हवा महल से मैत्रियोश्का तक: ब्रिक्स सम्मेलन में संस्कृतियों का संगम, किन कलाकारों ने बनाई दोस्ती की कलाकृति?
हवा महल से मैत्रियोश्का तक: ब्रिक्स सम्मेलन में संस्कृतियों का संगम
Indianewslive247.com – हव महल स म त र य - हव महल स म त र के प्रतीकों से सजी एक विशाल कलाकृति नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आकर्षण का केंद्र बनी है। ‘संगम: कॉन्फ्लुएंस ऑफ कल्चर्स’ नाम की यह भित्ति चित्र परियोजना अलग-अलग ब्रिक्स देशों की कला परंपराओं, मित्रता और सांस्कृतिक विविधता को एक साझा कैनवास पर प्रस्तुत करती है।
भारत मंडपम की मुख्य इमारत की दीवार पर बना यह म्यूरल ‘ब्रिक्स फ्रेंडशिप म्यूरल’ परियोजना का हिस्सा है। इसे भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने विदेश मंत्रालय के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के माध्यम से तैयार कराया है। जिस परिसर में शिखर सम्मेलन का मुख्य आयोजन होना है, वहीं यह कला रचना देशों के बीच जुड़ाव का संदेश देती है।
एक दीवार पर कई देशों की सांस्कृतिक पहचान
म्यूरल के केंद्र में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का लोगो है। इसके ऊपरी भाग में जयपुर के प्रसिद्ध हवा महल का चित्रण किया गया है, जबकि दोनों ओर हाथियों की जोड़ी भारतीय पहचान को दर्शाती है। पेड़-पौधे, जीव-जंतु और प्रकृति के रंग इस रचना को जीवंत बनाते हैं।
हव महल स म त र की सांस्कृतिक यात्रा केवल भारत तक सीमित नहीं रहती। कलाकृति में रूसी कला परंपरा की झलक, मैत्रियोश्का जैसी पहचान और ब्राजील सहित अन्य ब्रिक्स देशों से जुड़े प्रतीक भी शामिल हैं। अलग-अलग दृश्य भाषाओं का यह मेल ‘संगम’ की उस अवधारणा को सामने लाता है, जिसमें भिन्न स्रोतों से निकली नदियां मिलकर एक प्रवाह बनती हैं।
आईसीसीआर के अनुसार, परियोजना का उद्देश्य लोगों को केंद्र में रखते हुए सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना है। यह भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय—लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण—को भी कला के माध्यम से अभिव्यक्त करती है।
11 दिनों में तैयार हुई मित्रता की कलाकृति
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले 29 अगस्त से 8 सितंबर तक नई दिल्ली में यह संयुक्त कला परियोजना पूरी की गई। भारत और अन्य ब्रिक्स सदस्य देशों के 11 कलाकारों ने 11 दिनों तक साथ काम करते हुए अपनी कलात्मक शैलियों और सांस्कृतिक प्रतीकों को इस दीवार पर उकेरा।
इस सामूहिक प्रयास का महत्व तैयार म्यूरल से कहीं अधिक है। कलाकारों ने अलग-अलग भाषाओं, अनुभवों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के बावजूद एक साझा रचना तैयार की, जो पारस्परिक सम्मान, मित्रता और सहयोग की भावना को दिखाती है।
“संगम: संस्कृतियों का मेल” अलग-अलग उद्गम वाली नदियों के मिलकर साथ बहने की भावना को दर्शाता है और विविधता में एकता का उत्सव मनाता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस परियोजना को ब्रिक्स के कलाकारों और संस्कृतियों को एक मंच पर लाने वाला प्रयास बताया। उनके अनुसार, यह रचना भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की प्राथमिकताओं को सार्वजनिक कला के रूप में सामने रखती है।
विस्तारित ब्रिक्स और सांस्कृतिक सहयोग
ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के शामिल होने से इसका विस्तार हुआ, जबकि इंडोनेशिया 2025 में सदस्य बना।
बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को साझेदार देशों का दर्जा दिया गया है। इस व्यापक समूह के बीच भारत मंडपम का म्यूरल सांस्कृतिक संपर्क के महत्व को रेखांकित करता है।
ब्रिक्स राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, अर्थव्यवस्था एवं वित्त, तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क के तीन प्रमुख स्तंभों पर काम करता है। यह मंच 11 बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को साथ लाता है, जो वैश्विक आबादी का करीब 49.5 प्रतिशत, विश्व जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का करीब 26 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करती हैं।
भारत की अध्यक्षता में ‘मानवता पहले’ का संदेश
भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण के विषय पर केंद्रित है। इसे ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ या ‘मानवता पहले’ की भावना से जोड़ा गया है, जिसमें विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
12 सितंबर की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत मंडपम में विभिन्न देशों के नेताओं के लिए गाला डिनर की मेजबानी करेंगे। कार्यक्रम में भारत और अन्य ब्रिक्स सदस्य देशों के 100 से अधिक कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। हव महल स म त र से जुड़ी यह भित्ति चित्र और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां सम्मेलन के कूटनीतिक कार्यक्रम के साथ कला के माध्यम से संवाद का अवसर भी बनेंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ब्रिक्स फ्रेंडशिप म्यूरल कहां बनाया गया है?
यह म्यूरल नई दिल्ली के भारत मंडपम की मुख्य इमारत की एक दीवार पर बनाया गया है, जहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होना है।
‘संगम: कॉन्फ्लुएंस ऑफ कल्चर्स’ का संदेश क्या है?
यह कलाकृति अलग-अलग देशों की संस्कृतियों और कलात्मक परंपराओं के मिलन को दर्शाती है। इसका संदेश मित्रता, विविधता में एकता और लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करना है।
म्यूरल में कौन-कौन से प्रमुख भारतीय प्रतीक शामिल हैं?
म्यूरल में जयपुर का हवा महल, हाथियों की जोड़ी, प्रकृति और जीव-जंतुओं के चित्र शामिल हैं, जो भारतीय सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं।
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