ओडिशा में बारिश से तबाही: सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाए गए 70 हजार लोग, नदियां उफान पर, हीराकुंड के 16 गेट खुले
ओडिशा में बारिश से बाढ़ का संकट, 70 हजार लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए
Indianewslive247.com – ओड श म ब र श स - ओड श म ब र श के कारण राज्य के कई जिलों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति गंभीर बनी हुई है। तेज बारिश के बाद नदियों का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन ने जोखिम वाले इलाकों से 70 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। प्रभावित परिवारों के लिए राज्य में 395 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं।
बारिश का असर बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, कालाहांडी, कोरापुट, नबरंगपुर, मलकानगिरी, क्योंझर, नयागढ़, कंधमाल, बोलांगीर और जगतसिंहपुर सहित 13 जिलों में देखा जा रहा है। निचले क्षेत्रों में पानी भरने और कई संपर्क मार्ग प्रभावित होने से राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री करेंगे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी रविवार सुबह दक्षिण ओडिशा के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। इस दौरान जलभराव, नुकसान और राहत अभियानों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन को जरूरत पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने नदी किनारे और जलभराव वाले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। तेज बहाव वाले पानी, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों और बंद रास्तों के कारण कई स्थानों पर आवागमन मुश्किल हो गया है।
बालासोर में नदियां उफान पर
ओड श म ब र श का सबसे ज्यादा असर बालासोर जिले में दिखाई दे रहा है, जहां तीन प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जलेश्वर के राजघाट पर सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर शाम 5 बजे 11.07 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 10.36 मीटर है। भोगराई, जलेश्वर, बालियापाल और बस्ता ब्लॉक के कई गांवों में नदी का पानी पहुंच गया है।
गोविंदपुर में बुधबलंग नदी का जलस्तर दोपहर 3 बजे एनएच-16 के ऊपर 8.8 मीटर दर्ज हुआ। कंसाबांसा, सोआ और गंगाहर नदियों के जलस्तर में भी वृद्धि हुई है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
मयूरभंज में देवकुंड पर्यटकों के लिए बंद
भारी वर्षा के बाद सिमिलिपाल नेशनल पार्क प्रशासन ने मयूरभंज के देवकुंड में पर्यटकों के प्रवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। झरनों और जलधाराओं में तेज प्रवाह के कारण यह निर्णय लिया गया। देवकुंड जाने वाले मार्ग पर कई पुल और पुलिया बहने या क्षतिग्रस्त होने से रास्ता भी बाधित है।
बुधबलंग नदी का पानी बारिपदा नगरपालिका के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुका है। बड़साही, बेटनटी, उदला, कप्तिपदा, सारस्काना और रसगोबिंदपुर ब्लॉक भी जलभराव तथा बढ़ते नदी स्तर से प्रभावित हैं।
हीराकुंड बांध के 16 गेट खोले गए
ओड श म ब र श और महानदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र तथा पड़ोसी छत्तीसगढ़ में हुई भारी बारिश के कारण हीराकुंड बांध में जलदबाव बढ़ गया है। अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए बांध के 16 स्लुइस गेट खोले गए हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी के अनुसार, शनिवार को 11 और गेट खोले जाने के बाद कुल खुले गेटों की संख्या 16 हो गई।
बांध से छोड़े जा रहे पानी को देखते हुए निचले इलाकों और बाढ़ मैदानों में रहने वाले लोगों को सावधान रहने को कहा गया है। प्रशासन स्थानीय स्तर पर चेतावनी जारी करने और नदी के प्रवाह की निगरानी में जुटा है।
राहत और बचाव अभियान का उद्देश्य जोखिम वाले क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालना और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाना है।
ODRAF, NDRF और फायर सर्विस की टीमें तैनात
राहत कार्यों के लिए ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स की 33 टीमें तैनात की गई हैं। इनके साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की तीन टीमें और फायर सर्विस के करीब 300 दल प्रभावित इलाकों में काम कर रहे हैं। टीमें जलमग्न क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने और स्थानीय प्रशासन की सहायता में जुटी हैं।
जाजपुर में बैतरणी नदी की शाखा कानी नदी के उफान से दशरथपुर ब्लॉक की तारापद और कपासी पंचायतें जलमग्न हो गई हैं। कालाहांडी में हाती नदी पर स्थित इंद्रावती परियोजना के पांच गेट खोले गए हैं, जहां से गुरुवार रात से 550 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
बारिश और बाढ़ के दौरान क्या सावधानी रखें?
क्या जलभराव वाली सड़क पार करनी चाहिए?
नहीं। तेज बहाव वाली सड़क, पुलिया या नदी को पार करने का प्रयास खतरनाक हो सकता है। प्रशासन द्वारा बंद किए गए रास्तों का उपयोग न करें और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग अपनाएं।
राहत शिविर पहुंचने पर क्या करें?
राहत शिविर पहुंचने पर स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को प्राथमिकता से सुरक्षित रखें तथा आवश्यक दवाइयां और पहचान संबंधी दस्तावेज साथ रखें।
नदी किनारे रहने वाले लोगों को क्या करना चाहिए?
ओड श म ब र श के दौरान नदी का जलस्तर तेजी से बदल सकता है। इसलिए चेतावनी मिलते ही सुरक्षित स्थान पर चले जाएं, बिजली के उपकरणों से दूरी बनाए रखें और आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें।
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