IndiaNewsLive247
Fast mobile article powered by Nexiamath-SEO AMP.
AMP Article

ब्रिक्स: एनएसए बैठक आज से, चीनी विदेश मंत्री भी होंगे शामिल; चीन की कथनी-करनी का होगा कूटनीतिक परीक्षण

Published जून 22, 2026 · Updated जून 22, 2026 · By David Miller

ब्रिक्स एनएसए बैठक: चीन के विदेश मंत्री शामिल होंगे

ब र क स - ब्रिक्स के आयोजन में आज से एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) बैठक की शुरुआत हुई है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल द्वारा नेतृत्व ले रहे इस दो-दिवसीय बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल होंगे। इस बैठक का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच राजनीतिक एवं रणनीतिक सहयोग के विकास में सहायता करना है।

बैठक के प्रमुख मुद्दे

बैठक के एजेंडा में आतंकवाद, गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे और नई तकनीकों के अप्रत्यक्ष उपयोग से संबंधित विषय शामिल हैं। इसके अलावा, ब्रिक्स के एक संयुक्त कार्य समूह के निष्कर्षों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की जाएगी। इस बैठक का महत्व विशेष रूप से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले बन रहे भारत-चीन संबंधों पर ध्यान केंद्रित करता है।

चीन के सामन्फ द्वारा संदेश

चीन के विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा ब्रिक्स मंच पर अपनी रणनीति का एक रूपांतरण के रूप में देखी जा रही है। बीजिंग के प्रतिनिधित्व के लिए उनकी शामिलता ब्रिक्स के आतंकवाद और विदेशी राजनीतिक चुनौतियों के संबंध में एक महत्वपूर्ण चर्चा के मंच के रूप में मानी जा रही है।

भारत और चीन दोनों बड़े राष्ट्र ब्रिक्स मंच पर अपनी सामान्य रूप से सहयोग के रास्ता खुले रखना चाहते हैं।

भारत के रुख और अपेक्षा

भारत की अपेक्षा इस बैठक के माध्यम से चीन के वास्तविक रुख की जांच की जा सकती है। इस बैठक में डैपसांग और डेमचोक जैसे क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी के लिए चर्चा होगी। भारत इस चर्चा के माध्यम से ब्रिक्स मंच की वैश्विक स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश कर रहा है।

चीन की भूराजनीतिक चुनौतियां

चीन के इस सक्रियता के पीछे उसकी भूराजनीतिक चुनौतियों के समाधान के लिए एक रणनीतिक रुख देखा जा रहा है। वांग यी की भारत यात्रा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के ठीक पहले अमेरिका की घेराबंदी और पूर्वी लद्दाख में तनाव के बीच चीन की एक रणनीतिक उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।

ब्रिक्स नेतृत्व के तहत भारत और चीन द्वारा सीमा विवाद के परिणामों की विश्लेषण करने के लिए एक माध्यम के रूप में इस बैठक की रचना की गई है। आगे बढ़ते राजनीतिक एवं रणनीतिक अहम्यता के दौरान ब्रिक्स के भीतर अपने रुख की चर्चा करते हुए दोनों देश संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।