कौन है असली शिवसेना और NCP?: ‘जनता दे चुकी फैसला, सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी ऐसा होने की उम्मीद’, बोले फडणवीस
शिवसेना-एनसीपी विवाद: फडणवीस का सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा
Indianewslive247.com – क न ह असल श वस न - महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि 2024 की विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने शिवसेना और एनसीपी के विभाजन को लेकर अपना स्पष्ट निर्णय दे दिया था। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इन विवादों में इसी तरह का निर्णय सुनाएगा। दोनों राजनीतिक दलों में क्रमशः 2022 और 2023 में विभाजन हुआ था। इन दलों के नाम और चुनाव चिह्न पर दावों से जुड़े मामले अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
जनता की अदालत का निर्णय
फडणवीस ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "शिवसेना का मामला अदालत में विचाराधीन है और अब सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला देगा। लेकिन उससे पहले जनता की अदालत है। 2024 के विधानसभा चुनाव में जनता की अदालत का फैसला आ चुका है। जनता की अदालत ने यह फैसला दिया है कि शिवसेना एकनाथ शिंदे की है और एनसीपी (दिवंगत उपमुख्यमंत्री) अजित पवार की है।"
"अब सभी का ध्यान इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट क्या करता है। लेकिन हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट भी यही फैसला देगा।"
शिवसेना और एनसीपी में टूट की कहानी
जून 2022 में एकनाथ शिंदे और शिवसेना के 39 विधायकों के नेतृत्व में बगावत के बाद पार्टी में विभाजन हुआ था। इसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार गिर गई थी। शिंदे ने बाद में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई और मुख्यमंत्री बने। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने शिंदे गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी और उसे 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने की अनुमति दी। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को शिवसेना (यूबीटी) नाम और 'मशाल' चुनाव चिह्न दिया गया।
जुलाई 2023 में अजित पवार के शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल होने के बाद एनसीपी में भी विभाजन हो गया। उस समय अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अजित पवार उपमुख्यमंत्री पद पर बने रहे।
सुप्रीम कोर्ट कब सुनाएगा फैसला?
पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच तीखी लड़ाई हुई। निर्वाचन आयोग ने अजित पवार के गुट को मूल 'एनसीपी' नाम और घड़ी का चुनाव चिह्न दिया। शिवसेना और एनसीपी सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी हैं। निर्वाचन आयोग के पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े फैसलों को विपक्षी दल शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
जाति जनगणना पर फडणवीस ने जताया स्वागत
जनगणना के दूसरे चरण में जाति से जुड़ी जानकारी शामिल किए जाने पर फडणवीस ने केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे लंबे समय से की जा रही मांग पूरी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा, "हम शुरू से कहते रहे हैं कि केंद्र सरकार ने जाति जनगणना की मांग स्वीकार कर ली है। इस प्रक्रिया के कई चरण हैं और इसे उसी के अनुसार पूरा किया जाएगा।"
उन्होंने कहा, "यह (जाति की गणना) कई वर्षों से बहुत बड़ी मांग थी और किसी भी सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया था। लेकिन मोदी सरकार ने इसे स्वीकार किया। मैं इसके लिए मोदी सरकार का दिल से धन्यवाद करता हूं।"
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले 40 सवालों को अधिसूचित किया। इनमें जाति और कोविड टीकाकरण की जगह से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शिवसेना और एनसीपी में कब विभाजन हुआ? शिवसेना में जून 2022 में और एनसीपी में जुलाई 2023 में विभाजन हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट कब फैसला सुनाएगा? सुप्रीम कोर्ट में दोनों मामलों की सुनवाई चल रही है और जल्द ही अंतिम निर्णय आने की उम्मीद है।
निर्वाचन आयोग ने किसे मान्यता दी? निर्वाचन आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना और अजित पवार गुट को एनसीपी के रूप में मान्यता दी है।
जाति जनगणना कब होगी? केंद्र सरकार ने जनगणना के दूसरे चरण में जाति से जुड़ी जानकारी शामिल करने का फैसला किया है।
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