चुनाव आयोग के समर्थन में पूर्व अफसर: 124 पूर्व आईएएस-आईएफएस अधिकारियों का खुला पत्र, नागरिकों से क्या कहा?
च न व आय ग क समर्थन में 124 पूर्व अधिकारियों का खुला पत्र
Indianewslive247.com – च न व आय ग क समर - पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 124 अधिकारियों ने च न व आय ग क समर्थन में नागरिकों के नाम खुला पत्र जारी किया है। पत्र में भारत के चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया का बचाव किया गया है। यह पहल मतदाता सूची के सत्यापन और चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच सामने आई है।
पूर्व अधिकारियों ने कहा कि वे किसी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं हैं और चुनावों के संचालन व अध्ययन का लंबा अनुभव रखते हैं। पत्र के अनुसार, इनमें से कई अधिकारियों ने मतदाता सूची तैयार करने, मतदान कर्मियों को प्रशिक्षण देने, स्ट्रॉन्ग रूम सील करने और मतगणना की निगरानी जैसे काम किए हैं।
पत्र में कहा गया कि बिना प्रमाण के चुनावों के लिए बार-बार “धांधली” शब्द का इस्तेमाल लोकतांत्रिक भरोसे को नुकसान पहुंचा सकता है।
बिहार चुनाव और बूथ कैप्चरिंग का उदाहरण
च न व आय ग क बचाव करते हुए पूर्व अधिकारियों ने पुराने दौर की बूथ कैप्चरिंग का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि कभी मतदान केंद्रों पर हिंसा, मतपेटियां भरने या छीनने और मतदाताओं को लौटाने जैसी घटनाएं आम थीं। बूथ कैप्चरिंग को 1989 में संसद ने अपराध घोषित किया था।
पत्र में बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा गया कि 2025 का चुनाव राज्य में बिना किसी पुनर्मतदान के संपन्न हुआ। इसमें 1951 के बाद सबसे अधिक मतदान दर्ज होने और महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी का भी उल्लेख किया गया। पूर्व अधिकारियों के अनुसार, यह चुनावी व्यवस्था में आए बदलाव का संकेत है।
आरोपों और सबूतों पर क्या कहा गया?
पत्र में स्पष्ट किया गया कि सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन आरोपों को प्रमाण के साथ रखा जाना चाहिए। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि कानून मतदाता सूची पर आपत्ति दर्ज कराने और चुनाव याचिका दायर करने के रास्ते उपलब्ध कराता है। उनके मुताबिक, केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए और शपथपत्र से समर्थित न होने वाले आरोपों की जांच या जवाब देना कठिन होता है।
च न व आय ग क समर्थन वाले इस पत्र में कहा गया कि संदेह अपने आप में सबूत नहीं होता। चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखने के लिए शिकायतों और आपत्तियों को तय कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विवाद क्यों है?
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर मतदाता सूची को सत्यापित और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। चुनाव आयोग का कहना है कि इसका उद्देश्य डुप्लिकेट प्रविष्टियों, मृत मतदाताओं और स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके लोगों के रिकॉर्ड को ठीक कर मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ नागरिक समूहों ने चिंताएं जताई हैं। पूर्व अधिकारियों के पत्र का तर्क है कि ऐसी प्रक्रियाओं पर आपत्ति या शिकायत दर्ज कराने के लिए कानूनी प्रावधानों का उपयोग किया जाना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एसआईआर का मतलब क्या है?
एसआईआर का अर्थ स्पेशल इंटेंसिव रिविजन है। यह मतदाता सूची की जांच और सुधार की प्रक्रिया है, जिसमें गलत, दोहराई गई या अप्रासंगिक प्रविष्टियों को ठीक किया जाता है।
मतदाता सूची में गलती हो तो क्या किया जा सकता है?
मतदाता सूची में नाम, पता या अन्य जानकारी से जुड़ी गलती होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति या सुधार का आवेदन दिया जा सकता है। पूर्व अधिकारियों ने भी कहा है कि चुनाव संबंधी शिकायतें कानून में उपलब्ध माध्यमों से दर्ज कराई जानी चाहिए।
खुले पत्र का मुख्य संदेश क्या है?
पत्र का मुख्य संदेश यह है कि चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर आरोप प्रमाण के साथ लगाए जाएं और विवादों के समाधान के लिए संवैधानिक व कानूनी रास्तों का उपयोग किया जाए।
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