मंदिर ‘पब्लिक अथॉरिटी’ नहीं: क्या यह कहकर छिपाई जा सकती है मंदिरों की जानकारी? CIC ने साफ कर दी तस्वीर
मंदिर पब्लिक अथॉरिटी नहीं: आईसीआई ने जानकारी छिपाने की अनुमति दी
म द र पब ल क अथ - केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने स्पष्ट कर दिया कि मंदिर जनता के लिए निर्धारित अधिकारियों के रूप में नहीं माने जा सकते। इसके अलावा, मंदिरों के संबंध में जानकारी छिपाई जा सकती है यह तर्क केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा स्थापित कर दिया गया। यह निर्देश पुडुचेरी में धार्मिक संस्थान और वक्फ विभाग के लिए आवेदन खारिज करने के आधार पर दिया गया है।
आवेदक की मांग और विभाग का निर्णय
आवेदक ने 2021-22 से 2024-25 तक के वार्षिक बजट, ऑडिट रिपोर्ट और शिकायतों के निस्तारण के विवरण मांगे थे। इस आवेदन को मंदिर प्रशासन ने धारा 6(3) के तहत देवस्थानम के लिए स्थानांतरित कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने कहा कि पुडुचेरी सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिल रही है।
केंद्रीय सूचना आयोग ने इस तर्क के विरोध में स्पष्ट विवरण देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि यदि जानकारी के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, तो इसे मंदिर पब्लिक अथॉरिटी के रूप में छिपाया जा सकता है। इसके बारे में विभाग के खिलाफ कानूनी जिम्मेदारी के साथ संबंधित आवेदन को वापस ले लिया जाना चाहिए।
अधिकारियों की जानकारी के लिए निर्देश
सूचना आयुक्त पी.आर. रमेश ने कहा, "अपीलकर्ता ने शिकायतों की संख्या, जांच की स्थिति और की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित जानकारी मांगी है। यदि विभाग ऐसे रिकॉर्ड रखता है, तो वे धारा 2(f) के तहत 'सूचना' माने जाएंगे। इसलिए, मंदिर पब्लिक अथॉरिटी के तौर पर आवेदन को खारिज करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।"
आयोग ने इस बारे में विभाग को अपने निर्देश में जानकारी के उपलब्ध रहने के लिए आवश्यक जवाब देने की अनुमति दी है। विभाग को उन आवेदनों के बारे में स्पष्ट वर्णन देने के लिए कहा गया है जहां मंदिर पब्लिक अथॉरिटी के रूप में जानकारी उपलब्ध नहीं है।
यह आदेश लंबित मामलों, शिकायतों के निस्तारण और संबंधित कार्यवाही के लिए आवेदन के विचार में उल्लेखनीय है। आयोग ने संकेत दिया कि विभाग को जब तक आवश्यक विवरण नहीं उपलब्ध कराए जाते, तब तक मंदिर पब्लिक अथॉरिटी के रूप में जानकारी छिपाने की अनुमति नहीं है।
इस निर्देश के बारे में विभाग को जांच करने के लिए कहा गया है। यह लंबित मामलों और आवेदनों के बारे में विस्तारपूर्वक विवरण देने के लिए अनुमति दी गई है। इससे जानकारी के छिपाए जाने की विस्तारपूर्वक संभावना कम हो जाएगी।