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एअर इंडिया विमान हादसे की बरसी: ‘यह मेरे करियर की सबसे दर्दनाक घटना थी’, गुजरात के डीजीपी ने साझा किया अनुभव

Published जून 11, 2026 · Updated जून 11, 2026 · By David Miller

एअर इंडिया विमान हादसे की बरसी: गुजरात के डीजीपी ने अपने करियर की सबसे दर्दनाक याद शेयर की

दुर्घटना के बाद तेजी से चले बचाव अभियान की दिव्य विधि भी यादगार रह गई

एअर इ ड य व म न - गुजरात के पुलिस महानिदेशक ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने एअर इंडिया की उड़ान एआई-171 के दुर्घटना ग्राहक के रूप में एक साल पूरे हो जाने के बाद अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि इस घटना को उनके करियर की सबसे गहरी चोट रही है।

2025 के 12 जून को लंदन जा रही एअर इंडिया की उड़ान एआई-171 अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस घटना में विमान में सवार 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के अलावा आसपास के एक चिकित्सा संस्थान में मौजूद 19 लोगों की भी जान चली गई। इसके बाद चमत्कारिक रूप से एक यात्री की जान बच गई।

“हादसे के बाद बचाव अभियान युद्ध स्तर पर चलाया गया। लगभग दो मिनट बाद ही नियंत्रण कक्ष से घटना के बारे में सूचना मिली और मैं तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गया। दोपहर दो बजे तक मौके पर पहुंच चुका था।”

मलिक ने बताया कि राहत कार्य के शुरुआती चरण में बहुत तेजी से कार्य शुरू कर दिया गया था। वहां उपलब्ध कराए गए शवों के साथ एक चिकित्सा संस्थान में लोगों की जांच शुरू कर दी गई। उन्होंने बताया कि हादसे के 30 मिनट के भीतर 500 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया। फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा कड़ी कर दी गई।

अपनी यादों में डीजीपी ने कहा कि मृतकों के परिजनों को शवों की सही पहचान के लिए डीएनए परीक्षण के बिना आसानी से नहीं हो सकता। इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई और अहमदाबाद की लैब में 51 परिजन के डीएनए नमूने दर्ज कर लिए गए। यह काम हादसे के सात घंटे के भीतर पूरा कर लिया गया।

उन्होंने बताया कि डीएनए जांच के बिना पहचाने गए पहले शव को 13 जून की सुबह आठ बजकर 30 मिनट पर परिजनों को सौंप दिया गया था। इसके बाद 14 जून की दोपहर तीन बजकर 19 मिनट पर डीएनए मिलान के बाद पहली बार शव को विधि के अनुसार परिजनों के साथ सौंपा गया। यह हादसे के 50 घंटे से कम समय में हुआ।

मलिक ने यह भी कहा कि विभागों के बीच बेहतरीन समन्वय देखने को मिला और सभी जरूरी कागजात तत्काल प्रदान किए गए। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया अपेक्षा के बजाय एक तेज अभियान बन गई। बचाव दस्तावेज और रिपोर्ट की तैयारी में देर नहीं की गई।

लेकिन उनके कहने पर, यह घटना उनकी जिंदगी और करियर के सबसे दुखद क्षण बन गई। इस भयावह दिन की याद अब भी अपने मन में ताजा है।