तृणमूल कांग्रेस दो फाड़: ममता बनर्जी ने खुद को TMC चीफ बताया, EC को सौंपी सूची; बागी गुट का अध्यक्ष अलग
तृणमूल कांग्रेस में विभाजन: ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के बीच अध्यक्ष बर्खास्तगी के विवाद
त णम ल क ग र स - तृणमूल कांग्रेस के विभाजन के बाद राजनीतिक संगठन के भीतर बड़े विवाद के बीच चल रही अध्यक्ष चुनाव के परिणाम सामने आए। राज्य के अग्रणी नेता ममता बनर्जी ने अपनी निर्वाचन आयोग द्वारा सूची सौंपने के बाद अपने नेतृत्व की घोषणा की, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट ने अलग अध्यक्ष चुनाव की घोषणा की। इस घटना ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक लैंडस्केप में अहम असर छोड़ दिया है।
अध्यक्ष चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की गठबंधन विवाद
ममता बनर्जी की ओर से प्रस्तुत की गई सूची में उन्हें अध्यक्ष बताया गया है। इसमें उपाध्यक्ष के रूप में सुब्रत बख्शी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नाम को शामिल किया गया है। ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने अरूप रॉय के नाम को अध्यक्ष चुनाव के लिए प्रस्तुत किया है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस के विभाजन के कारण गठबंधन के भीतर टकराव बढ़ गया है।
“अरूप रॉय के नाम के साथ अध्यक्ष चुनाव का घोषणा कर दिया गया है।”
तृणमूल कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने विवादित नेताओं के खिलाफ निर्वाचन आयोग के सामने प्रस्तुत अधिकारियों के विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया है। इसमें फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष, सबीना यास्मीन और ऋतब्रत बनर्जी के नाम शामिल हैं। अब तृणमूल कांग्रेस की कमान कौन ले लेगी, इसके बारे में अब तक स्पष्टि नहीं है।
ऋतब्रत बनर्जी ने अपने गुट के तहत नए अध्यक्ष अरूप रॉय के नाम को प्रस्तुत किया है। इस घोषणा के साथ एक नई राष्ट्रीय कार्य समिति का ऐलान किया गया है। विधानसभा में बागी गुट ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह ऋतब्रत बनर्जी के नाम को चुनाव आयोग के सामने रखा है।
तृणमूल कांग्रेस के विभाजन के बाद दोनों गुटों के बीच तृणमूल कांग्रेस के वित्तीय संसाधन और चुनाव चिह्न के लिए टकराव बढ़ता जा रहा है। इस विवाद के बीच राष्ट्रीय कार्य समिति की सूची में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के बीच अहम भूमिका नजर आ रही है।
ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के अंदर विवाद के बीच नए राष्ट्रीय कार्य समिति की सूची दी। इसमें उन्हें अध्यक्ष के रूप में घोषित किया गया है। ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने अरूप रॉय के नाम के साथ अलग अध्यक्ष चुनाव का ऐलान किया है। अब तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेता की भूमिका के बारे में अहम आलोचना भी शुरू हो गई है।