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कौन हैं दिमागी नक्सल?: मंत्री रिजिजू ने तीन तरह के लोगों का किया जिक्र; बताया PM ने किनके बारे में कहा था

Published अगस्त 16, 2026 · Updated अगस्त 16, 2026 · By Charles Gonzalez - indianewslive247.com

Foto : Charles Gonzalez - indianewslive247.com

Indianewslive247.com – क न ह द म ग नक - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है। पीएम मोदी के बयान को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। इस बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए उन्हें दो टूक शब्दों में दिमागी नक्सलों की परिभाषा बता दी है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी नेताओं को "दिमागी नक्सली" नहीं कहा। किरेन रिजिजू ने दिमागी नक्सल की सोच रखने वाले तीन तरह के लोगों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केवल वे लोग "दिमागी नक्सली" हैं जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को खारिज करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जो अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं। इसके साथ ही जो भारत से पूर्वोत्तर को अलग करने के लिए "चिकन नेक" काटना चाहते हैं। PM @narendramodi ji didn't say opposition leaders as Dimagi Naxals. Only following are Dimagi Naxals: 1. Who support Maoists and reject Indian Constitution.

2. Who stand with separatists & support Article 370. 4.

Who want to cut chicken neck to separate North-East from India. — Kiren Rijiju (@KirenRijiju) August 16, 2026 पीएम मोदी ने दिमागी नक्सली पर क्या कहा था? केंद्रीय मंत्री रिजिजू का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब एक दिन पहले लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने नक्सलियों के खिलाफ सरकार की लड़ाई में हासिल की गई सफलताओं का जिक्र किया था। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि वर्षों से माओवादी विचारधारा रखने वाले व्यक्ति देश में सत्ता के गलियारों में और सरकारी समितियों में सलाहकार के रूप में अपनी भूमिकाओं के माध्यम से अपनी जड़ें जमा चुके थे। पीएम ने कहा था कि इस "माओवादी मानसिकता" ने नीति निर्माण को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, "हम जंगलों से सशस्त्र नक्सलियों को खदेड़ने और देश को उस संकट से मुक्त कराने में सफल रहे हैं। हालांकि, सशस्त्र नक्सली चले गए हैं, लेकिन 'दिमागी' (बौद्धिक) नक्सली अभी भी आसपास घात लगाए बैठे हैं।" कांग्रेस का सवाल- 'सामाजिक न्याय की मांग करना क्या दिमागी नक्सल है?' ‘दिमागी नक्सल’ विवाद पर पीएम मोदी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि जो लोग उनका विरोध करते हैं, उन्हें 'दिमागी नक्सल' कहा जाता है। इन 'दिमागी नक्सलियों' ने जातिगत जनगणना की मांग की थी। चार साल तक वे कहते रहे कि जातिगत जनगणना नहीं होगी। फिर 30 अप्रैल 2025 को उन्होंने घोषणा की कि जातिगत जनगणना कराई जाएगी। जो भी सवाल उठाता है या उन्हें चुनौती देता है, उसे किसी न किसी नाम से पुकार दिया जाता है। क्या सामाजिक न्याय की मांग करना 'दिमागी नक्सल' है?

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