मणिपुर हिंसा: 24 घंटे में 28 घर जलाए; नागा और कुकी बस्तियों पर हमला, जंगलों में भागे लोग; क्या है पूरा मामला?
मण प र ह स: कामजोंग में 24 घंटे में 28 घर जलाए गए
Indianewslive247.com – मण प र ह स के बीच कामजोंग जिले में बीते 24 घंटों के दौरान नागा और कुकी समुदायों की बस्तियों में आगजनी की घटनाएं सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार, कम से कम 28 घरों को आग लगा दी गई। कई परिवार जान बचाने के लिए जंगलों की ओर चले गए, जबकि कुछ लोगों ने नजदीकी सेना शिविर में शरण ली। प्रभावित क्षेत्रों में असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल और कामजोंग पुलिस की संयुक्त तैनाती की गई है।
इन घटनाओं में संपत्ति के नुकसान के साथ गोलीबारी की भी खबर है। एक कुकी नागरिक की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं। फरवरी से राज्य के कई जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच जारी तनाव ने स्थानीय लोगों की सुरक्षा और विस्थापन की चिंता फिर बढ़ा दी है।
पिलोंग और स्काइप गांवों में 13 खाली घर जले
रविवार को म्यांमार सीमा के पास स्थित पिलोंग और स्काइप गांवों में नागा समुदाय के 13 खाली मकानों में आग लगा दी गई। घटना के समय इन घरों में कोई मौजूद नहीं था। इन सीमावर्ती गांवों के लोग पहले की घटनाओं के बाद अपने घर छोड़ चुके थे।
खाली पड़े घरों को निशाना बनाए जाने से विस्थापित परिवारों के सामने वापसी की चुनौती और कठिन हो गई है। घरों का नुकसान केवल रहने की जगह का नुकसान नहीं है, बल्कि लोगों की जमा-पूंजी और सामान्य जीवन की उम्मीदों पर भी असर डालता है।
चासाद गांव में कुकी समुदाय के 15 मकान आग की चपेट में
शनिवार रात चासाद गांव में कुकी समुदाय के 15 घरों को जला दिया गया। हमले के बाद कई ग्रामीण गांव छोड़कर जंगलों में चले गए, जबकि कुछ लोगों ने पास के सेना शिविर में शरण ली। अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध उग्रवादी गांव में घुसे और मकानों को निशाना बनाया।
चासाद में इससे पहले हुई गोलीबारी में एक कुकी नागरिक की मौत हुई थी और चार अन्य लोग घायल हुए थे। मण प र ह स की इस ताजा घटना ने प्रभावित परिवारों के लिए आश्रय, जरूरी सामान और आजीविका से जुड़े संकट को गहरा कर दिया है।
राजमार्ग पर कार पर फायरिंग, दो लोग घायल
रविवार सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर ग्वालटाबी और महादेवा के बीच जा रही एक कार पर अज्ञात हथियारबंद लोगों ने गोलीबारी की। उखरुल जिले के लितान थाना क्षेत्र में हुई इस घटना में दो लोग घायल हुए।
राजमार्ग पर गोलीबारी से दूरदराज के इलाकों में यात्रा और जरूरी सेवाओं की पहुंच को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसी घटनाएं लोगों की आवाजाही के साथ चिकित्सा सहायता और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकती हैं।
कामजोंग मुख्यालय में तीन नागरिकों को गोली लगी
शनिवार रात कामजोंग जिला मुख्यालय में प्रतिद्वंद्वी हथियारबंद समूहों के हमले में तंगखुल नागा समुदाय के तीन नागरिक घायल हो गए। इससे स्पष्ट है कि तनाव केवल सीमावर्ती गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि आबादी वाले इलाकों में भी सुरक्षा चुनौती बनी हुई है।
एक ही अवधि में आगजनी और गोलीबारी की अलग-अलग घटनाओं ने प्रशासन और सुरक्षा बलों के सामने कई मोर्चों पर स्थिति संभालने की चुनौती खड़ी की है। संयुक्त सुरक्षा तैनाती का उद्देश्य हिंसा रोकना, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और आगे के हमलों की आशंका कम करना है।
उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने की निंदा
उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने चासाद में हुई हिंसा की निंदा की। उन्होंने कुकी नागरिक की मौत पर शोक जताया और घायल लोगों तथा विस्थापित परिवारों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। घरों में आग लगाने की घटना को उन्होंने असहनीय अपराध बताया।
जिला प्रशासन, राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों को चौबीसों घंटे सतर्क रहकर नागरिकों की जान और संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
किपगेन ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें न्याय के दायरे में लाने के निर्देश भी दिए। मण प र ह स से प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षा, सुरक्षित ठिकाने और भरोसेमंद प्रशासनिक सहायता की जरूरत है।
फरवरी से कई जिलों में जारी तनाव
फरवरी से तमेंगलॉन्ग, कामजोंग, उखरुल, कांगपोकपी और नोनी जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच जातीय हिंसा की घटनाएं जारी हैं। इन झड़पों में अब तक 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों घर जलाए जा चुके हैं।
कामजोंग की ताजा घटनाओं में सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ा है। विस्थापित परिवारों, घायल लोगों, बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के सामने सुरक्षित जीवन की चुनौती बनी हुई है। सुरक्षा बल प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कामजोंग में कितने घर जलाए गए?
बीते 24 घंटे में कामजोंग जिले में कम से कम 28 घरों में आग लगाए जाने की सूचना है। इनमें पिलोंग और स्काइप गांवों के 13 तथा चासाद गांव के 15 घर शामिल हैं।
प्रभावित लोगों ने कहां शरण ली?
हमलों के बाद कई ग्रामीण जंगलों की ओर चले गए, जबकि कुछ लोगों ने नजदीकी सेना शिविर में शरण ली।
इलाके में सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
प्रभावित क्षेत्रों में असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल और कामजोंग पुलिस की संयुक्त टुकड़ी तैनात की गई है।
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