आफत की बारिश: पहाड़ों से मैदानी इलाकों तक मानसून का कहर, भूस्खलन और बाढ़ से मची तबाही; IMD ने जारी किया अलर्ट
आफत की बारिश: मानसून का कहर हिमाचल और उत्तराखंड में बरस रहा है
आफत क ब र श - मानसून की भारी बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जनजीवन के आधारभूत कार्य जैसे शिक्षा और परिवहन को बाधित कर दिया गया है। इस आफत क ब र श के दौरान नदियों और ढलान वाले नालों का उफान बढ़ गया, जिसके कारण भूस्खलन और बाढ़ ने भारी क्षति का कार्य किया। मौसम विभाग (IMD) ने तीन-चार दिन के लिए इस बाढ़ के आगंतुक के लिए अलर्ट जारी किया।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में आपदाएं भयावह हो गई
शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश में एक व्यक्ति के मृत्यु और दो अन्य के घायल हो जाने की खबर आई। कुल्लू जिले में भारी बारिश के कारण एक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसमें 70 वर्ष के एक व्यक्ति की जान चली गई। उत्तराखंड में वर्षा जनित आपदाएं इतनी तीव्र हुई कि देहरादून समेत सात जिलों में 12वीं तक के स्कूल बंद हो गए। अतिरिक्त रूप से गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के अलावा 118 सड़कें बंद हैं, जिससे यातायात व्यवस्था बिखर गई।
मानसून की बारिश ने भारी आपदाओं के दौरान पहाड़ों से मैदानी क्षेत्रों तक लोगों के जीवन के बुरी तरह से प्रभाव डाला। इस आफत क ब र श के दौरान विशेष रूप से पश्चिमी हिमाचल प्रदेश में आपदा के कारण लोगों के घर खाली हो गए। जबकि एक रिपोर्ट के अनुसार, बरसाती विपत्ति ने गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के दौरान भी समस्याएं पैदा कर दी।
त्रिपुरा और अन्य राज्यों में आपदा के प्रभाव
त्रिपुरा में बरसात के कारण बाढ़ की स्थिति बन गई, जिसमें उनकोटी, खोवाई और धलाई जिले अधिक प्रभावित हुए। इस आफत क ब र श के कारण करीब 11 हजार लोग बेघर हो गए, जबकि 4,027 मकान नुकसान पहुंचाए। इस बरसात के दौरान हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, पूर्व और पश्चिम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पूर्वोत्तर बंगाल, सिक्किम, बिहार आदि राज्यों में बरसात के दौरान बारिश 7-20 सेमी तक हुई।
आफत की बारिश के कारण बाढ़ के जल स्तर बढ़ गए, जिससे नदियों और जल भरे नालों में लोगों के जीवन को खतरा लग गया। मुंबई-पुणे कॉरिडोर पर भोर घाट खंड में भारी बारिश के दौरान जनजीवन के आधारभूत खतरा बन गया। इस बरसात के दौरान जारी अलर्ट के बाद लोगों को जल्द से जल्द आश्रय स्थलों पर रहने के लिए कहा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि आपदा के दौरान लोगों को बाहर निकालने के लिए मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। एक इमारत के सामने वाला हिस्सा पूरी तरह मलबे में दबा है, इसलिए लोगों को पीछे से रास्ता बनाकर निकालने की कोशिशें की जा रही हैं।
आफत की बारिश के कारण भूस्खलन और बाढ़ के विपत्�