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‘मैं ट्रैवल एजेंट हूं क्या?’: राहुल की विदेश यात्रा पर बोले शशि थरूर, एसआईआर पर केंद्र से पूछा- क्या फायदा हुआ

Published अक्टूबर 21, 2026 · Updated अक्टूबर 21, 2026 · By Elizabeth Smith - indianewslive247.com

Foto : Elizabeth Smith - indianewslive247.com

राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर शशि थरूर ने टिप्पणी से किया इनकार, एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए सवाल

Indianewslive247.com – म ट र वल एज ट ह - दिल्ली में मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के विरोध के बीच राहुल गांधी की विदेश यात्रा को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर से सवाल किया गया। तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों के प्रश्न का जवाब देते हुए थरूर ने स्पष्ट कहा कि वह इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

“मैं कोई ट्रैवल एजेंट नहीं हूं। मुझसे यह पूछने का कोई मतलब नहीं है कि राहुल गांधी विदेश क्यों गए हैं।”

थरूर ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारियां और कार्यक्रम होते हैं। उन्होंने अपने केरल आने का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी अन्य नेता की यात्रा के उद्देश्य पर उनसे जवाब मांगना उचित नहीं है। दिल्ली में जारी राजनीतिक गतिविधियों के दौरान राहुल गांधी के विदेश जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने दूरी बनाए रखी।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर निशाना

कांग्रेस सांसद ने बातचीत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी एसआईआर, को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इस प्रक्रिया के कारण कई लोगों के मतदान अधिकार प्रभावित हुए हैं। थरूर ने कहा कि किसी भी नागरिक को मताधिकार से वंचित करना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

उन्होंने पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि विधानसभा चुनाव से पहले वहां मतदाता सूची से 90 लाख से अधिक नाम हटाए गए। थरूर के मुताबिक, इनमें से करीब 82 हजार मामलों में ही अपीलों पर सुनवाई हुई। उन्होंने कहा कि सुनी गई अपीलों में 91 प्रतिशत ऐसे मामलों से जुड़ी थीं, जिनमें संबंधित मतदाताओं के नाम सूची से नहीं हटने चाहिए थे।

थरूर ने पूछा कि यदि इतने बड़े स्तर पर नाम हटाने में त्रुटियां सामने आती हैं, तो विशेष गहन पुनरीक्षण की उपयोगिता क्या रह जाती है। उनके अनुसार, चुनावी सूची तैयार करने की प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि उन्हें अनावश्यक रूप से बाहर करना।

फॉर्म-6, फॉर्म-7 और वर्ष 2002 की सूची पर भी प्रश्न

मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से संबंधित प्रक्रियाओं पर भी थरूर ने आपत्ति दर्ज की। उन्होंने सवाल किया कि फॉर्म-6 को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी और फॉर्म-7 इतने बड़े पैमाने पर क्यों भरवाए गए। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाने के पीछे क्या तर्क था।

थरूर ने कहा कि देश लंबे समय से चुनाव कराता आया है, लेकिन अतीत में मतदाता सूची से जुड़ी ऐसी व्यापक परेशानियां सामान्य रूप से सामने नहीं आईं। उनका कहना था कि इस स्थिति के लिए चुनाव आयोग को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

उनके अनुसार, मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है। किसी नाम को हटाने, जांचने या बहाल करने की हर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि मतदाता को यह भरोसा रहे कि वह बिना बाधा अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

थरूर ने कहा कि कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग इसी पृष्ठभूमि में कर रही है। पार्टी का मत है कि एसआईआर के संचालन और उसके परिणामों के लिए चुनाव आयोग की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। कांग्रेस चाहती है कि इस प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों से जवाब लिया जाए और मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी की मांग किसी एक दल को चुनावी लाभ पहुंचाने या किसी दूसरे दल को नुकसान देने के लिए नहीं है। थरूर के मुताबिक, असली मुद्दा यह है कि प्रत्येक योग्य नागरिक को अपनी पसंद के उम्मीदवार या पार्टी के लिए मतदान करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

“जब चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होंगे, तब जनता स्वयं तय करेगी कि सरकार किसकी बनेगी।”

एक नवंबर को रामलीला मैदान में रैली

कांग्रेस ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली की घोषणा की है। थरूर ने बताया कि आयोजन के लिए पुलिस से अनुमति मिल चुकी है। पार्टी इस मंच के माध्यम से चुनावी सूची से जुड़े अपने सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाएगी।

रैली का केंद्र मतदाताओं के अधिकार, सूची संशोधन की प्रक्रिया और चुनावों की निष्पक्षता रहेगा। कांग्रेस का तर्क है कि मतदाता सूची में किसी भी बड़े बदलाव की प्रक्रिया स्पष्ट, जांच योग्य और नागरिकों के लिए सुलभ होनी चाहिए।

पवन खेड़ा ने पीएम मोदी के बयानों पर दी प्रतिक्रिया

इस बीच कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दशहरा समारोह के दौरान दिए गए भाषण पर प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री की ओर से आम सहमति बनाने की बात पर खेड़ा ने कहा कि इंडिया गठबंधन पहले से इसी उद्देश्य के साथ एकजुट है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रधानमंत्री चाहें तो गठबंधन में शामिल हो सकते हैं और उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

परिसीमन तथा महिला आरक्षण विधेयक पर सहमति बनाने संबंधी प्रधानमंत्री के बयान को लेकर खेड़ा ने सवाल किया कि अहंकार के घोड़े पर सवार होकर आम सहमति कैसे बन सकती है। उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री संसद में विपक्ष से दूरी रखते हैं और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ पूरी ताकत से संघर्ष करते हैं, जबकि दूसरी तरफ सहमति की बात करते हैं।

खेड़ा ने पूछा कि प्रधानमंत्री ने अब तक कितनी सर्वदलीय बैठकें बुलाई हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक सहमति केवल बयान देने से नहीं, बल्कि विपक्षी दलों के साथ सार्थक संवाद से बनती है।

आरएसएस और महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर टिप्पणी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरएसएस पर किए गए ट्वीट के संदर्भ में पवन खेड़ा ने संघ प्रमुख मोहन भागवत की महिलाओं के बारे में कथित टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए। खेड़ा ने कहा कि महिलाओं को बच्चों के पालन-पोषण और घर तक सीमित रहने की सलाह देना पुरुषप्रधान सोच को दर्शाता है।

उनके मुताबिक, ऐसी सोच घर के बाहर की दुनिया को पुरुषों का क्षेत्र मानती है और महिलाओं की भूमिका को चारदीवारी तक सीमित करती है। कांग्रेस नेता ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी, समान अवसर और स्वतंत्रता को लेकर दृष्टिकोण व्यापक तथा आधुनिक होना चाहिए।

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