IndiaNewsLive247
Fast mobile article powered by Nexiamath-SEO AMP.
AMP Article

तृणमूल दावेदारी विवाद: TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर होगा किसका हक? EC में दस्तावेज जमा करने की अंतिम तारीख आज

Published जुलाई 6, 2026 · Updated जुलाई 6, 2026 · By Daniel Davis

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर विवाद निर्णायक चरण में पहुंच गया

त णम ल द व द र - आज तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दोनों गुट चुनाव आयोग के समक्ष अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज जमा करने की अंतिम तारीख घटित हो रही है। पार्टी के इतिहास में पहली बार इस प्रकार की लड़ाई चल रही है, जिसमें नाम और चुनाव चिह्न के हक के लिए दोनों पक्षों के विवाद चरम पर पहुंच गए हैं। विवाद के केंद्र में पार्टी के प्रसिद्ध 'जोड़ा घास फूल' चिह्न, संगठनात्मक संपत्ति, वित्तीय संसाधन और पार्टी के मुख्यालय हैं।

दोनों पक्षों द्वारा दावा किया गया है

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट गुट ने चुनाव आयोग को पार्टी की स्थापना से जुड़े इतिहास और संगठन की निरंतरता के आधार पर अपना दावा पेश किया है। जबकि बागी गुट ने विधानसभा और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच बहुमत का दावा किया है। यह टकराव पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के वर्षों के सबसे बड़े विभाजन माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, ममता समर्थक गुट की ओर से वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी सोमवार को नई दिल्ली पहुंचकर आयोग को दस्तावेज सौंपेंगे।

चुनाव आयोग ने पिछले सप्ताह दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद उन्हें 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक दस्तावेज, संगठनात्मक रिकॉर्ड और समर्थन के प्रमाण जमा करने को कहा था। अब तक आयोग द्वारा रिकॉर्ड का परीक्षण करके दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।

विवाद के विकास के बारे में यह बताया गया है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद शुरू हुई बगावत के दौर में पार्टी में अपना विभाजन चल रहा है। पहले यह विवाद केवल विधायक दल तक सीमित था, लेकिन अब यह पूरे संगठन के नियंत्रण की लड़ाई बन चुका है।

पिछले महीने बागी गुट ने एक विशेष बैठक बुलाकर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना और समानांतर राष्ट्रीय नेतृत्व की घोषणा की। इसके चलते संसद में ममता बनर्जी की स्थिति कमजोर हुई। इसके बाद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 21 लोकसभा सांसद नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के दावा थाम लिए।

बागी गुट का दावा है कि उसके पास विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक विधायकों का समर्थन है। पहली बार आयोग को इसके लिए दस्तावेज सौंपे जा चुके हैं। इस दौरान टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था। अब उसका दावा करीब 65 विधायकों के समर्थन पर आधारित है।