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‘वैकल्पिक नौकरी देनी चाहिए थी’: CRPF को घायल जवान को नौकरी से हटाना पड़ा भारी, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

Published जुलाई 14, 2026 · Updated जुलाई 14, 2026 · By Elizabeth Smith

CRPF को घायल जवान को नौकरी से हटाना पड़ा, सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई

व कल प क न कर द - सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में विवाद उठाया कि व कल प क न कर द बल ने एक व्यक्ति को दृष्टिहीनता के कारण नौकरी से हटा दिया, जबकि उसे वैकल्पिक पद पर स्थानांतरित करना चाहिए था। इस मामले में न्यायालय ने उल्लेख किया कि सेवा के दौरान उत्पन्न शारीरिक अयोग्यता के लिए नियम के तहत अनिवार्य समायोजन आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बारे में

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगजन अधिनियम, 1995 की धारा 47 अनिवार्य प्रकृति की है। इस धारा के तहत व्यक्ति को अन्य पद पर स्थानांतरित करना होता है या नियोक्ता को उसे अयोग्यता के बारे में आवेदन दर्ज करना होता है। व कल प क न कर द बल ने इस नियम को उल्लंघित कर दिया, जिसकी वजह से दिव्यांगजन के अधिकारों का उल्लंघन हुआ।

न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के खिलाफ अपील खारिज कर दी। बल ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश को बदल दिया, जिसमें एक न्यायालय ने व्यक्ति को अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके बाद उसके नियोजन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।

मामला कैसे शुरू हुआ?

आरोपित व्यक्ति को 1985 में सीआरपीएफ में ड्राइवर के रूप में नियुक्त किया गया था, लेकिन 1996 में उसके नेत्र रोग के कारण बाईं आंख अंधी हो गई। अतिरिक्त जांच में पता चला कि दाहिनी आंख की दृष्टि आंशिक रूप से कमजोर हो गई। व कल प क न कर बल ने उसे सेवा निवृत्ति की आयु पार कर चुके व्यक्ति के लिए वैकल्पिक नौकरी देने के बजाय नौकरी से हटा दिया।

इस घटना के बाद व्यक्ति ने पूर्ण वित्तीय और सेवा लाभों की मांग की, लेकिन आवेदन अस्वीकृत कर दिया गया। न्यायालय ने उल्लेख किया कि व कल प क न कर बल की अपील में धारा 47 के तहत छूट दी गई थी, जिसके बारे में विवाद उत्पन्न हुआ।

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने आवेदन दायर किया, जिसमें कहा गया कि व्यक्ति को नियम के अनुसार बरकरार रखना चाहिए था। लेकिन व कल प क न कर बल के निर्णय के खिलाफ न्यायालय ने रोक लगा दी, क्योंकि अपनी कार्यवाही में बरकरार रखे गए व्यक्ति को अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

2002 में जारी अधिसूचना में दिव्यांगजन के लिए नियम की छूट दी गई, लेकिन व कल प क न कर बल ने उसे उल्लंघित कर दिया। न्यायालय ने कहा कि इस अधिसूचना के तहत बल के नियमों का उल्लंघन रोक देना चाहिए था, क्योंकि उस व्यक्ति की शारीरिक अयोग्यता सेवा के दौरान उत्पन्न हुई थी।