ऋतब्रत के गुट में या ममता के साथ?: तीन बागी विधायक दीदी के प्रदर्शन में पहुंचे; टीएमसी की कलह ने लिया नया मोड़
तीन विधायकों ने ममता के साथ प्रदर्शन में की भागीदारी
Indianewslive247.com – ऋतब रत क ग ट म य - पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही संगठनात्मक खींचतान के बीच सोमवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। विधानसभा परिसर में आयोजित प्रदर्शन में ऋतब्रत बनर्जी कैंप से जुड़े तीन विधायकों ने ममता बनर्जी समर्थित गुट के साथ हिस्सा लिया। यह आंदोलन पूर्व मुख्यमंत्री के काफिले पर हुए कथित हमले के विरोध में निकाला गया था।
कंचरापाड़ा की घटना ने दिया प्रदर्शन को जन्म
इस प्रदर्शन की तत्काल वजह रविवार को कंचरापाड़ा में घटी घटना थी। ममता बनर्जी पुलिस हिरासत में मृतक बीरजू केओट के परिवार से मिलने वहां पहुंची थीं। आरोप है कि इस दौरान स्थानीय लोगों ने उनके वाहन पर कीचड़ और चप्पल फेंके तथा 'चोर-चोर' के नारे लगाए।
ममता बनर्जी ने इस घटना के बाद राज्य सरकार और पुलिस पर उपद्रवियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी जान को खतरा पैदा हो सकता था। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि ममता बनर्जी लोगों को उकसाने के लिए कंचरापाड़ा गई थीं और जनता ने केवल विरोध जताया।
तीन विधायकों ने दी ममता के साथ सहानुभूति
मेटियाब्रुज से विधायक अब्दुल खालिक मोल्ला, बशीरहाट से विधायक तौसिफुर रहमान और बारुईपुर ईस्ट से विधायक बिभास सरदार ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के प्रदर्शन में भाग लिया। तीनों विधायक पहले ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के पद के लिए समर्थन देने वाले 65 विधायकों में शामिल थे। टीएमसी में कुल 80 विधायक हैं।
तौसिफुर रहमान ने प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर स्पष्ट किया कि उनका राजनीतिक समर्थन ममता बनर्जी के साथ है और संगठन से जुड़ा विवाद अलग मुद्दा है। उन्होंने कहा कि जहां दीदी होंगी, वह वहीं रहेंगे।
बिभास सरदार ने कहा कि टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर जीतने वाले हर विधायक को इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता पर हमला हुआ है और वह इसकी कड़ी निंदा करते हैं।
अब्दुल खालिक मोल्ला ने कहा कि वह संगठनात्मक विवाद में रितब्रत के साथ हैं, लेकिन ममता पर हुए कथित हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।
वरिष्ठ नेताओं ने की प्रदर्शन की अगुवाई
ममता समर्थित गुट के प्रदर्शन का नेतृत्व कुनाल घोष, शोभन देव चट्टोपाध्याय, अशोक देव और बिमान बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने किया। प्रदर्शनकारियों ने कथित हमले के जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
कुनाल घोष ने आरोप लगाया कि हमले में शामिल लोगों को सरकार का संरक्षण मिल रहा है और उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को डराकर रोका नहीं जा सकता।
राज्य भर में फैला आंदोलन
ममता समर्थक टीएमसी कार्यकर्ताओं ने राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए। हाजरा में पुलिस ने एक जुलूस को रोक दिया और करीब 30 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया। टीएमसी नेता बैश्वानार चट्टोपाध्याय ने कहा कि ममता बनर्जी पर कथित हमले के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा।
संगठनात्मक विवाद गहराया
ऋतब्रत कैंप के तीन विधायकों का ममता समर्थित प्रदर्शन में शामिल होना ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद संगठनात्मक विभाजन से जूझ रही है। विपक्ष के नेता के पद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पार्टी के संगठन और निर्वाचित प्रतिनिधियों पर नियंत्रण की लड़ाई में बदल गया है।
ऋतब्रत कैंप ने बाद में विशेष संगठनात्मक बैठक कर वरिष्ठ विधायक अरूप राय को अध्यक्ष चुना और समानांतर राष्ट्रीय नेतृत्व संरचना की घोषणा की। कैंप का दावा था कि मौजूदा नेतृत्व ने निर्वाचित प्रतिनिधियों का बहुमत खो दिया है।
संसद तक पहुंचा विवाद
पार्टी के भीतर जारी टकराव का असर संसद तक भी पहुंचा है। खबर के मुताबिक, TMC के 20 लोकसभा सांसद नए बनाए गए नेशनल कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ चले गए हैं, जो अब NDA का सहयोगी है। इन सांसदों की अयोग्यता को लेकर दलबदल विरोधी कानून के तहत याचिकाएं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष लंबित हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तीन विधायक किस गुट से जुड़े हैं? तीनों विधायक ऋतब्रत बनर्जी कैंप से जुड़े हैं, लेकिन ममता बनर्जी के प्रदर्शन में भाग लिया।
प्रदर्शन की मुख्य वजह क्या थी? कंचरापाड़ा में ममता बनर्जी के काफिले पर कीचड़ और चप्पल फेंके जाने की घटना प्रदर्शन का मुख्य कारण बनी।
टीएमसी में कुल कितने विधायक हैं? तृणमूल कांग्रेस में कुल 80 विधायक हैं, जिनमें से 65 ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के लिए समर्थन दिया था।
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