सुप्रीम कोर्ट: नीट आंदोलनकारियों के खिलाफ एफआईआर रद्द करने के लिए केंद्र की अर्जी, शीर्ष कोर्ट में सुनवाई आज
सुप्रीम कोर्ट में नीट एफआईआर रद्द की सुनवाई
Indianewslive247.com – स प र म क र ट - दिल्ली के जंतर-मंतर पर छह सप्ताह तक जारी रहे छात्र आंदोलन के बाद दर्ज हुए 13 एफआईआर को निरस्त कराने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ मंगलवार यानी आज इस याचिका पर सुनवाई करेगी। सोमवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के उठने से ठीक पहले मौखिक उल्लेख किया और अगले दिन के लिए सुनवाई की मांग दर्ज की।
अनुच्छेद 142 और अदालत का रुख
सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम आवेदन प्रदर्शन से जुड़ी एफआईआर को निरस्त करने का उद्देश्य रखता है, और कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत माँगी गई है। इस पर सीजेआई ने संक्षेप में कहा:
"आवेदन दाखिल कीजिए। अगर पक्षकार सुलह कर रहे हैं तो हमें कोई आपत्ति नहीं।"
यह बयान 18 अगस्त को दी गई अदालत-दिशा का सीधा विस्तार है। उस दिन नीट प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पीठ ने एफआईआर रद्द की मंशा व्यक्त की थी। तब अदालत को यह भी बताया गया कि एफआईआर को वापस लेने में कानूनी अड़चनें हैं — इन्हें केवल क्लोजर रिपोर्ट के माध्यम से बंद किया जा सकता है, और संबंधित मजिस्ट्रेट उस रिपोर्ट को स्वीकार या अस्वीकार करने का स्वतंत्र अधिकार रखता है।
दिल्ली पुलिस की दोहरी मांग
दिल्ली पुलिस ने अदालत में दाखिल आवेदन में दो अलग-अलग माँगे रखी हैं। पहली माँग नीट प्रदर्शन से जुड़े 13 एफआईआर को रद्द कराने की है। दूसरी माँग प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 लोगों के खिलाफ उनकी कथित भूमिका की जाँच हेतु नए एफआईआर दर्ज करने की अनुमति लेने की है। यह संख्या उस भीड़ को दर्शाती है जो जंतर-मंतर और आस-पास के इलाकों में छह सप्ताह तक जमा रही थी।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और समापन
कथित नीट अनियमितताओं के विरोध में जनता संघ (CJP) के नेतृत्व में यह आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ। माहों तक चले इस घटनाक्रम में 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिस पर सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया और कई छात्र घायल हुए।
आंदोलन का अंत 25 जुलाई को हुआ, जब तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दिया और सरकार ने संगठन की शेष माँगों को स्वीकार किया। इस घटनाक्रम में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के मुआवजे का सवाल आज भी खुला है।
CJP प्रवक्ता का बयान और आगामी कदम
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि सरकार ने दिल्ली से जुड़ी सभी एफआईआर को रद्द कराने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है और भविष्य में छात्रों को निशाना नहीं बनाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा:
"सरकार की ओर से किए गए वादों को पूरा कराने के लिए संगठन स्थिति पर नजर रख रहा है।"
दास ने मुआवजे के सवाल पर सकारात्मक प्रगति की उम्मीद भी जताई। साथ ही सीजेपी ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च का आह्वान किया है, जिसका उद्देश्य एफआईआर रद्दी की प्रक्रिया पर दबाव बनाए रखना है।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और कानूनी प्रभाव
अनुच्छेद 142 संसद द्वारा पारित कानून के बावजूद अदालत को न्याय के पूर्ण निर्वहन हेतु आवश्यक कोई भी आदेश देने का अधिकार प्रदान करता है। सुप्रीम कोर्ट का रुख अब स्पष्ट है — 18 अगस्त को मंशा जताई जा चुकी है और आज की सुनवाई उसी दिशा में अगला कदम है। यदि अदालत एफआईआर रद्द का आदेश देती है, तो यह बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन के बाद दर्ज की गई एफआईआर को न्यायिक स्तर पर निरस्त करने का प्रमुख उदाहरण बनेगा। वहीं 2,873 लोगों के खिलाफ नई एफआईआर की अनुमति का सवाल खुला रहेगा, जो प्रदर्शन में शामिल हर व्यक्ति के लिए कानूनी अनिश्चितता का स्रो
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