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मानसून में भी उबलेगा आधा भारत: तापमान-उमस का जानलेवा मेल, 70 करोड़ लोगों को झेलना पड़ सकता है संकट

Published जून 16, 2026 · Updated जून 16, 2026 · By Joseph Moore

मानसून भी उबल सकता है: भारत के आधे लोग गर्मी और उमस के संकट में

म नस न म भ उबल ग - म नस न म भ उबल के खतरे के बारे में एक गंभीर अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में आईआईटी गांधीनगर के वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार, वैश्विक तापमान औद्योगिक काल के स्तर से दो डिग्री सेल्सियस बढ़ने पर मानसून के मौसम में लगभग 53 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक गर्मी और उमस के जानलेवा मिश्रण में बदल सकते हैं। यह अवस्था में शरीर की प्राकृतिक शीतलन प्रणाली काम करना बंद कर देती है जो कि भारत के लगभग 70 करोड़ लोगों के जीवन के लिए खतरा बन सकती है।

गर्मी और उमस के संयोजन जैसे नकारात्मक प्रभाव

अध्ययन में बताया गया है कि वैश्विक तापमान के बढ़ने के साथ-साथ मानसून में होने वाले अतिरिक्त उमस के संयोजन ऐसी स्थिति उत्पन्न कर सकता है जहां शरीर तापमान को ठंडा रखने में असमर्थ रहता है। इस अवस्था को वैज्ञानिक भाषा में 'अनकम्पेन्सेबल हीट स्ट्रेस' कहा जाता है। इसके कारण बाहर निकलने वाली गर्मी के प्रभाव का अनुभव होता है जो कि कार्यक्षमता और स्वास्थ्य पर गंभीर छाप छोड़ सकता है।

मानसून में तापमान और हवा में नमी के स्तर इतने बढ़ जाते हैं कि शरीर की प्राकृतिक शीतलन प्रणाली अक्सर काम करना बंद कर देती है। ऐसी परिस्थितियों में शरीर अपने सामान्य तापमान के बराबर रहने में असमर्थ रहता है। इसके कारण तापमान-उमस के मिश्रण में जीवन के लिए खतरा बन सकता है।

गंभीर गर्मी के प्रभावित क्षेत्र

विशेष रूप से गंगा के मैदानी क्षेत्रों, उत्तर-पश्चिमी भारत और पूर्वी तटीय इलाकों में रहने वाले लगभग 70 करोड़ लोग अतिरिक्त तापमान और उमस के मिश्रण में लगे खतरे के अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इस अवस्था में शारीरिक तापमान बढ़ने के साथ-साथ हवा की गति कम हो जाती है जो कि शरीर के भीतर तापमान के बढ़ने को बढ़ावा देती है।

मानसून ऋतु में तापमान और उमस के संयोजन जैसे मिश्रण के कारण अतिरिक्त खतरा उत्पन्न हो सकता है। इस अवस्था में शरीर अपनी शीतलन क्षमता का उपयोग करने में असमर्थ रहता है। ऐसी स्थिति में गर्मी और उमस के संयोजन में कार्यकर्ता, किसान और श्रमिकों के लिए खतरा बढ़ जाता है।

अध्ययन के अनुसार, मानसून में अतिरिक्त उमस के कारण गर्मी और उमस का मिश्रण भारत के 60 प्रतिशत इलाकों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे वातावरण में शरीर तापमान को ठंडा रखने में असमर्थ रहता है जो कि स्वास्थ्य और आजीविका पर गंभीर असर डाल सकता है।

भारत में मानसून ऋतु में उबल गर्मी के खतरे के बारे में वैज्ञानिकों के अनुमान अत्यधिक गंभीर हैं। यह अध्ययन बताता है कि वैश्विक तापमान के बढ़ने के कारण मानसून में शरीर के तापमान के बढ़ने की गति