कर्नाटक में भाजपा नेताओं पर एफआईआर: मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का आरोप; कई जिलों में मामले दर्ज
कर्नाटक में भाजपा नेताओं पर मतदाता सूची विवाद में एफआईआर
Indianewslive247.com – कर न टक म भ जप न - कर न टक म भ जप से जुड़े नेताओं और अन्य लोगों पर मतदाता सूची से मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश के आरोप में कई जिलों में प्राथमिकी दर्ज हुई हैं। बेलगावी, बीदर, मैसूर और बल्लारी में दर्ज मामलों के अलावा दक्षिण कन्नड़ में भी फॉर्म-7 आवेदनों को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं। आरोपों की जांच जारी है और एफआईआर दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है।
विवाद विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान उठे फॉर्म-7 आवेदनों से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ मतदाताओं को गलत ढंग से स्थानांतरित या अनुपस्थित दर्शाकर उनके नाम हटाने का प्रयास किया गया।
बेलगावी में 198 मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप
बेलगावी मार्केट थाने में भाजपा नेता रवि पाटिल और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। 30 सितंबर को मीरासाब सनदी की शिकायत पर कार्रवाई हुई। सनदी बेलगावी उत्तर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड संख्या 12 में भाजपा के बूथ लेवल एजेंट के रूप में कार्यरत थे।
शिकायत के अनुसार, 22 सितंबर को रवि पाटिल, शंकर बीरप्पा नाइक, प्रशांत दीपक मुंडिनमणि और अन्य लोग बूथ लेवल अधिकारी के पास पहुंचे। आरोप है कि 198 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फर्जी दस्तावेज और फॉर्म-7 आवेदन पेश किए गए, जिनमें शिकायतकर्ता तथा उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी शामिल थे।
शिकायत में बूथ लेवल अधिकारी पर हस्ताक्षर कराने के लिए दबाव बनाने और फोन पर किसी व्यक्ति द्वारा स्वयं को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी बताने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
बीदर, मैसूर और बल्लारी के मामले
बीदर में भालकी के कारोबारी और मतदाता मोहम्मद अतीक अहमद ने शिकायत की कि एसआईआर के दौरान 3,244 मतदाताओं को अनुचित तरीके से “स्थानांतरित/अनुपस्थित” दिखाया गया। उनका कहना है कि सूची में उनका नाम भी था। इस मामले में 1 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज हुई और 32 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
मैसूर में सामाजिक कार्यकर्ता सैयद हसरत उल्ला ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके परिवार को उनके पंजीकृत पते पर न रहने वाला बताया गया, जबकि परिवार वर्षों से वहीं निवास कर रहा है। नरसिम्हाराजा थाने में दर्ज मामले में हरीश कुमार सी, राघवेंद्र एम, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अनिल थॉमस और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
बल्लारी के ब्रूसपेट थाने में कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट गौतम एस की शिकायत पर चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। शिकायत में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 7,561 फॉर्म-7 आवेदन जमा कराने की कथित साजिश का आरोप लगाया गया है।
दक्षिण कन्नड़ में 279 फॉर्म-7 आवेदनों पर सवाल
दक्षिण कन्नड़ जिले में कांग्रेस नेता रक्षित शिवराम ने बेलथंगडी विधानसभा क्षेत्र के 16 मतदान केंद्रों पर 279 फॉर्म-7 आवेदन दिए जाने पर आपत्ति जताई। कर न टक म भ जप से जुड़े इस विवाद में सभी आवेदनों, निवास संबंधी दावों और दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फॉर्म-7 मतदाता सूची से संबंधित आपत्ति दर्ज कराने का माध्यम है। किसी मतदाता के नाम में बदलाव या उसे हटाने से पहले निर्वाचन अधिकारियों द्वारा तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन किया जाना आवश्यक होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
फॉर्म-7 क्या है? यह मतदाता सूची में किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला आवेदन है। इसमें दिए गए कारण और दस्तावेजों की जांच निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा होती है।
यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाने का प्रयास हो तो क्या करें? मतदाता संबंधित बूथ लेवल अधिकारी या निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी से संपर्क कर सकता है और अपनी पहचान व निवास संबंधी दस्तावेजों के साथ आपत्ति दर्ज करा सकता है।
क्या एफआईआर से आरोप साबित हो जाते हैं? नहीं। प्राथमिकी जांच की शुरुआत है। आरोपों की सत्यता पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होती है।
कर न टक म भ जप से जुड़े मामलों में मुख्य सवाल यही है कि फॉर्म-7 आवेदनों की जांच निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित तरीके से हो, ताकि किसी भी मतदाता का अधिकार प्रभावित न हो।
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