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जनगणना के बाद होगी नए शहरी क्षेत्रों की वास्तविक पहचान: 2047 तक कितनी होगी शहरी आबादी; क्या बदलेगी परिभाषा?

Published अक्टूबर 12, 2026 · Updated अक्टूबर 12, 2026 · By David Miller - indianewslive247.com

Foto : David Miller - indianewslive247.com

जनगणन क ब द ह ग नए शहरी क्षेत्रों की वास्तविक पहचान

Indianewslive247.com – जनगणन क ब द ह ग नए शहरी क्षेत्रों की वास्तविक पहचान, क्योंकि देश में जारी डिजिटल जनगणना के आंकड़े गांवों और शहरों की सीमाओं का विस्तृत विश्लेषण करने में मदद करेंगे। इसके बाद उन बस्तियों को चिह्नित किया जा सकेगा जिनमें आबादी, रोजगार और आर्थिक गतिविधियां शहरी स्वरूप ले चुकी हैं, लेकिन उनका प्रशासन अब भी ग्रामीण स्थानीय निकायों के पास है।

संसदीय समिति ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से कहा है कि 3,000 से अधिक ऐसे शहर या कस्बे हैं जिनमें शहरी विशेषताएं मौजूद हैं, फिर भी वे ग्रामीण प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत आते हैं। समिति का मानना है कि शहर की मौजूदा परिभाषा पर पुनर्विचार जरूरी है, ताकि तेजी से बदलते क्षेत्रों को समय पर उचित दर्जा और योजनागत सुविधाएं मिल सकें।

2047 तक शहरी आबादी कितनी हो सकती है?

वर्ष 2025 में भारत की शहरी आबादी लगभग 45 से 50 करोड़ के बीच अनुमानित थी। 2047 तक इसके बढ़कर करीब 85 से 87 करोड़ होने की संभावना जताई गई है। आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक लगभग 87 करोड़ लोगों के शहरों और शहरी क्षेत्रों में रहने का अनुमान है।

मंत्रालय के अनुसार, नए शहरी क्षेत्र हाई स्पीड रेल नेटवर्क, क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली और प्रमुख एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित हो सकते हैं। परिवहन और आर्थिक गलियारों के निकट रोजगार, आवास, कारोबार तथा सेवाओं का विस्तार होने से इन इलाकों का शहरीकरण तेज होने की संभावना है।

संक्रमणकालीन क्षेत्र की नई श्रेणी का प्रस्ताव

बदलती शहरी जरूरतों को देखते हुए बस्ती वर्गीकरण व्यवस्था में ‘संक्रमणकालीन क्षेत्र’ या ट्रांजिशनल एरिया की अलग श्रेणी बनाने का प्रस्ताव है। यह श्रेणी उन इलाकों के लिए उपयोगी हो सकती है जहां गांव से शहर की ओर बदलाव तेज है, लेकिन जिन्हें अभी औपचारिक रूप से शहरी दर्जा नहीं मिला है।

भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, जनगणना पूरी होने और आंकड़ों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद अर्धशहरी एवं संक्रमणकालीन बस्तियों की पहचान संभव होगी। हालांकि, जनगणना की प्रक्रिया के बीच ऐसी नई श्रेणी लागू करना फिलहाल संभव नहीं बताया गया है।

जनगणना नगर और वैधानिक नगर में अंतर

जिस क्षेत्र की आबादी कम से कम 5,000 हो, जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर या अधिक हो और जहां पुरुष मुख्य कामगारों में कम से कम 75 प्रतिशत गैर-कृषि गतिविधियों में कार्यरत हों, उसे जनगणना नगर माना जाता है।

वैधानिक नगर अलग श्रेणी है। इसमें नगर निगम, नगरपालिका, छावनी बोर्ड और अधिसूचित क्षेत्र समितियां शामिल होती हैं। ऐसे नगरों को राज्य सरकारें अधिसूचित करती हैं। जनगणन क ब द ह ग नए क्षेत्रों के आकलन से इन दोनों प्रकार की शहरी बस्तियों की संख्या और स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।

संसदीय समिति की प्रमुख सिफारिश

संसदीय समिति ने शहर की परिभाषा में बदलाव पर विचार करने की सिफारिश की है। समिति ने यह भी कहा है कि वर्तमान मानदंडों में मौजूद लैंगिक पक्षपात की समीक्षा के लिए केंद्रित अध्ययन कराया जाए और शहरी क्षेत्रों की पहचान के लिए लैंगिक-समावेशी कार्यप्रणाली तैयार की जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नए शहरी क्षेत्रों की पहचान कब होगी?

जनगणना के आंकड़ों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद गांवों और शहरों की सीमाओं का विश्लेषण किया जाएगा। इसी प्रक्रिया में अर्धशहरी और संक्रमणकालीन क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है।

संक्रमणकालीन क्षेत्र क्या होता है?

यह ऐसा क्षेत्र हो सकता है जहां आबादी, बाजार, रोजगार और अन्य गतिविधियां शहरी रूप ले रही हों, लेकिन प्रशासनिक रूप से वह अभी ग्रामीण क्षेत्र के रूप में दर्ज हो।

शहरी क्षेत्रों की नई पहचान क्यों जरूरी है?

सही पहचान से आवास, परिवहन, जलापूर्ति, स्वच्छता, रोजगार और बुनियादी ढांचे की योजनाएं वास्तविक जरूरतों के अनुसार बनाई जा सकेंगी।

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