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दिल्ली में सुरक्षा का घेरा बढ़ा: सीएपीएफ की 270 कंपनियां रहेंगी तैनात, विपक्ष के प्रदर्शन से पहले अलर्ट क्यों?

Published अक्टूबर 30, 2026 · Updated अक्टूबर 30, 2026 · By David Taylor - indianewslive247.com

Foto : David Taylor - indianewslive247.com

Indianewslive247.com – द ल ल म स रक ष - कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की रैली से पहले केंद्र सरकार ने दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 270 कंपनियों की तैनाती 16 नवंबर तक बढ़ा दी है। गुरुवार को लिए गए इस फैसले के तहत जवान 31 अक्तूबर के बाद भी दिल्ली पुलिस के साथ तैनात रहेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाली रैली, कुछ संगठनों की ओर से अचानक प्रदर्शन किए जाने की आशंका और त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है। दिल्ली में प्रदर्शन क्यों कर रहा है इंडिया गठबंधन? कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन के बैनर तले 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर 'चलो दिल्ली मार्च' का आह्वान किया है। यह मार्च रविवार, एक नवंबर को मध्य दिल्ली के रामलीला मैदान में समाप्त होगा। विपक्षी दलों का यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर पहले हुए विरोध प्रदर्शनों की कड़ी में हो रहा है। हालांकि, केंद्र की ओर से सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने के पीछे रैली के साथ-साथ अन्य संगठनों के अचानक प्रदर्शन करने की आशंका भी बताई गई है। दिल्ली में सीएपीएफ की कितनी कंपनियां और किन बलों के जवान तैनात रहेंगे? गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर तैनाती बढ़ाने की मंजूरी दी है। इस महीने पहले भी दो बार तैनाती की अवधि बढ़ाई जा चुकी है। अब कुल 270 कंपनियां स्थानीय पुलिस के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी। इनमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 125 कंपनियां शामिल हैं, जिनमें महिला जवानों की 17 टुकड़ियां भी हैं। इसके अलावा, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 46, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 39, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 31, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की 20 और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की 12 कंपनियां तैनात रहेंगी। 270 कंपनियों में कुल कितने जवान हो सकते हैं?

एक सीएपीएफ कंपनी की स्वीकृत संख्या 100 जवानों की होती है, लेकिन अभियान के दौरान प्रभावी तौर पर करीब 70 से 72 जवान ही उपलब्ध रहते हैं। इस हिसाब से 270 कंपनियों की स्वीकृत संख्या 27,000 जवान होती है। यह अनुमान है, वास्तविक तैनाती की पुष्टि नहीं है। दिल्ली पुलिस को इन बलों की तैनाती में तालमेल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि जरूरत के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था संभाली जा सके। दिल्ली में पहले कब और किस मुद्दे पर प्रदर्शन हुए थे? इस महीने की शुरुआत में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय बलों को दिल्ली लाया गया था। नौ अक्तूबर को राजधानी के कुछ हिस्सों में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद विपक्षी दलों ने भी इसी मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए। सीजेपी ने 16 अक्तूबर को 'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन भी किया था। इस संगठन ने इंडिया गठबंधन के प्रस्तावित प्रदर्शन को भी समर्थन दिया है।

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