टीएमसी के 10 बागी विधायकों पर अयोग्यता की तलवार: बंगाल विधानसभा सचिवालय ने भेजा नोटिस; क्या होगा अगला कदम?
टीएमसी के 10 बागी विधायकों को विधानसभा सचिवालय का नोटिस
Indianewslive247.com – ट एमस क 10 ब ग विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिका पर पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सचिवालय ने विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 विधायकों को नोटिस भेजकर सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। यह कदम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से दायर याचिका के बाद उठाया गया है।
मामला अब केवल तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक मतभेदों तक सीमित नहीं है। इसका संबंध विधानसभा में विपक्ष के नेता की मान्यता, विधायक दल के नेतृत्व और दल-बदल कानून के तहत संभावित अयोग्यता से भी जुड़ गया है।
किन विधायकों को नोटिस मिला?
नोटिस पाने वालों में ऋतब्रत बनर्जी के अलावा अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, विप्लव मित्रा, जावेद खान और रतिन घोष शामिल हैं। सभी विधायकों को एक सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
अखरुज्जमान अंसारी ने नोटिस मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि बागी गुट इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर चर्चा करेगा और तय समय में जवाब दाखिल करेगा।
हम पार्टी के भीतर इस मामले पर चर्चा करेंगे। इसके बाद समय पर जवाब देंगे।
अंसारी को बागी गुट ने मुख्य सचेतक भी चुना था। ममता बनर्जी गुट इन गतिविधियों को पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व और अनुशासन के खिलाफ मानता है।
अयोग्यता याचिका और अदालत में लंबित विवाद
ममता बनर्जी गुट की ओर से वरिष्ठ विधायक सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने ऋतब्रत बनर्जी और अन्य नौ विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की है। उन्होंने सात जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष रतिन बोस को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग रखी थी।
चट्टोपाध्याय ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया। वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में ऋतब्रत बनर्जी की मान्यता से जुड़ा विवाद कलकत्ता हाईकोर्ट में पहले से लंबित है। ऐसे में ट एमस क 10 ब ग विधायकों की अयोग्यता प्रक्रिया और विपक्ष के नेता पद का मामला साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।
बागी गुट का बहुमत का दावा
बागी खेमे का दावा है कि टीएमसी के 80 में से 65 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में हैं। इसी आधार पर गुट ने विधानसभा के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक पदों पर अपना दावा जताया है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी गुट इस दावे और समानांतर गतिविधियों को चुनौती दे रहा है।
टीएमसी में यह तनाव मई में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद बढ़ा। बाद में यह विवाद संसद तक भी पहुंचा, जहां बागी गुट से जुड़े 20 लोकसभा सांसद टीएमसी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई में शामिल हो चुके हैं।
अब आगे क्या हो सकता है?
सबसे पहले नोटिस पाने वाले विधायक अपना जवाब देंगे। इसके बाद विधानसभा स्तर पर अयोग्यता याचिका, विधायकों के जवाब और दल-बदल कानून के प्रावधानों पर विचार किया जा सकता है। प्रक्रिया के दौरान यह देखा जाएगा कि क्या संबंधित विधायकों के कदम पार्टी के अधिकृत रुख से अलग थे।
विपक्ष के नेता पद पर हाईकोर्ट का लंबित मामला भी महत्वपूर्ण रहेगा। ट एमस क 10 ब ग विधायकों पर होने वाली कार्रवाई का असर पश्चिम बंगाल विधानसभा की राजनीतिक स्थिति और दोनों गुटों के दावों पर पड़ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
विधायकों को जवाब देने के लिए कितना समय मिला है?
विधानसभा सचिवालय ने नोटिस पाने वाले 10 विधायकों को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है।
क्या नोटिस मिलते ही विधायक अयोग्य हो जाएंगे?
नहीं। नोटिस प्रक्रिया की शुरुआत है। अयोग्यता पर कोई निर्णय जवाब, सुनवाई और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विचार के बाद ही होगा।
विवाद का विपक्ष के नेता पद से क्या संबंध है?
ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने का विवाद भी अदालत में लंबित है। इसलिए अयोग्यता याचिका और विधानसभा नेतृत्व का प्रश्न एक-दूसरे से राजनीतिक रूप से जुड़े हुए हैं।
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