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वायु सेना की बढ़ेगी ताकत: सुखोई में लगेगी रूस की सबसे ताकतवर मिसाइल; 300 किमी दूर दुश्मन का शिकार होगा आसान

Published सितम्बर 7, 2026 · Updated सितम्बर 7, 2026 · By David Miller - indianewslive247.com

Foto : David Miller - indianewslive247.com

सुखोई में रूसी मिसाइल: वायु सेना की ताकत बढ़ेगी

Indianewslive247.com – व य स न क बढ ग - डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल की आगामी बैठक में भारतीय वायु सेना की बढ़ेगी ताकत को नया आयाम देने वाला निर्णय पास होने की संभावना है। प्रस्ताव के तहत सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों को रूसी निर्मित RVV-BD एयर-टू-एयर मिसाइलों से लैस किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद की जा रही है, जिससे वायु सेना की लंबी दूरी हवाई प्रभुत्व क्षमता मौजूदा सीमाओं से काफी आगे बढ़ेगी।

मैक-6 रफ्तार और 300 किमी की मारक दूरी

RVV-BD मिसाइल की सबसे बड़ी खूबी उसकी लगभग 6 मैक की हाइपरसोनिक उड़ान रफ्तार है। इस गति से यह मिसाइल हवा में तैरते हुए दुश्मन के एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमानों, खुफिया-निगरानी-संचार (ISR) विमानों और अन्य रणनीतिक हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम मानी जाती है। ये विमान किसी भी वायु अभियान में दुश्मन की सबसे कीमती संपत्ति हैं, क्योंकि वे पूरे युद्ध-क्षेत्र की नज़र और कमांड-कंट्रोल रीढ़ का काम करते हैं।

लगभग 300 किलोमीटर की मारक दूरी रखने वाली ये मिसाइलें वायु सेना को उसकी मौजूदा एयर-टू-एयर हथियारों की सीमा से कहीं आगे ले जाती हैं। इस दूरी पर दुश्मन के अहम हवाई ठिकानों को भेदना संभव बनता है, जिससे वायु सेना को युद्ध-क्षेत्र में प्रभुत्व बनाए रखने का एक नया साधन मिलता है।

स्वदेशी और विदेशी — दोनों रास्तों पर समानांतर प्रगति

रक्षा मंत्रालय एयर-टू-एयर हथियारों के आधुनीकरण के लिए स्वदेशी और विदेशी दोनों विकल्पों पर एक साथ काम कर रहा है। इस द्वि-पथ रणनीति का मूल उद्देश्य वायु सेना को लंबी दूरी से हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने की बेहतर क्षमता उपलब्ध कराना है, बिना किसी एक स्रोत पर निर्भरता बनाए रखे।

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल के मौजूदा और भविष्य संस्करणों पर तीव्र गति से काम कर रहा है। इन नए संस्करणों में 300 किलोमीटर से अधिक दूरी तक के हवाई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता विकसित करने की योजना शामिल है। विदेशी मोर्चे पर, भारत ने फ्रांस से मीटियर एयर-टू-एयर मिसाइलों का बड़ा ऑर्डर दे चुका है, जो आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी के हवाई लक्ष्यों के खिलाफ सबसे प्रभावी मिसाइलों में गिना जाता है।

260+ विमानों की रीढ़ और ऑपरेशन सिंदूर का अनुभव

भारतीय वायु सेना के बेड़े में वर्तमान में 260 से अधिक सुखोई-30 एमकेआई विमान मौजूद हैं। इन विमानों की बड़ी संख्या और उनकी लंबी दूरी मारक क्षमता के कारण इन्हें भारतीय वायु शक्ति का अहम स्तंभ माना जाता है। RVV-BD मिसाइलों से लैस किए जाने के बाद इन विमानों की रणनीतिक भूमिका और गहराई से बदल जाएगी।

सुखोई-30 एमकेआई विमानों ने हालिया ऑपरेशन सिंदूर में भी अपनी भूमिका साबित की थी। इस अभियान के दौरान इन विमानों ने ब्रह्मोस एयर-लॉन्च्ड मिसाइल और रैम्पेज जैसी लंबी दूरी एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलों का प्रयोग कर पाकिस्तान में स्थित कई एयर बेस को निशाना बनाया। यह अनुभव वायु सेना को यह पुख्ता विश्वास देता है कि लंबी दूरी हथियारों का प्रयोग युद्ध-क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के BRICS बैठक में शामिल होने के लिए भारत आने से कुछ दिन पहले रक्षा मंत्रालय इस प्रस्ताव पर अंतिम विचार कर रहा है। RVV-BD एकीकरण इस द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का एक प्रमुख पहलू होगा। इसके अलावा डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में सुखोई-30 एमकेआई विमानों और उनके AL-31 इंजन की मरम्मत-ओवरहॉल प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है, जिससे विमानों की उपलब्धता और परिचालन क्षमता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

वायु सेना की लंबी दूरी एयर-टू-एयर मारक क्षमता को और मजबूती मिल सकती है — रक्षा सूत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RVV-BD मिसाइल की उड़ान रफ्तार कितनी है? यह मिसाइल लगभग 6 मैक की हाइपरसोनिक रफ्तार से उड़ती है, जो इसे दुश्मन के रणनीतिक हवाई लक्ष्यों के खिलाफ अत्यंत प्रभावी बनाती है।

इस मिसाइल की मारक दूरी कितनी है? RVV-BD की मारक दूरी लगभग 300 किलोमीटर है, जो वायु सेना की मौजूदा एयर-टू-एयर क्षमता की सीमा से काफी आगे है।

कौन-से विमान इस मिसाइल से लैस किए जाएँगे? भारतीय वायु सेना के सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों को RVV-BD मिसाइलों से सज्ज

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