म एक श वस न स लिए एक नया रास्ता चुना
म एक श वस न स द – म एक श वस न स के अपने गुट के विरोध में नागेश पाटिल आष्टीकर का निर्णय बड़ा झटका लगाया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा क्षेत्र में विकास कार्य रुक गए थे, जिससे कार्यकर्ताओं की भाग लेने की संभावना कम हो गई। आष्टीकर के चले जाने से शिंदे गुट को एक नया विकल्प मिला, जो महाराष्ट्र के राजनीतिक संगठन में गहरा असर डाल सकता है।
म एक श वस न स ने विकल्प चुना एमपीलैड के दामन थाम के बाद
नागेश आष्टीकर के अनुसार, उनके लिए मूल रूप से राजनीति के खेल में अपना निर्णय लेना ही बचा रह गया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहने के कारण उनके लोकसभा क्षेत्र में निधि उपलब्ध नहीं हो रही थी, जिससे विकास गति प्रभावित हो गई। आष्टीकर के छोड़ देने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के दल में अपने लोगों की दिशा बदल गई।
उनके अनुसार 18 जून के बाद उन्हें बचाव के लिए अपना निर्णय लेना पड़ा। आष्टीकर ने दावा किया कि पार्टी के छोड़ देने के पीछे धन की कमी एक महत्वपूर्ण कारण रही। एमपीलैड के पांच करोड़ रुपये उपलब्ध रहे, जिससे अतिरिक्त निधि नहीं मिल सकी। इस तरह विकास कार्य रुक गए थे, जिससे कार्यकर्ताओं को परेशानी हो रही थी।
“लोगों की जिम्मेदारी उनके कार्यकर्ता के काम करवाना है,” आष्टीकर ने कहा। वे यह फैसला लिया क्योंकि उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं रहा था। अब उन्हें अपना कार्य अगले चरण में नए रास्ते अपनाना होगा।
चर्चा में बताया गया कि शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल की बैठक में छह सांसदों ने निर्णय लिया था। इनमें नागेश आष्टीकर के अलावा संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे और ओमप्रकाश राजे निम्बालकर शामिल थे। आष्टिकर के चले जाने के बाद शिंदे गुट में जाने की चर्चा तेज हो गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मत है कि ऐसे विकल्प चुनने से शिवसेना के भीतर नए संगठन के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। अगले चरण में इस गठबंधन के लिए उम्मीदवारों के चयन और कार्यकर्ता विभाजन के बारे में चर्चा जारी रहेगी। इस घटना के बाद शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं को अपने आंतरिक विवादों को हल करने की आवश्यकता होगी।
