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शुभेंदु सरकार की बड़ी कार्रवाई: पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों को बंद करने का आदेश; सर्वे में मिली क्या कमियां?

Published सितम्बर 13, 2026 · Updated सितम्बर 13, 2026 · By David Taylor - indianewslive247.com

Foto : David Taylor - indianewslive247.com

पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों को बंद करने का आदेश

Indianewslive247.com – श भ द सरक र क बड - श भ द सरक र क कार्रवाई के तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने सर्वेक्षण के बाद 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया है। करीब 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों ने इन संस्थानों की मंजूरी, पंजीकरण, प्रबंधन व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की जांच की थी।

अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के मंत्री क्षुदिराम टुडू ने कहा कि वैध अनुमति के साथ नियमों के अनुसार चल रहे मदरसों पर इस कार्रवाई का असर नहीं पड़ेगा। सरकार का कहना है कि उद्देश्य सभी मदरसों को बंद करना नहीं, बल्कि अनधिकृत और मानकों को पूरा नहीं करने वाले संस्थानों की पहचान करना है।

जून में शुरू हुआ था जिलावार सर्वे

राज्य में मदरसों का जिलावार सर्वे जून की शुरुआत में कराया गया था। इसमें सरकारी और निजी, दोनों तरह के मदरसों की स्थिति का आकलन किया गया। जांच के दौरान अधिकारियों ने संस्थानों के दस्तावेज, मान्यता, प्रबंधन और उपलब्ध ढांचागत सुविधाओं पर ध्यान दिया।

सर्वे का लक्ष्य यह पता लगाना था कि कितने मदरसे अधिकृत रूप से संचालित हो रहे हैं और किन संस्थानों में प्रशासनिक या अनुमति संबंधी कमियां हैं। इसी प्रक्रिया के बाद 252 मदरसों के लिए बंदी आदेश जारी किया गया।

करीब 100 मदरसों को सीधे बंद करने के बजाय पहले कारण बताओ नोटिस दिया गया है। इन संस्थानों को अपने दस्तावेज और स्पष्टीकरण पेश करने का अवसर मिलेगा। विभाग उनके जवाब की समीक्षा कर आगे का निर्णय लेगा।

“252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है, जबकि 100 अन्य को जरूरी मंजूरी और बुनियादी ढांचा नहीं होने के कारण कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।”

मंजूरी और बुनियादी ढांचा बने कार्रवाई का आधार

श भ द सरक र क मामले में सर्वेक्षण का मुख्य आधार आवश्यक मंजूरी और बुनियादी सुविधाएं रहीं। शैक्षणिक संस्थानों के लिए वैध अनुमति, स्पष्ट प्रबंधन व्यवस्था और न्यूनतम ढांचागत मानकों का पालन जरूरी माना जाता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन करने वाले मदरसों को काम जारी रखने की अनुमति होगी। कार्रवाई केवल उन संस्थानों तक सीमित रखने की बात कही गई है, जहां दस्तावेजी, प्रशासनिक या ढांचागत कमियां मिली हैं।

सुरक्षा और शिकायतों पर भी उठी चर्चा

राज्य के पंचायती राज मंत्री दिलीप घोष ने मदरसों से जुड़ी पुरानी शिकायतों और सुरक्षा के मुद्दों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि कथित चरमपंथी गतिविधियों के आरोप में पकड़े गए कुछ लोग मदरसों में शिक्षक के रूप में कार्यरत पाए गए थे।

“मदरसों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिली हैं। ऐसे मामले सामने आए हैं, जब इन संस्थानों से लोग राष्ट्रविरोधी गतिविधियां कर रहे थे।”

उन्होंने कहा कि कानून और सरकारी अनुमति के दायरे में चलने वाले मदरसे अपना काम जारी रखेंगे। हालांकि, मनमाने ढंग से संस्थान चलाने या नियमों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

वैध और अनियमित संस्थानों में फर्क की मांग

तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि सभी मदरसों को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, वैध तरीके से संचालित संस्थानों और नियमों का उल्लंघन करने वाले मदरसों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए।

यह फैसला विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समुदायों को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से कारण बताओ नोटिस पाने वाले करीब 100 मदरसों के जवाब और विभाग की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

किन मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है?

सर्वेक्षण में जिन 252 मदरसों में मंजूरी, पंजीकरण, प्रबंधन या बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कमियां मिलीं, उनके लिए बंदी आदेश जारी किया गया है।

क्या पश्चिम बंगाल के सभी मदरसे बंद होंगे?

नहीं। सरकार के अनुसार, वैध अनुमति और निर्धारित मानकों के साथ चल रहे मदरसों का संचालन जारी रहेगा।

कारण बताओ नोटिस पाने वाले मदरसों के पास क्या विकल्प है?

नोटिस पाने वाले संस्थान दस्तावेज और अपना स्पष्टीकरण विभाग के सामने रख सकते हैं। जवाब की जांच के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।

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