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बंगाल नाव हादसा: आठ दिन पहले कैसे डूबी 15 मछुआरों से भरी नौका? नौ के मिले शव, छह अभी भी लापता; मुआवजे का एलान

Published जुलाई 14, 2026 · Updated जुलाई 14, 2026 · By Jessica Wilson

बंगाल नाव हादसा: आठ दिन पहले कैसे डूबी 15 मछुआरों से भरी नौका? नौ शव मिले, छह अभी भी लापता; मुआवजे का एलान

ब ग ल न व ह दस - पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के तट पर शुरू हुए तलाशी अभियान के बाद शनिवार को बक्खाली तट से 35 किलोमीटर दूर बाघेर चार के पास डूबी नौका का स्थल खोज निकला। रविवार को ट्रॉलर को पाथरप्रतिमा के सीतारामपुर तट तक खींच कर बचाव कार्य शुरू किया गया, जिसमें रात भर लगातार कार्य किया गया। अंततः नौ मछुआरों के शव बरामद किए गए, लेकिन छह अन्य मछुआरे अब भी गुमशुदा हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल नाव हादसे में हुई मौतों पर गहरा दुख व्यक्त किया। पीएमओ ने एक पोस्ट में लिखा, "दक्षिण 24 परगना जिले में नाव दुर्घटना में लोगों की मौत बेहद दुखद है। शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदनाएं जताई जाती हैं और घायल जल्द स्वस्थ हों।" उन्होंने यह भी घोषित किया कि प्रत्येक मृतक के परिवार को दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी जबकि घायलों को 50,000 रुपये के रूप में सहायता प्रदान की जाएगी।

दो जुलाई को शंकरपुर मछली बंदरगाह से निकले गए 'जय मां काली' नामक ट्रॉलर में 15 मछुआरे समेत ओडिशा के तीन व्यक्ति शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि इस नौका के दौरान 16 लोग जाने वाले थे लेकिन एक व्यक्ति कारणवश नहीं गया। तलाशी अभियान के बाद छह मछुआरों का कोई सुराग नहीं चला है।

दक्षिण 24 परगना के एक अधिकारी ने कहा, "तटरक्षक बल, पुलिस और स्थानीय मछुआरे लापता मछुआरों की तलाश में गहन अभियान चला रहे हैं। शवों को पोस्टमार्टम के लिए काकद्वीप उपमंडलीय अस्पताल भेज दिया गया है और जिला प्रशासन शोकाकुल परिवारों की मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।"

लापता मछुआरों के बारे में बालासोर की रिपोर्ट

ओडिशा के बालासोर जिले के उलुदा गांव के रहने वाले तीन सगे भाई रवींद्र माझी, जयराम माझी और जगन्नाथ माझी के परिजनों को शव बरामद करने के बाद काकद्वीप भेज दिया गया। जिलाधिकारी सूर्यवंशी मयूर विकास ने बताया कि परिवारों के लिए आवश्यक सहायता के लिए सरकार की ओर से प्रयास जारी रखे जा रहे हैं।

बाकी मृतक और लापता मछुआरे पूर्व मेदिनीपुर, हावड़ा और नदिया जिलों के रहने वाले हैं। काकद्वीप उपमंडलीय अस्पताल की मोर्चरी में उनके परिजन मौजूद हैं। अधिकारियों के मुताबिक शव इतने सड़ चुके हैं कि पहचान करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया, "डीएनए जांच तक पहुंच तक तलाश के लिए जारी रहेगी। तब तक निश्चित रूप से बताया जा सकता है कि मृतकों में कितने पश्चिम बंगाल के हैं और कितने ओडि�