गुजरात हाईकोर्ट ने बाद में दोषियों की अपीलें खारिज करते हुए विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा। राज्य सरकार ने भी मृत्युदंड को कायम रखने की मांग की थी।

मुआवजे और जुर्माने पर निर्देश

हाईकोर्ट ने दोषियों पर लगाए गए आर्थिक दंड को भी बरकरार रखा था। अदालत ने अपराध की प्रकृति, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, बड़ी संख्या में मौतों और घायलों को देखते हुए जुर्माने को उचित माना।

पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए गुजरात सरकार को 30 मार्च 2027 से पहले मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल लोगों को 5-5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।

हाईकोर्ट ने कुछ दोषियों के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड, पश्चाताप के अभाव और जेल में अनुशासनात्मक कार्रवाइयों का भी उल्लेख किया था। इन तथ्यों को सजा में नरमी न बरतने के आधारों में शामिल किया गया।

कई राज्यों तक फैली जांच

2008 अहमदाबाद धमाके मामले के दोषियों में प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया के पूर्व नेता सफदर नागौरी और उसके सहयोगी भी शामिल हैं। मुकदमे में शामिल लोगों का संबंध गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल और उत्तर प्रदेश समेत 11 राज्यों से बताया गया था।

अहमद बावा की फांसी पर रोक अंतिम फैसला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट रिकॉर्ड की समीक्षा और आगे की सुनवाई के बाद याचिका के कानूनी पहलुओं पर निर्णय करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने किसकी फांसी पर रोक लगाई है?

सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरलेवी की फांसी के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाई है।

क्या इस आदेश से सभी दोषियों की सजा रुक गई है?

नहीं। यह आदेश केवल अहमद बावा की याचिका और उसकी फांसी के अमल से संबंधित है। अन्य दोषियों की सजा पर इसका स्वतः प्रभाव नहीं पड़ता।

2008 अहमदाबाद धमाके में कितने लोगों की जान गई थी?

26 जुलाई 2008 को हुए सिलसिलेवार विस्फोटों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे।

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